Categories: Articles
| On 3 years ago

अनुशासन की राह में मनोवैज्ञानिक बाधाये!

Share

मूलतः प्रत्येक व्यक्ति अनुशासित होता है एवं मुस्तैद तथा चाक-चौबंद व्यवस्था का हामी होता हैं! अनुशासन के महत्व को स्वीकार करने के उपरान्त भी समाज में अनुशासन विशेषतया स्वानुशासन के दर्शन कम ही होते हैं! सैद्धांतिक तोर पर सहमति के उपरान्त भी व्यवहारिक तोर पर अनुशासित समाज की स्थापना नहीं होने के कुछ मनोवैज्ञानिक कारण निम्नानुसार हैं.

१. अहम- अहम एक मानसिक अवरोध के रूप में समाज के सदस्यों में अवस्थित रहता हैं. अहम के कारण ही वह दूसरे द्वारा कहा गया सत्य भी स्वीकार नहीं कर पाते और अनावश्यक रूप से बाधाओ का विकास करते हैं!

२. दमित व्यक्तित्व - इच्छाओ और वास्तविकताओं के मध्य व्यापक दुरी के कारण मनुष्य अपने स्वाभाविक व्यक्तित्व को खोने लगता हैं एवं दमित इच्छाओ को छुपाने हेतु काल्पनिक मुखोटे अपने व्यक्तिव पर चस्पा कर लेता हैं , समय के दर्पण पर अपने मुखौटो में अपनी छवि देखते देखते वह स्वयं के मूल स्वरूप का विस्मरण कर देता हैं! मुखोटे वस्तुतः नकली होते है अतः उनके धारक की प्रतिक्रियाएं भी नकली और सत्य से दूर होती हैं। ऐसे प्रतिक्रियाएं भी अनुशासनहीनता को जनम देती हैं!

३. सत्य हेतु साहस का अभाव - सत्य का उद्दघोष एवं सत्य के साथ जीना सदेव से मुश्किल रहा हैं अतः स्वयम को सुरक्षित रखने हेतु भी बड़े व शक्तिशाली समूह के साथ रहने की प्राथमिकता के चयन के कारण भी आम व्यक्ति अनुशासन की उपेक्षा कर देता हैं!

४ परिवर्तन का विरोध- जड़ व चेतन दोनों ही मुल अवस्था में रहना पसंद करते है अतः व्यवस्था द्वारा वर्णितं सुधारात्मक कदमो का सहज विरोध किया जाता है!

५. दूषित संसाधन व व्यवस्था - उद्देश्य व संसाधन की पवित्रता के साथ ही शुचिता पूर्ण व्यवस्था भी समाज संचालन हेतु आवश्यक होती है. व्यवस्था पर काबिज़ सत्ताधारी शक्तिया हर स्थितियों से लाभान्वित रहने की ललक में परिवर्तनों की आत्मा को ही जमींदोज़ कर डालती है और समाज में अराजकता उतपन्न होने लगती हैं!

अतः अनुशासन की स्थापना से पूर्व इन मनोवैज्ञानिक कारणों के उपचार की भी योजना बनाना सार्थक रहता हैं। एक संस्था प्रधान हेतु यह आवश्यक है कि उपरोक्त अवरोधों के निराकरण हेतु विद्यालय में शैक्षिक कार्य के साथ ही सहशैक्षणिक, खेलकूद, मनोरंजन, सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देवे ताकि विद्यार्थियों को स्वयम को अभिव्यक्त करने व समूह में कार्य करने का अधिकतम अवसर प्राप्त हो सके।

View Comments