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| On 3 years ago

"कफ-पित्त-वात चक्र" पहचान कर बड़ी आसानी से रहे सुंदर व स्वस्थ।

"कफ-पित्त-वात चक्र" पहचान कर बड़ी आसानी से रहे सुंदर व स्वस्थ।

आज इंटरनेट पर सूचनाओं की भरमार है और आयुर्वेद व योग भी इससे अछूता नही रह गया है। जिस प्रकार हम शादियों में पचासों व्यंजनों के बावजूद तृप्त नही हो पाते जबकि घर मे बने दो-तीन आइटम के बावजूद जम के खाना खा लेते है उसी प्रकार ज्यादा इन्फॉर्मेशन से बेहतर है कम लेकिन काम की इंफॉर्मेशन रखना।
आपको सुंदर व स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ दो बातें याद रखनी है।
1. कफ-पित्त-वात


2. पहर।
कफ,पित्त व वात- यह शरीर की इनसाइड केमिकल स्टेटस है जो कि प्रकृति प्रदत्त है। परिमंडल ने सम्पूर्ण प्राणिजगत को एक सूत्र में पिरोया हुआ है व मनुष्य ने स्थानीय घड़ियों का निर्माण करके इसे वैज्ञानिक स्वरुप दिया हुआ है।
सामान्य भाषा में हम वात-पित्त-कफ बोलते है लेकिन आप इसे कफ-पित्त-वात बोलना शुरू कर दीजिए क्योकि हमे इसी चक्र में इसी चरण से जीना है।
पहर- चार घण्टे का एक पहर होता है यानी एक दिन में कुल जमा 6 पहर होते है।

याद रखना है- सुबह 6 बजे से हर चार घण्टे बाद एक पहर बदलेगा। सुबह 6 से 10 बजे तक कफ, 10 से 2 बजे तक पित्त व दोपहर 2 से सन्ध्या 6 तक वात। इसी प्रकार आगे।

क्या करे-
कफ के पहर में- यह समय सर से छाती तक की केयर का समय है। इस समय मे शांति

पूर्वक रहकर जीना चाहिए व कम मात्रा में भोजन लेना चाहिए। कफ को शांत रखने हेतु इस समयावधि में गुड़, शहद, सौंफ, पान व सोंठ का कुछ मात्रा में उपयोग करना चाहिए। जिनका कफ बिगड़ जाता है उनका मोटापा बढ़ जाता है।
पित्त के पहर में- यह समय सीने से कमर तक के शरीर की केयर का समय होता है। पित्त बिगड़ने से शरीर मे उग्रता बढ़ जाती है। पित्त को समान बनाये रखने से इस समय मे देशी घी, जीरा, अजवायन, धनिया व हींग का प्रयोग उपयोगी है।
वात के पहर में-
यह समय कमर से पैर तक की केयर हेतु उचित है। वात बिगड़ जाने से व्यक्ति कमजोर हो जाता है उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस समय मे तेल व जल का उपयोग सहायक रहता है। आप इस समय मे जूस, जल व जल के आधिक्य वाले खाद्य पदार्थो का इस्तेमाल कर सकते है।
सादर।