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करामाती मटर व शानदार मटर के दाने। इनसे बढ़कर है मटर के छिलके। Enchanting peas and fabulous peas. Pea shells are better than these.

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करामाती मटर व शानदार मटर के दाने। ऐसा हम हमेशा कहते है क्योंकि हम जानते है कि ऐसी मीठी बातों से हम बच्चों को लुभावने सपने दिखाकर उन्हें ग्रीन वेजिटेबल खिला देते है। अगली बार आप जब भी ऐसा बोलेंगे तो हम आपको विश्वास दिलाते है कि आप बिलकुल सत्य बोल रहे है क्योंकि मटर करामत दिखाते है व उसके दाने वास्तव में शानदार है। आइये, जानते है मटर के बारे में।

मटर’गश्ती’ का मतलब क्या है? 👌

हमने तो बहुत की है ” मटरगस्ती”। अल सुबह घर से निकलने के बाद शाम को जब तक घर, घरवाले व उनके जूतों का साइज याद नही आता तब तक हम मटरगश्ती ही किया करते थे। यह एक मुहावरा है जिसका मतलब होता है-

मटरगश्ती यानी सैर सपाटे, बिना मतलब निर्थक घूमने, बेकार का टाइम पास करने या एक शब्द में बोले तो ” आवारागर्दी ” से है।


मटर के दाने ही नहीं, बल्कि इसके छिलके भी हैं ख़ास♥️

प्रिय पाठकों, पहले मटर पर एक लोकल शेर सुन लीजिए। इसके बाद करेंगे कुछ काम की बात।

मटर 200 ग्राम से कम ही चबाना, मटर का दाना ।        छिलकों को इस सीजन में जमकर आजमाना।।

हम तो आपको सारी बात मटर के लिए कर रहे है लेकिन अगर आप ढंग से नही सुनेंगे तो फिर ना कहना कि पहले क्यों नहीं बताया आपने?

आज बता रहा हूँ मटर के बारे में। मटर बाज़ार में आने की तैयारी कर रहा है। मटर को हमारे मध्यभारत के इलाके में बटाना या बटरा भी कहते हैं, अंग्रेजी बोलचाल के शौकीन लोग इसे ‘ग्रीन पीस’ कहते हैं। इसके ताज़े दानों की सब्जी कमाल की लगती है। दानों को दूसरी अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर कई स्वादिष्ट सब्जियां भी बनायी जाती है। मटर के पराठे भी शानदार लगते हैं। अब ये सारी बातें तो आप सब को पता ही है। अब कुछ नयी बात करें…

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मटर/ बटाना/ ग्रीन पीस के दानों को निकालने के बाद इसके छिलकों को डस्टबीन में डाल दिया जाता है। मगर आप ऐसा न करें, वो काम करें जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ। सबके पहले जब आप मटर ख़रीद के लाये तो इनके छिलकों को खूब अच्छी तरह से धो लें क्योंकि इसपर केमिकल्स हो सकते हैं। इन प्यारे हरे मटरो की साफ पानी से साफ धुलाई करने के बाद इन्हें आप कई तरह से इस्तमाल कर सकते हैं। इन धुले हुए मटर के छिलकों के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर आप उन्हें बेसन के साथ मिक्स कर पकोड़े बना सकते हैं। इसके मिक्स में थोड़ी सी मेथी भाजी और 2-4 काली मिर्च डालकर स्वाद दुगुना करा जा सकता है। पकोड़े लगते बड़े टेस्टी हैं। पकोड़ों के अलावा इसका सूप बना सकते हैं, सूप तो एकदम सुपर सॉलिड टेस्टी होता है। दो मुट्ठी बारीक कटे हुए छिलके, एक मुट्ठी मटर के दाने, 3 कप पानी में उबालें, जब उबलने लगे तो इसमें 2 चम्मच देसी गाय का घी और चाहें तो एक चम्मच दूध की मलाई डाल दें। जबरदस्त स्वादिष्ट सूप बनता है। अब बात करते हैं, इन छिलकों के गुणों के बारे में।

मटर के छिलकों बहुतायत में दनादन न्यूट्रीएंट्स पाए जाते हैं। फाइबर्स, प्रोटीन्स और लगभग सभी तरह के विटामिन। सिर्फ दो मुट्ठी छिलकों को अपने पेट की यात्रा करवा देंगे तो फाइबर्स की ताबड़तोड़ मात्रा आपके शरीर को मिल जाएगी। मटर जो है वो दाल फेमिली का सदस्य है इसलिए इसमें प्रोटीन भी भरपूर होता है। विटामिन C और K भी अच्छी खासी मात्रा में पाया जाता है। क्लीनिकल स्टडीज बताती हैं कि ‘लो ग्लायसिमिक इंडेक्स‘ होने की वजह से डायबिटिक लोगों के लिए बहुत बढ़िया हैं, मटर के छिलके। ज्यादा फाइबर्स होने की वजह से यह डायबिटिक रोगियों के शुगर लेवल के तेज़ी से बढ़ने को रोकता है, यानी ‘स्पाइक्स’ कंट्रोल करने में गजब ही मददगार होते हैं छिलके। शारीरिक कमजोरी दूर करने में भी ये असरकारक हैं। फाइबर्स, प्रोटीन, विटामिन्स, थायमिन, फोलेट, आयरन, और क्या क्या चाहिए आपको, सब हैं इन छिलकों में…दानों से ज्यादा दम छिलको में है यानी चाय से ज्यादा गरम तपेली है ।

दानों को लिमिटेड अमाउंट में खाएं क्योंकि उनमें ‘एंटी न्यूट्रीएंट्स’ होते हैं। ऐसा भला क्यों? तो सुनिये… लिमिटेड अमाउंट मतलब 200 ग्राम, 200 ग्राम से कम खाएं क्योंकि इनमें फाइटिक एसिड और लेक्टिंस पाए जाते हैं जो शरीर में आ जाएं तो शरीर की कोशिकाओं में दूसरे न्यूट्रिएंट्स की एंट्री रोक देते हैं। इसीलिए कहता हूँ, दाने तो खाएं ही (200 ग्राम से कम ) पर छिलकों को जरूर उपयोग में लाएं, येन केन प्रकारेण।

हमारे पातालकोट के आदिवासियों के घरों में तो इसके छिलकों की चटनी भी बनायी जाती है, ताकत के लिए…और आप शहरी लोग तो शिलाजीत के चक्कर में जूते घिसे जा रहे हैं। थोड़े ढंग से भटको। आज की पंचायत बस इतनी सी.. अब मैं चला मटर के छिलकों और दानों की सब्जी और सूप बनाने, आप टपकाते रहें लार…मुझे क्या?

बात जमी तो पोस्ट साझा करें…नहीं जमी तो ट्रोल करें… कोई शिकायत नहीं 😊

दीपकआचार्य की पोस्ट से हम हुए प्रभावित।

यह पोस्ट आदरणीय श्री दीपक आचार्य की मूल पोस्ट है। सोशल मीडिया का युग है। पोस्ट अच्छी है इसका प्रसार कर रहे है। श्रीमान दीपक जी का आभार व तहे दिल से शुक्रिया।

Divyanshu
About author

दिव्यांशु एक प्रमुख हिंदी समाचार पत्र शिविरा के वरिष्ठ संपादक हैं, जो पूरे भारत से सकारात्मक समाचारों पर ध्यान केंद्रित करता है। पत्रकारिता में उनका अनुभव और उत्थान की कहानियों के लिए जुनून उन्हें पाठकों को प्रेरक कहानियां, रिपोर्ट और लेख लाने में मदद करता है। उनके काम को व्यापक रूप से प्रभावशाली और प्रेरणादायक माना जाता है, जिससे वह टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं।
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