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क्रियाशील ग्रीष्मकालीन अवकाश योजना

क्रियाशील ग्रीष्मकालीन अवकाश योजना

ग्रीष्मकालीन अवकाश में विद्यार्थियों हेतु कोई विशेष करणीय कार्य नही होता अतः अधिकांश विद्यार्थी इस अत्यंत महत्वपूर्ण अवधि को व्यर्थ में ही व्यय कर देते है। कार्य योजना अभाव में विद्यार्थी ना तो किसी विषय विशेष की तैयारी ही कर पाते है एवम ना अपनी किसी अभिरुचि या खेलकोशल का विकास कर पाते है।

1970-80 के दशक में विद्यालयों द्वारा क्रियाशील अवकाश योजना का संचालन किया जाता था। इस समयावधि में विद्यालय द्वारा ग्रीष्मावकाश में उपचारात्मक शिक्षण, सीखो-कमाओ उद्योग कार्य , खेल-कूद की विशेष प्रशिक्षण कक्षाएं, वाचनालय को विद्यार्थियों व जनता हेतु खुला रखने इत्यादि गतिविधियों का संचालन किया जाता था।

संस्थाओं द्वारा निर्धारित प्रारूप में क्रियाशील अवकाश योजना का निर्माण

भी किया जाता था एवम उपलब्ध संसाधनो के श्रेष्ठतम उपयोग का प्रयास किया जाता था। "सीखो कमाओ योजना " के संचालन हेतु समय पर कच्चा माल क्रय करके दैनिक उपयोग वस्तुओं का निर्माण तत्पश्चात विक्रय की व्यवस्था भी की जाती थी ।

संस्थाओं द्वारा प्रस्तावित योजना नियंत्रण अधिकारी को प्रेषित करकर उसका अनुमोदन भी करवा लिया जाता था। नियंत्रण अधिकारी द्वारा

अपने क्षेत्र में संचालित होने वाली समस्त योजनाओं हेतु स्वीकृति जारी की जाती थी।अंत मे इन योजनाओं सम्बंधित प्रतिवेदन मण्डल व राज्य स्तर पर प्रेषित किया जाता था।

वर्तमान समय मे भी अनेक संस्थाओं द्वारा इस प्रकार की विशिष्ठ गतिविधियों का संचालन किया जाता है। अनेक संस्थाओं द्वारा विद्यालय खुला रखे बिना भी गृह कार्य, प्रोजेक्ट कार्य, प्रायोगिक कार्य, संकलन, संग्रहण, अभिरुचियों के विकास सम्बन्धी कार्य करवाये जाते है।

इस प्रकार की गतिविधियों से ना केवल विद्यार्थियों के समय का सदुपयोग होता है बल्कि विद्यालय में ठहराव के विकास के साथ ही साथ नामांकन में वृद्धि भी होती है। विद्यालय के साथ अभिभावकों का जुड़ाव भी बढ़ता है एवम प्रतिष्ठा का विकास भी होता है।