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| On 3 years ago

'टके सेर भाजी, टके सेर खाजा' मारवाड़ी लोक कथा !

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” टके सेर भाजी, टके सेर खाजा” मारवाड़ी लोक कथा !

साधो! एक पुरानी बात है! एक चाचा यानी काकोसा और उसका भतीजा अपनी जेब में अच्छे खासे रूपये लेकर घूमने निकले! उनकी राह में एक छोटा सा क़स्बा आया! बड़ा अजीबो गरीब!

काका भतीजा ने कस्बे के बाजार में एक राहगीर को पूछा ” भाई! आप यहाँ रहते हो?’ उसने कहा ” जी हाँ”! उन्होंने वापस पूछा ” भाई इस कस्बे का नाम क्या है?” जवाब मिला “कुछ भी कह लो!

तभी एक घुड़सवार मिला! उन्होंने उस घुड़सवार से पूछा ” भाई! कहा जा रहे हो?” तो घुड़सवार ने जवाब दिया ” मुझे क्या पता! घोड़े की मर्जी!”

आखिर खाना खाने के लिए वो एक भोजनालय में प्रविष्ट हुए! उन्होंने पूछा ” भाई! दाल क्या भाव है?” जवाब मिला ” एक टके में सेर”! सब्जी क्या भाव है ? जवाब मिला ” एक टके में सेर”! खाजा क्या भाव है? जवाब मिला ” एक टके में सेर”! आखिर उन्होंने पूछा ” भाई! बादाम क्या भाव है ? जवाब मिला ” एक टके में सेर”!

काका भतीजा ने बड़े अचंभित हुऐ! क्या क़स्बा है? हर चीज का एक भाव! खेर! उन्होंने बड़े मौज से कम दाम पर बढ़िया चीजे खायी!

भतीजा अपने चाचा से कहने लगा कि चाचा हम इसी कस्बे में बस जाते है! चाचा स्याना था उसने कहा” नहीं भतीजे! यहाँ रहना ठीक नहीं! यहाँ कोई कानून नहीं! हर चीज एक ही कसोटी पर तोली जाती है! पर भतीजे ने कहा” नहीं चाचा! यहाँ बड़ी मौज है!” आखिर भतीजे की जिद्द पर दोनों वह रहने लगे!

कुछ दीनो बाद दोनों चाचा भतीजा खा खा कर मोटे ताजे होने लगे! अचानक एक चरवाहे की भेड़ एक दीवार के गिरने से मर गयी! उसने राजा के पास गुहार की! राजा ने माकन मालिक को बुलाया तो उसने कहा कि ” महाराज! कारीगरो ने दीवार कमजोर बना दी, इसमें मेरा क्या कसूर!” महाराजा ने कारीगरो को बुलाया, उन्होंने फ़रियाद कर दी ” हुजूर! ठेकेदार ने मिलावट कर दी तो हमारा क्या कसूर?” ठेकेदार ने तलब होने पर कहा ” हुजूर! मंत्री ने कर बढ़ा दिया, तो मेरा क्या कसूर?”

आखिर महाराज ने मंत्री को बुलाया और समझदार मंत्री कोई उत्तर नहीं दे सका तो महाराज ने उसको फांसी की सजा सुना दी! मंत्री फ़ासी के तख्ते पर चढ़ाया जाने लगा तो जल्लाद ने कहा ” महाराज! फंदा आज मैंने बड़ा बना लिया और मंत्री दुबला पतला है!” महाराज ने तुरंत निर्णय किया ” कोई बात नहीं! मंत्री को छोड़ दो! फंदा लेकर बाजार जाओ, और किसी मोटे ताजे व्यक्ति को लेकर आओ और उसे फ़ासी चढ़ा दो!”

सैनिक बाजार पहुचे, उनको मोटा ताजा भतीजा मिठाई की दुकान पर खाजे खाते हुऐ मिला, उन्होंने भतीजे की गर्दन का नाप लिया तो पाया कि भतीजे की गर्दन फ़ासी के फंदे के हिसाब से बराबर है सो सैनिक भतीजे को पकड़कर फ़ासी के तख्ते पर ले आये! भतीजा हतप्रभ हो गया! उसका सर चकराने लगा! यमदूत खुद के आस पास खड़े दिखाई देने लगे!

तभी चाचा को खबर लगी, वो दौड़ा भागा भतीजे तक पंहुचा! उसने समय को समझा, काल की गति को जाना और परिवेश के अनुसार बुद्धि का प्रयोग किया! चेहरे पर मुस्कान लाकर वो भतीजे के पास पंहुचा और उसको जोर जोर से ऊँची आवाज में बधाइयां देने लगा!

चाचा ने महाराज से मुताबिक होकर कहा” महाराजधिराज! धन्यवाद!कृपया मुझे भी अपने इस भाग्यशाली भतीजे के साथ फ़ासी पर लटका दे!
सभी का मुह खुला का खुला रह गया! ये क्या? फ़ासी चढ़ने वाले को बधाइयाँ और साथ में फ़ासी पर चढ़ने की दरख्वास्त!

राजा ने पूछा ” क्या बात है ? तुम फांसी क्यों चढ़ना चाहते हो ?
चाचा ने कहा ” महाराज! आज बड़ा विशेष योग है ! जो आज फ़ासी चढ़ेगा वो स्वर्ग का राजा बनेगा!”

ये सुनते ही राजा ने तुरंत दौड़ कर फ़ासी के फंदे को अपने गले में डाल लिया और जल्लाद को हुक्म जारी किया कि तुरंत उसे फ़ासी पर चढ़ा दे!

राजा फांसी पर चढ़ गया! भतीजे ने चाचा से माफ़ी मांगी और दोनों कस्बे को छोड़ कर अपने ग्राम की राह कि तरफ रवाना हो गए!

चाचा ने भतीजे को कहा!

अंधेर नगरी, अनभुज राजा!

टके सेर भाजी ,टके सेर खाजा!१\!

टके सेर लड्डू,टके सेर पेड़ा!

टके सेर हलुआ, टके सेर पेठा!!

भतीजे ने माफ़ी मांगी!

सादर!