Categories: Articles
| On 3 years ago

नई शिक्षा नीति- जून तक सम्भावित।

नई शिक्षा नीति- जून तक सम्भावित। प्रत्येक नागरिक हेतु अतिआवश्यक पठनीय विषय।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2017

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2017 का मसौदा तैयार करने के लिए प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक एवं पद्मविभूषण डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है! पहले इस समिति की रिपोर्ट दिसंबर 2017 में आने वाली थी! इसके बाद में 31 मार्च 2018 तक सम्भावित थी लेकिन अब यह जून 2018 तक अपेक्षित है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई नीति में प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, उच्च शिक्षा के खर्च को वहन करने में असमर्थता और ज्यादातर लोगों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों को रखा गया है!

पूर्व की शिक्षा नीतियाँ

वर्तमान शिक्षा नीति पर बात करने से पहले आवश्यक है कि हम इससे पहले देश हेतु निर्मित शिक्षा नीतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते है-

भारतीय संविधान के चौथे

भाग में उल्लिखित नीति निदेशक तत्वों में कहा गया है कि प्राथमिक स्तर तक के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाय। इसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की बेहतरी हेतु निरन्तर कार्य किया जा रहा है।

सर्वप्रथम 1948 में डॉ राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के गठन के साथ ही भारत में शिक्षा-प्रणाली को व्यवस्थित करने का काम शुरू हो गया था। 1952 में लक्ष्मिस्वामी मुदालियर की अध्यक्षता में गठित माध्यमिक शिक्षा आयोग, तथा 1964 में दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में गठित शिक्षा आयोग ने महत्वपूर्ण अनुशंषाएँ की थी।

शिक्षा नीति 1968-

माध्यमिक शिक्षा आयोग व कोठारी आयोग की अनुशंषाओ के आधार पर 1968 में शिक्षा नीति पर एक प्रस्ताव प्रकाशित किया गया जिसमें ‘राष्ट्रीय विकास के प्रति वचनबद्ध, चरित्रवान तथा कार्यकुशल’ युवक-युवतियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया।

शिक्षा नीति 1986-

बदलती राष्ट्रीय परिस्थितियों एवम विभिन्न स्तरों पर प्राप्त सुझावों के आधार पर मई 1986 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई, जो अब तक चल रही है। इस बीच राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा के लिए 1990 में आचार्य राममूर्ति की अध्यक्षता में एक समीक्षा समिति, तथा 1993 में प्रोफेसर यशपाल समिति का गठन किया गया।

नई शिक्षा नीति मसौदे के जारी कुछ बिंदु/प्राप्त सुझाव इत्यादि-

1. छात्रों को फेल न करने की नीति पांचवीं कक्षा तक के लिए

सीमित करना, उच्च प्राथमिक स्तर पर फेल करने की व्यवस्था बहाल की जाएगी।
2. ज्ञान के नए क्षेत्रों की पहचान के लिए एक शिक्षा आयोग का गठन करना।
3. शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर जीडीपी के कम से कम छह फीसदी करना।
4. शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में प्रवेश को बढ़ावा देना।
5. पांचवीं कक्षा तक निर्देश के माध्यम (मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन) के रूप में मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल कर शिक्षा प्रदान करना।
6. प्राथमिक स्तर तक निर्देश का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा है तो दूसरी भाषा अंग्रेजी होगी ।
7. उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तरों पर तीसरी भाषा चुनने का अधिकार संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्यों और स्थानीय अधिकारियों के पास होगा।
8. भारतीय संस्थाएं भी विदेशों में अपने कैंपस स्थापित कर सकेंगी ।
9. विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषयों के लिए साझा राष्ट्रीय पाठ्यक्रम तैयार किए जाएगा।
10. सामाजिक विज्ञानों, पाठ्यक्रम का एक हिस्सा पूरे देश में एक जैसा रहेगा और बाकी हिस्सा राज्य तय करेंगे।
11. स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूपरेखा और दिशानिर्देश विकसित किए जाएंगे ।
12. अध्यापन के पेशे की तरफ युवाओ के ध्यानाकर्षण हेतु अभियान।
13. गणित, विज्ञान और अंग्रेजी में 10वीं कक्षा की परीक्षा दो चरणों में लेने का सुझाव ।

आप भी रखे अपने विचार

शिक्षा नीति के माध्यम से ही हमारे राष्ट्र की

दिशा व दशा तय होगी। उपरोक्त मसौदे में बहुत महत्वपूर्ण विषय शामिल हुए है लेकिन कुछ अभी भी अनछुए है। राष्ट्र के निर्माण में सलग्न शिक्षको, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, जनसमुदाय, पेशेवरों से निवेदन है कि इस अत्यंत गम्भीर विषय पर अपनी बात अवश्य रखे।
मानव संसाधन मंत्रालय के वेबसाइट www. mygov.in , समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में आलेख लिखे व राष्ट्रनिर्माण हेतु अपना अमूल्य योगदान दे।

बहुत से विषय अभी भी नई शिक्षा नीति से बाहर

अभी भी बहुत विषय यथा- भारतीय शिक्षा में "भारत-तत्व" को सम्मिलित करना, नैतिक शिक्षा, पर्यावरणीय जागरूकता, देशज विषयों, लोकज्ञान, लोककलाओं, आयुष, सामाजिक समरसता, सैनिक शिक्षा, जीवन की पूर्णता, भारतीय दर्शन जैसे अनेकानेक विषय अभी भी अनछुए है।

देश को दे नई दिशा

कृपया जागिये। यही वह समय है जब आपकी बात राष्ट्रीय पहचान बन कर देश को नया स्वरूप प्रदान कर सकती है।
सादर।

View Comments

  • Me eak praymari education ka teacher hu 18 year se Garmin school me teaching kara ta hu Bharat me jab tak praymari schoolo ki mulbhut suvidha ye nahi di jayegi tab tak jesi ki yes I hi sthhiti rahegi Garmin elako me signal teacher schools he or electricity he hi nahi or fund ka adhabhut tank eak praymari school ko s. F g ke rup me Mayra 5000 rup . Kisko one year kese chalayega