Categories: Circular
| On 3 years ago

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006

Share

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006

(पीसीएमए 2006 )

बाल विवाह हिंसा , गरीबी, कुपोषण और खराब स्वास्थ्य के चक्र को मजबूत करता है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा फर्ज है कि हम बाल विवाह के विरुद्ध अपनी चुप्पी तोड़े व बालविवाह को रोके।

यह कानून 1 नवम्बर 2007 से लागू किया गया। बाल विवाह करना या करवाना संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है।
इस अधिनियम के अनुसार, बालविवाह वह है जिसमें लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम या लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम हो। ऐसे विवाह को बाल विवाह निषेध अधियिम 2006 द्वारा प्रतिबंधित किया गया है।

यह कानून किस पर लागू होता है?

यह कानून भारत के सभी नागरिकों पर लागू होता है।

इस कानून में क्या है ?

इस कानून के अनुसार 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र का लड़का बच्चा या नाबालिग होता है।

यह जरूरी है कि अगर किसी व्यक्ति को पता चलता है कि कहीं बाल विवाह होने जा रहा है या बाल विवाह संपन्न हो रहा है या संपन्न हो चुका है तो वह उसे न होने दे या उसके बारे में संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

बाल विवाह की सूचना किसको दें?

बाल विवाह के पहले या बाद में कोई भी व्यक्ति इस घटना की रिपोर्ट/सूचना निम्नलिखित अधिकारियों के पास तत्काल दे सकता है-

• संबंधित पुलिस थाना
• बाल विवाह निषेध अधिकारी (संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट एवं तहसीलदार)
* बाल विवाह निषेध अधिकारी द्वारा नियुक्त किए गए व्यक्ति एवं अधिकारी
• प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट
• बाल कल्याण समिति या उसके सदस्य
* जिला मजिस्ट्रेट

बाल विवाह संबंधी शिकायत मौखिक या लिखित, फोन कॉल, चिट्ठी या टेलीग्राम, ई-मेल, फैक्स या हाथ से लिखे हुए कागज़ के रूप में उपरोक्त अधिकारियों को दी जा सकती है।

जो बाल विवाहों को मंजूरी /मान्यता और प्रोत्साहन देते हैं, उनको 2 साल की कड़ी जेल और/या 1 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।

इस कानून में किन-किनको सजा हो सकती है ?

बाल विवाह में शामिल होने वाले, करवाने वालेएवं प्रोत्साहित करने वाले जैसे-अभिभावक, लड़के और लड़की के माता-पिता, बराती, शादी में शामिल रिश्तेदार, ऐसे विवाह को संरक्षण देने वाले जातिपंच या मुखिया, पण्डित/पादरी/मौलवी, ढोली, नाई, टेन्ट वाले, बैन्ड वाले, फोटोग्राफर, हलवाई, विवाह करवाने वाले बिचौलिये और विवाह के लिए केसी भी प्रकार की सेवाएं देने वाले सभी को सजा का प्रावधान है।

इस कानून के तहत, यदि 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी पुरुष किसी बच्ची से विवाह करता है तो उसे सजा दी जायेगी।

बाल विवाह शून्यीकरण या रद्द कैसे करे ?

जिन बच्चों का बालविवाह कर दिया जाता है। उन बच्चों को यह कानून ऐसे विवाह से मुक्ति का अधिकार देता है यानि वो अपने बालविवाह को शून्य या रद्द करवा सकते हैं।

बाल विवाह को कब तक शून्य किया जा सकता है?

जिस बच्चे का बालविवाह किया गया है, तो वह अपने बालिग (वयस्क) होने के दो वर्ष तक अपने विवाह को शून्य करने की मांग कर सकती है/सकता है।

बाल विवाह कहां पर शून्य हो सकेगा ?

नाबालिग अपने बाल विवाह को शून्य करवाने के लिए बालविवाह रोकथाम अधिकारी (संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट या तहसीलदार) के सहयोग से जिला सत्र न्यायालय में प्रार्थना-पत्र लगा सकते हैं। बालिग व्यक्ति सीधे ही जिला न्यायालय में प्रार्थनापत्र लगा सकते हैं।

गुजारा भत्ता ?

*बाल विवाह से प्रभावित बच्चों को चिकित्सकीय और कानूनी सहायता सहित हर संभव सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
* यदि पति व्यस्क है तो बालिका वधु को पुनर्विवाह तक उसके भरण-पोषण को जिम्मा लेना होगा।
*यदि विवाह के समय पति भी नाबालिग है तो उसके अभिभावकों को गुजारा भत्ता देना होगा।

चाइल्ड लाइन नम्बर

बाल विवाह को रुकवाने के लिए चाइल्ड लाइन नम्बर -1098 पर कॉल किया जा सकता है।