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मलाला यूसुफ जई के वापस पाकिस्तान आने के मायने।

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मलाला यूसुफ जई के वापस पाकिस्तान आने के मायने।

पडोसी राष्ट्र की मलाला यूसुफजई किसी पहचान की मोहताज नही है। 2014 में भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में शान्ति हेतु संयुक्त रूप से पुरुस्कार जीत कर सम्पूर्ण विश्व का ध्यानाकर्षण किया था।

अक्टूबर 2012 में, मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने उदारवादी प्रयासों के कारण वे आतंकवादियों के हमले का शिकार बनी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गई और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई थी। तब से इन्होंने अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरुस्कार यथा- अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, सखारोव पुरुस्कार, मेक्सिको शांति पुरस्कार, यूएनओ ह्यूमन राइट अवार्ड जीते है।

ऑक्सफोर्ड विद्यालय से फिलोसोफी, हिस्ट्री ओर पोलटिकल साइंस की शिक्षा प्राप्त इस युवा का वापस पाकिस्तान में लौटना अकारण नही है। मलाला मानती है कि जीवन का एक मकसद होता है और बच्चों हेतु गुणात्मक शिक्षा व महिलाओं हेतु बराबरी का दर्जा दिलवाना उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।

2012 के 6 साल बाद पुनः वापस कल बुधवार 28 मार्च 2018 पाकिस्तान पहुची मलाला की वापसी का गुप्त कार्यक्रम उजागर हो गया है। मलाला चाहे 6 वर्ष बाद पुनः लोटी हो लेकिन पाकिस्तान में बदला कुछ नही है यहाँ तालिबान आज भी सक्रिय और शिक्षा व महिलाओं की पुरानी स्तिथि कायम है।

मलाला भारत आना व यहाँ की बालिकाओं के साथ कार्य करना चाहती है वह अपनी पहल गुलमाकाई नेटवर्क का भारत मे विस्तार चाहती है। यूएनओ की इस शांति दूत के भारत मे बड़ी सँख्या में प्रशंसक है।

मलाला की वापसी का पाकिस्तान के शिक्षा स्तर, महिलाओं की बराबरी के मुद्दे व भारत-पाकिस्तान सम्बंधित मुद्दों पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा , यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। पाकिस्तान में आयोजित होने वाले "मीट मलाला" कार्यक्रम में इन मुद्दों पर मलाला प्रकाश डालेगी व अपनी भावी योजनाओं का खुलासा कर सकेगी।

मलाला द्वारा दिये गए साक्षात्कारों से जाहिर है कि वह भारत व पाकिस्तान के बीच अच्छे पड़ोसियों से बढ़कर भी बेहतर रिश्तों के पक्ष में है एवम वह वर्तमान उद्देश्यों की पूर्ति के साथ ही राजनीतिक महत्वाकांक्षी भी है। आज का निर्णय ही भविष्य का निर्माण करता है।

मलाला की वापसी बहुत मायने रखती है। कट्टरपंथी नेताओ, अलगाववादी शक्तियों व भारत विरोधी ताकतों के चलते पाकिस्तान भारत से स्नेहपूर्ण सम्बन्धता स्थापित नही कर सका है लेकिन सम्भावना कभी समाप्त नही हो सकती।