” मिशन ऑफ़ माय स्कुल !”

” मिशन ऑफ़ माय स्कुल !”

मेरे विद्यालय का ध्येय व उसकी प्राप्ति।

ध्येय-

“ध्येय के बिना कार्य निरूपण, स्वप्न मात्र है। बिना ध्येय के कार्य मात्र समय बिताना हैं।”
किसी भी संस्था हेतु नियोजन, संगठन, स्टाफिंग व प्रबंधन से पूर्व उसके लिए एक ध्येय का निर्माण आवश्यक है।

मेरी दृष्टि, मेरा स्कूल-

एक संस्था प्रधान की दृष्टि में उसका विद्यालय एक वर्ष अथवा एक अवधि के पश्चात कैसा होगा? यह अत्यंत व्यक्तिगत एवम् उसकी महत्वकांक्षा पर निर्भर हैं। आज हमारे सामने अनेक उदाहरण उपलब्ध है जिनमे एक राजकीय विद्यालय के संस्थाप्रधान ने लक्ष्य लेकर कार्य किया व विद्यालय को एक विशेष पहचान प्रदान की।

श्री रदरफोर्ड के अनुसार एक संस्था प्रधान के समक्ष एक स्पष्ठ ध्येय होना चाहिए और यह ध्येय विद्यार्थियों की आवश्यकता के आधार पर निर्धारित होना चाहिए। यह ध्येय विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की स्तिथि पर आधारित होना चाहिए।

विद्यालय का ध्येय सभी पक्षों को सहजते हुए निर्धारित किया जाना चाहिए। इस ध्येय को सभी सहायक पक्षों में संप्रेषित करते हुए सहयोग प्राप्त किया जाना चाहिए। विद्यालय के सभी पक्षों को ध्येय स्पष्ठ हो एवम् सामूहिक प्रयासों से इसे प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना सम्भव हैं।

विद्यालय का ध्येय किसे कहे?

” दृष्टि वह है जो उत्कृष्ठ कृति को रंगों के मिलान के साथ ही देख ले” -अज्ञात।

एक संस्था प्रधान को भी इसी प्रकार वर्तमान स्तिथियों के समक्ष अपने उद्देश्यों की परिणीति अपने विजन में देखे एवम् उसका विज़न ध्येय में दर्शित हो। NFC 2005 यह कहता है कि ” हमें हर बच्चे को सिखाना है ना की याद करवाना हैं।” विद्यालय क्योंकि हमारी निजी सम्पति नहीं होकर राज्य की जनता के लिए समर्पित इकाई है अतः हमें विद्यालय का ध्येय या उदेश्य समस्त पक्षों को सम्मिलित करते हुए बनाना चाहिए।

ध्येय एक ऐसा कथन होता है जो हमें व्यस्त रखता है, भविष्य की तरफ राह बताये, सम्भावनाओ को उजागर करे व साधारण होते हुए भी मूल्यों से परिपूर्ण हों। ध्येय निर्माण करते समय प्रत्येक संस्था प्रधान अपने विद्यालय की स्तिथियों , संभावनाओं एवम् सहयोगियों को ध्यान में रखकर बनाये और इसे विद्यालय योजना में दर्शित करे। इस ध्येय को कार्यालय, कक्षाओं एवम् विद्यालय परिसर में अंकित करे ताकि विद्यालय के सभी पक्ष ध्येय से अवगत रहे एवम् प्राप्ति हेतु प्रयासरत रहे।

विद्यालय का ध्येय वाक्य-

विद्यालय के ध्येय वाक्य को एक टेग लाइन या मोटो के रूप में न्यूनतम शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है। प्रत्येक विद्यालय अपने आप में अनूठा होता है एवम् उसका ध्येय पृथक होता है अतः उसकी टैगलाइन या मोटो भी पृथक होगा। इस टैगलाइन का निर्माण कर उसका व्यापक प्रचार विद्यालय के समुचित हित में करें। एक विद्यालय के ध्येय निर्माण के मूल में 3 बिंदु अहम् होते है-

1 शैक्षिक

2 सहशैक्षिक

3 भौतिक

इनके इतर भी स्थानीय स्तिथियों एवम् आवश्यकताओं के आधार पर कुछ अन्य बिन्दुओं का चयन भी किया जाता है। ध्येय निर्माण के साथ ही अनिवार्य रूप से कार्य योजना का निर्माण भी कर लिया जाना चाहिए ताकि मंजिल की तरफ कार्य आरम्भ हो सके।

1 COMMENT

  1. Excellent idea sir.
    Once I visited “aadarsh vidya mandir” and I been there for whole day and I went there because of knowing all the routine activities by adarsh school group. And when I visited 1st classroom I seen there a tagline (dhyey vaaky of class) called speciality of class (kaksham vishisht).
    When I went to another classroom and I seen same tagline but different tagline…. Then I asked a aacharya (teacher) that what is it?

    Then he told me the whole story behind speciality of the class (tagline) .
    He told me that the main reason behind this is that all classes have a tagline and all are diffrent and if a student starts from very from bilegining class to 12th, he will be knowing total 12 different things. It means he will be master of 12 things (topics) after 12 years. What they have the topic/matter in that tagline are varnamala, barhkbadi, , counting hoti 1000, pahaade upto 50, only eng speaking, only pure hindi speaking, good writing, cursive writing, knowing of all states or countries names by every student etc…… Likewise they have diffrent tasks as tagline for whole year….

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