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| On 3 years ago

मुखिया जी, नमस्कार। अब आप ही मिटाओ सारे क्लेश व झगड़े।

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"घर का मुखिया ही हटा सकता है घरेलू क्लेश"।

एक अज्ञात विद्वान ने सही ही लिखा था कि " मैं अपने गृह क्लेश के मद्देनजर विश्वशांति की कल्पना तक नही कर सकता क्योंकि हर परिवार अकारण ही द्वंद्व में रत है जबकि देशो के पास तो अनेक कारण है।

"अहम" और "वहम" के चलते आज परिवार में हर शख्स एक दूसरे से खिंचा-खिंचा सा है। आपसी मतभेद मनभेद की राह पर आगे बढ़ चुके हैं। आपसी वार्तालाप में सहजता का स्थान सजगता ने ले लिया है। लोग घर के बाहरी मामलात में सामान्य है लेकिन घर-परिवार में गूढ़ कूटनीतिज्ञ बनते जा रहे हैं।

परिवार में प्रेम, सहजता, आनंद, संस्कार, सुरक्षा और वातावरण निर्माण में प्रत्येक सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन सबसे अहम रोल मुखिया का है। एक मुखिया को सुनिश्चित करना होगा कि-
1. स्वयम न्यूनतम संसाधनों का उपभोग कर "बचत व संयम" को स्थापित करे।
2. प्रत्येक सदस्य के साथ समानता का व्यवहार रख कर सभी को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करे।
3. आर्थिक सुरक्षा हेतु संसाधनों का कुशलतापूर्वक विनियोग करे व आपातकालीन कोष को बनाये रखे।
4. परिवार की अल्पकालिक जरूरतों में मितव्ययता बरत कर दीर्घकालिक जरूरतों हेतु निरन्तर प्रयास करे।
5. स्वयम के आचरण अन्य सदस्यों के समक्ष रोल मॉडल के रूप में रखे जाने योग्य बनाये रखे।
6. सभी सदस्यों से नियमित अंतराल में वार्ता रखते हुए प्रत्येक सदस्य की भावी योजना हेतु सहयोग रखे।
7. पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक संस्कारो व परम्पराओं के वैज्ञानिक पक्ष को पहचान कर अगली पीढ़ी में इनके लिए उत्सुकता व पालन को बनाये रखे।
8. परिवार की सुरक्षा व स्वास्थ्य कारणों के क्रम में कठोरतम निर्णय लेने से नही चुके लेकिन उन्हें लागु करने में सभी का सहयोग लेवे।
9. परिवार के सदस्यों में अगर कोई टकराव हो तो सही बात कहने में बिल्कुल कोताही नही बरते एवम प्रयास करे कि झगड़े को मूल से ही नष्ट किया जाए।
10. जीवन की एकरसता जीवन के सौंदर्य को खंडित कर देती है अतः मुखिया को अपनी आर्थिक स्तिथि के अनुसार छोटी पिकनिक, यात्रा, भोज व सैर-सपाटा के कार्यक्रम बनाते रहना चाहिए।

उपरोक्त बिंदु तो मात्र एक गाइडलाइन है इसके अलावा आप अपने अनुभव व परिस्थितियों के अनुसार कार्य कर ही रहे हैं। कमेंट्स में अपना मत लिखना नही भूले।