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शिक्षक प्रशिक्षण - सहयोगी, सरोकारी व सहभागी प्रयास।

व्यावसायिक कौशल व दक्षता उन्नयन हेतु सतत प्रशिक्षण अनिवार्य है। राजस्थान शिक्षा विभाग में शिक्षको हेतु सेवा पूर्व व सेवारत प्रशिक्षण हेतु प्रत्येक जिले में " जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान " संचालित किये जा रहे हैं। इन DEITs में विभिन्न अनुभाग वर्षपर्यंत नियमित रूप से प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। समस्त DEITs के सम्बलन व निर्देशन हेतु SIERT, उदयपुर महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।

परम्परागत प्रशिक्षण प्रक्रिया के साथ ही NIPA व अन्य शैक्षणिक अराजकीय सगठनों का भी शिक्षण प्रशिक्षण में अहम् योगदान हैं। शिक्षा विभाग के मुखपत्र "शिविरा" अन्य मासिक पत्रिकाओं में भी नियमित रूप से प्रभावी आलेख प्रशिक्षण हेतु प्रकाशित हो रहे हैं।

वर्तमान में हमारे राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण विधा उन्नत, वैज्ञानिक व

परिणामोउन्मुख हैं। शिक्षक प्रशिक्षण हेतु दक्ष प्रशिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। हमारे दक्ष प्रशिक्षक प्रशिक्षण के परम्परागत एवम् आधुनिक तरीको का समुचित प्रयोग कर प्रभावी प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। परम्परागत तरीको के साथ ही आधुनिक कम्प्यूटरों, प्रोजेक्टर्स, इंटरनेट व नवीन संसाधनों के साथ ब्रेन स्टोर्मिंग, समूह कार्य, अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य, प्रतिवेदन लेखन, वातावरण निर्माण व सत्र आधारित ट्रेनिंग मॉड्यूल्स ने प्रशिक्षण विधा में क्रांति का सूत्रपात कर दिया हैं।

आज हमारे दक्ष प्रशिक्षक अपनी भूमिका निर्वहन हेतु कृतसंकल्पित है, आवश्यकता है कि वे विषय पर महारत के साथ ही "आउट ऑफ़ बॉक्स" चिंतन कर नवीन विधाओ व नवाचारों का समावेश करे ताकि हम अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशिक्षण सुविधाओं को उपलब्ध करवा सके। आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय प्रशिक्षको की पर्याप्त मांग हैं।

सफल प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों से कही अधिक भूमिका प्रशिक्षणार्थियो की होती है अतः संभागियों हेतु आवश्यक है कि वे अपने विषय को अपडेट रखते हुए प्रशिक्षण विषय का पूर्व ज्ञान प्राप्त कर प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित होवे। उनकी सहभागिता, सहयोग व सरोकार से ही प्रशिक्षण सफल व परिणामकारक हो सकते हैं।

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  • हमारे अध्यापक जिस पे ग्रेड पद वेतन पर है

    क्या इन्हीं समान पे ग्रेड पद वेतन के अन्य कार्मिक इतने से बजट ,सुविधाओं व परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त करते है

    एक चौथाई डि ए होल्टेज अलाँऊन्स दिया जाता हैं प्रशिणार्थि को शैष तीन चौथाई डीए के बराबर राशि सुविधाओं पर खर्च की जाती हैं....
    नहीं खर्च करते है
    सुविधाओं का स्तर अत्यंत निम्न होता हैं
    शिक्षकों को सम्मानजनक सुविधाओं से महरूम नही रखना चाहिए