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| On 3 years ago

शिक्षा अब आतंकवाद के निशाने पर। संयुक्त राष्ट्र संघ को दिखानी ही होगी वास्तविक सक्रियता।

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शिक्षा अब आतंकवाद के निशाने पर। संयुक्त राष्ट्र संघ को दिखानी ही होगी वास्तविक सक्रियता।

शिक्षा ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ना केवल विकास की वास्तविक राह खुलती है व साथ ही में शिक्षार्थियों में मानवता के प्रति दृष्टिकोण का विकास भी होता है। शिक्षा के महत्व को आदिकाल से पहचान लिया गया था व वर्तमान युग मे शिक्षा के कारण ही विकास दिखाई दे रहा है।

आपसी स्वार्थो में उलझे आतंकवाद ने अब यह समझ लिया है कि राष्ट्रीय भौतिक संसाधनों व मानवीय नुकसान से कही अधिक महत्वपूर्ण "शिक्षा" को ध्वस्त करना उनके लिए आसान और लाभदायक है। किसी भी सभ्यता का विनाश शिक्षा के विनाश से ही जुड़ा हुआ है।

विश्व के अनेक देश आज आतंकवाद के खूनी साये में जी रहे है। आतंकवादी घटनाओं से पूरा संसार दहला हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र से लेकर नाइजीरिया व सीरिया जैसे छोटे राष्ट्र भी आंतकवाद से पीड़ित है।

बोको हराम व आईएसआईएस जैसे संगठन बेदर्दी से स्कुलो पर बैरल बम, रासायनिक बम व अन्य जानलेवा बम बेख़ौफ़ होकर बरसा रहे है। एक अनुमान के अनुसार इन हमलों में हजारों बच्चे अपनी जान गवाँ चुके है। अविकसित राष्ट्रों में बच्चे जहाँ पहले से ही कुपोषण, गरीबी,संसाधन हीनता से पीड़ित थे उन्हें अब आतंकवादी हमलों का भी खतरा सहन करना पड़ रहा है।

करोड़ो बच्चें आज आतंकी हमलों के कारण शिक्षा से वंचित है। इनमे से अधिकांश ने प्राथमिक शिक्षा भी पूर्ण नही की है।
संयुक राष्ट्र संघ को अब सक्रिय भूमिका का निर्वहन करना ही होगा। मात्र आंकड़ो का संग्रहन व खेद सहित प्रकाशन पर्याप्त नही माना जा सकता। हमे अब यह मान कर चलना होगा कि विश्व मे अगर कही भी मानवता का विनाश होगा तो आज नही तो कल

हम भी इस विनाश की चपेट में अनिवार्य रूप से आएंगे।
भारत जैसे शांतिप्रिय राष्ट्र को भी आज चारों तरफ से आतंकवादी हमलों से झुँझना पड़ रहा है। आतंकवाद की कोई जाति, रंग या धर्म नही होता। आज विश्वमत तैयार करना होगा कि हम आतंकवाद के नाम पर दोहरा बर्ताव नही रखे। आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद ही होता है इसे अच्छा या बुरा श्रेणी में विभाजित करके नही देखा जा सकता। शिक्षा को आज प्रदान की गई सुरक्षा कल के आतंकवाद का समापन है।