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शिक्षा विभाग- शैक्षिक क्रांति के दौर में।

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प्रसिद्ध अर्थशास्त्री माल्थस ने " गरीबी के चक्र" को समझाते हुए कहा था कि एक व्यक्ति गरीब है इसीलिए कुपोषण के कारण अस्वस्थ रहता है एवम् कमजोर स्वास्थ्य के कारण उसकी कार्यक्षमता प्रभावित रहती है तथा वह कम धनार्जन कर पाता है और गरीब रहता है। इस कुचक्र को तोड़ने के लिए किसी एक बिंदु पर सम्पूर्ण क्षमता से संसाधनों का विनियोग करना उचित हैं।

इसी प्रकार शिक्षा विभाग ने पदोन्नति, पदस्थापन, नियुक्ति, प्रशिक्षण व पारदर्शिता हेतु काउंसलिंग को अपना कर मानवीय संसाधन में विनियोग द्वारा समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त कर उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु आधार स्थापना के साथ शैक्षिक क्रांति का सूत्रपात किया हैं।

स्वतन्त्रता के पश्चात से शिक्षा विभाग ने निरन्तर कार्य करके सम्पूर्ण राजस्थान में प्रारम्भिक व माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना कर एक सुद्रढ़ संस्थागत ढांचा स्थापित कर लिया है एवम् शिक्षा के सार्वजनीकरण के क्रम में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की लेकिन अनेकानेक कारणों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना अब भी एक चुनोती हैं।

श्रेष्ठ शिक्षा हेतु समाज, सरकार, शिक्षक, शिक्षार्थी, अभिभावक एवम् संसाधनों का अनुकूलतम सामंजस्य स्तर प्राप्त करना प्रत्येक राज्य हेतु एक चुनोती हैं। शिक्षा विभाग राजस्थान ने इस चुनोती को स्वीकार कर समस्त कारको की स्थिति के आकलन के साथ संसाधनों के कुशलता पूर्वक विनियोग से एक शैक्षिक क्रान्ति का सुत्रपात कर दिया हैं।

आज भौगोलिक दृष्टि से सबसे बड़े राज्य राजस्थान में प्रशासन की सबसे छोटी इकाई " पंचायत " तक माध्यमिक/ उच्च माध्यमिक स्तर की राजकीय शिक्षा सुविधा उपलध हैं। इन विद्यालयों के सम्बलन एवम् सशक्तिकरण हेतु रिकॉर्ड पदोन्नतियों ने सम्पूर्ण माहौल में रचनात्मक परिवर्तन करते हुए गति प्रदान की है। नवपदोन्नत संस्थाप्रधानो एवम् शिक्षको ने सम्पूर्ण ऊर्जा का प्रयोग कर सम्पूर्ण कलेवर में शक्ति संचरण किया है एवम् यह परिलक्षित होने लगा हैं।

विभाग की प्रतिष्ठा में गत सत्र में हुए रिकॉर्ड नामांकन ने इन फैसलो पर मुहर लगा दी है एवम् वर्तमान सत्र में विभाग अपने ही रिकॉर्ड को ध्वस्त कर नया कीर्तिमान स्थापित करने हेतु संकल्पबद्ध हैं। " प्रवेशोत्सव कार्यक्रम"2018 का शुभारम्भ दिनांक 28 अप्रैल से किया जा रहा है एवम् इसमें विभिन्न गतिविधियों एवम् नवाचारों से समाज का ध्यानकर्षण कर राजकीय विद्यालयों में नामंकन वृद्धि सुनिश्चित की जायेगी।

इस शैक्षिक क्रान्ति का आगाज जब अंजाम तक पहुचेगा तब विश्व शैक्षिक परिदृश्य में राजस्थान का नाम बड़े अदब से लिया जाएगा एवम् इस " शैक्षिक मॉडल " को अन्य राज्यो द्वारा शैक्षिक उन्नयन हेतु अपनाया जाएगा।
सादर।

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