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श्रीमती मीनाक्षी तोमर - सेवानिवृत्ति के ढाई वर्ष पश्चात भी जारी है शिक्षण कार्य, नमन शिक्षक आपको।

आज से अढाई साल पहले राजकीय सेवा को अपने जीवन के 38 वर्ष प्रदान कर सेवानिवृत्त होने वाली "पूर्व" शिक्षिका है श्रीमती मीनाक्षी तोमर। रा उ मा वि नारवा, मण्डोर, जोधपुर से श्रीमती तोमर 31 जुलाई 2015 को सेवानिवृत्त हुई। उनके सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम आयोजन धूमधाम से आयोजित किया गया था। सभी ने उनके सुखद भविष्य की शुभकामनाये प्रदान की व अनुरोध किया कि वे अपने साथियो को विस्मृत नहीं करे।

एक शिक्षक सदैव शिक्षक रहता है, वह अपने कर्तव्य से कभी मुक्त नहीं होता, माँ शारदे उसकी आराध्य व शिक्षण उसकी पुजा है। श्रीमती तोमर ने इसे सत्य सिद्ध करते हुए खुद को "पूर्व" शिक्षक मानने से इनकार किया व सदैव की भाँति 1 अगस्त 2015 को अपनी कर्मस्थली " नारवा स्कुल " समय पर उपस्थित हो गयी एवम् शिक्षण कार्य आरम्भ कर दिया। आदिनांक वे नियमित रूप से स्कुल आकर शिक्षण कर रही हैं। उनके लिए कुछ नही बदला वही विद्यालय, वही कक्षा, वही पाठ्यक्रम, वही

कर्तव्य, वही दायित्व और वही परायणता; बस बदल रहा है तो उनको देखकर समाज का नजरिया।

श्रीमती तोमर इन विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए अपने निजी जीवन की कठोरताओ को भुला देती है व अपने अनुशासन व समर्पण से अन्य साथियो को प्रेरित करती हैं। इनके समर्पण को देखकर जब बस संचालक ने उनसे किराया लेना बन्द किया तो आपने उसे समझा कर किराया देकर यात्रा करना ही उचित बताया।

श्रीमती तोमर के निजी जीवन में अनेक विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपना कार्य जारी रखा। विद्यालय के विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों से इनका बहुत आत्मीय सम्बन्ध रहता है। अनेको बार इन्होंने अभावग्रस्त विद्यार्थियों की कई बार मदद की है।

राजस्थान के अनेको विद्यालयों में कई सेवानिवृत्त अध्यापक इसी प्रकार सक्रिय रूप से सहयोग देकर ना केवल सामाजिक सरोकारों का निर्वहन कर रहे है साथ ही आने वाली पीढ़ी में सुसंस्कारो का बीजारोपण कर भारतीय संस्कृति का सरंक्षण भी कर रहे है।

इन सरस्वती उपासकों को नमन।