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| On 3 years ago

" हर कार्मिक बने संस्थान प्रतिनिधि" !!

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वर्तमान आधुनिक युग मे प्रत्येक संस्थान को गला-काट प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। प्रतियोगिता में बने रहने हेतु संस्थान में काम करने वाले हर कार्मिक को संस्थान के उद्देश्यों, कार्यो व वर्क कल्चर की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।

संस्थान का संचालन सामूहिक प्रयासों द्वारा होता है एवम् यह प्रतीत भी होना चाहिए। कुछ अवसरों पर संस्थान के कार्मिको द्वारा बड़े हास्यापद प्रत्युत्तर प्रदान कर संस्था की छवि पर प्रश्न खड़े कर दिए जाते हैं। संस्था प्रधान को  हित में कुछ कदम अवश्य उठा लेने चाहिए।

संस्थान-परिसर में वातावरण निर्माण हेतु बिंदु-

1. संस्था के जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम मय पद एवम् उनके संपर्क नम्बर आवश्यकतानुसार चस्पा करवाये।
2. संस्था के उद्देश्यों की सूचना अंकित करवाना उचित हैं।
3. संस्था की स्थापना, क्रमोन्नति, प्रकार व पंजीयन की आवश्यक सुचना भी अंकित होनी चाहिए।
4. एक परिसर में एक से अधिक संस्थान होने पर सभी संस्थानों के कार्मिको को दूसरे संस्थानों के बारे में न्यूनतम ज्ञान अवश्य हो।
5 "संस्थान एक नज़र में " व नज़री नक्शा प्रवेश स्थल पर ही प्रदर्शित होने चाहिए। प्रत्येक कक्ष के बाहर पूर्ण सूचना मय उस कक्ष में सम्पादित होने वाले कार्य की सुचना अंकित हों।
6 प्रत्येक कार्मिक को संस्थान की स्थापना, इतिहास व विकास की जानकारी होना अपेक्षित है। विशेष कार्यक्रम आयोजन के समय भी उसकी सामान्य जानकारी सभी को रहना उचित हैं।
7 अधिकारों एवम् कर्तव्यों को सुपरिभाषित करते हुए वर्ग, संकाय व सम्बंधित अधिकारी/कार्मिक की सुचना का प्रकटीकरण सुगमता के साथ ही पारदर्शिता भी दर्शाता हैं।
8 संस्था समयसारिणी को कार्यालयकक्ष, सूचनापट्ट व कार्यस्थल पर चस्पा करना चाहिए।
9 आवश्यक राजकीय निर्देश आदेश मय जिम्मेदार कार्मिक के नाम व अनुपालना के अभाव में लगने वाली शास्ति व दंड की सुचना अभिलिखित होनी चाहिए।
10 संस्थान द्वारा अपनाई जाने वाली लोककल्याणकारी योजनाओ की पूर्ण जानकारी परिसर में आगंतुकों हेतु प्रदर्शित होना आवश्यक हैं।
11 संस्थान को प्राप्त विशेष दर्जा, सुविधाओ, अनुदान, सहयोग, आरक्षण आदि सूचित होना अपेक्षित हैं।

उपरोक्तानुसार व्यवस्थित संस्थान में प्रवेश करने पर बाह्य पक्षकारों द्वारा चाही गई सूचनाओ की आवर्ती व प्रकार कम हो जाता है एवम् कार्मिको की दक्षता में अभिवर्द्धि होती हैं। परिसर में अंकित सूचनाओ का निरंतर अध्ययन करते रहने से प्रत्येक कार्मिक का संस्था के प्रति ज्ञानार्जन होता है और वह संस्थान का जागरूक प्रतिनिधि बनता हैं।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि हम संस्था का वातावरण निर्माण इस प्रकार करे कि हर कार्मिक खुद को संस्थान का प्रतिनिधि समझ कर अपने कारीबका सम्पादन सर्वश्रेष्ठ तरीके से करे।