83 - Salute to our National Heros | Movie Review and comments

83 - Salute to our National Heros | Movie Review and comments की बात करे तो यह कहना पड़ेगा कि फ़िल्म फुल पैसा वसूल है। पैसा वसूल होने के साथ ही इस फ़िल्म द्वारा युवा वर्ग के सामने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया गया है कि " कपिल देव तथा उसकी टीम अपने साधारण लेवल को जब दिल से इम्प्रूव करके वेस्टइंडीज जैसी तत्कालीन असाधारण टीम को हरा सकती है तो निश्चित रूप से हम एक भारतीय के रूप में किसी भी असाधारण शक्ति को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर सकते है।"

उपरोक्त बात बिल्कुल सही इसलिए हे क्योंकि तत्कालीन वेस्टइंडीज की टीम में नम्बर 11 तक असाधारण खिलाड़ी थे जबकि टीम इंडिया में वर्ल्ड क्लास खिलाड़ियों में केवल सुनील गावस्कर, कपिल देव, मोहिन्दर अमरनाथ, दिलीप वेंगसरकर, सैयद किरमानी, संदीप पाटिल व श्री कांत शामिल थे। यशपाल शर्मा, मदनलाल, बलविंदर संधू, रोजर बिन्नी व कीर्ति आजाद जैसे सामान्य खिलाड़ी लेकिन असाधारण खेल भावना वाले खिलाड़ी थे।

अब एक नजर अगर हम वेस्टइंडीज की तत्कालीन टीम पर डाले तो हमारे होश उड़ जाएंगे। वेस्टइंडीज की तब की टीम में कप्तान क्लाइव लॉयड, डेसमंड हेंस, गॉर्डन ग्रीनिज, विवियन रिचर्ड्स गजब के बैट्समैन थे। इनके द्वारा बनाये गए किसी भी स्कोर को अपराजित रखने हेतु वर्ल्ड की सबसे खतरनाक बोलिंग स्क्वाड जिसमे ऐसे नाम शामिल थे जो कि किसी भी बैट्समैन के लिए खतरनाक सपने से कम नही थे। इस बोलिंग स्क्वाड या कहे कि ब्लड कमांडोज में स्पेशल बॉलर एंडी रॉबर्ट्स, असामान्य रूप से भीमकाय जोएल गोर्नर, विश्व के सर्वश्रेष्ठ फ़ास्ट बॉलर मैल्कम मार्शल व सबसे खतरनाक बॉलर माइकल होल्डिंग शामिल थे। वेस्टइंडीज के विकेटकीपर जेफ्री दूजान ना केवल नम्बर एक विकेटकीपर थे बल्कि निचले क्रम के जबरदस्त बैट्समैन व फिनिशर खिलाड़ी थे। उनकी टीम के एकमात्र खिलाड़ी लैरी गोम्स से भारतीयों को भय का अहसास नही होता था तथा वह खिलाड़ी थे "लैरी गोम्स"। लैरी स्पिनर थे, लेकिन यह उनका अधूरा परिचय है , क्योंकि वे तत्कालीन समय के बेस्ट फील्डर थे।

अब, आप ही बताइए कि हमने 1983 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में ऐसी टीम को जब तीन में से 2 मैच में हरा दिया था तब उस समय की प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने रोमांचित होकर कितना जबरदस्त स्टेटमेंट दिया था।

" हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है।"

मैडम गांधी के इस स्टेटमेंट के पीछे बलविंदर सिंह संधू, यशपाल शर्मा, मदनलाल, रोजर बिन्नी व कीर्ति आजाद जैसे साधारण भारतीयों के असाधारण सपनो की कहानी थी।

83 फ़िल्म रिव्यू | 83 movie review

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फ़िल्म 83 का रिव्यू। www.shivira.com

83 फ़िल्म के ट्रेलर रिलीज के साथ ही दर्शकों का रुझान फ़िल्म की तरफ बढ़ गया था। कबीर खान की इस फ़िल्म को कबीर खान ने पूरी ईमानदारी से विश्वकप जितने की कहानी को रुपहले पर्दे पर प्रस्तुत किया है। क्रिकेट प्रेमी इस फ़िल्म को बहुत पसंद कर रहे है।

83 फ़िल्म की स्टार कास्ट | 83 movie star cast

फ़िल्म में मुख्य भूमिका में भारतीय फिल्म जगत की प्रमुख जोड़ियों में से एक रणवीर- दीपिका है। फ़िल्म में पंकज त्रिपाठी, ताहिर राज भसीन, जीवा, साकिब सलीम, जतिन सरना, चिराग पाटिल, दिनकर शर्मा, निशांत दहिया, हार्डी संधू, साहिल खट्टर, अम्मी विर्क, अदिनाथ कोठारे, धैर्य करवा और आर बद्री प्रमुख भूमिका में हैं।

83 फ़िल्म का इफेक्ट | 83 movie effect

  • रणवीर सिंह ने जबरदस्त रूप से कपिल देव की भूमिका को साकार किया है। फ़िल्म में कपिल देव के बोलने, चलने व बॉडी लैंग्वेज को रणवीर सिंह ने पर्दे पर हुबहू साकार किया है। कपिल पाजी के बोलने का
    अपना अंदाज है रणवीर सिंह ने उनके अंदाज को इस कदर साकार किया है कि लगता है कि खुद कपिल देव अपना रोल निभा रहे है।
  • दीपिका पादुकोण हमेशा की तरह शानदार अभिनय करने में सफल रही है। उनकी पर्दे पर एंट्री का दर्शक पुरजोर तालियों के साथ स्वागत करते है। दीपिका ने कपिल की पत्नि रोमा का किरदार अपने दमदार अभिनय से जीवंत कर दिया है।
  • फ़िल्म में टीम मैनेजर के रूप में पंकज त्रिपाठी ने कमाल का अभिनय करके तत्कालीन टीम मैनेजर पीआर मान सिंह के किरदार को जनता के सामने रखा। साकिब सलीम ने मोहिंदर अमरनाथ, जीवा ने कृष्णमाचारी श्रीकांत और जतिन सरना यशपाल के रूप में अपने अभिनय से प्रभावित किया।
  • फ़िल्म का म्यूजिक फ़िल्म के कथानक के अनुरूप है। फ़िल्म के निर्देशक कबीर खान ने हर शॉट पर पकड़ बना कर फ़िल्म को गतिमान रखा है। दर्शक 1983 के कालखंड को ह्रदय से अनुभूति करके रोमांचित हो जाते है।

83 फ़िल्म की रेटिंग | Rating of Movie 83

हम फ़िल्म को सब्जेक्ट, स्टोरी, गति, अभिनय व टोटल इफेक्ट के आधार पर पूरे नम्बर देते है तथा फ़िल्म को " फैमिली मूवी" जेनर में सम्मिलित करते हुए यह रिकमेंड करते है फ़िल्म को अवश्य देखा जाना चाहिए। फ़िल्म साफ-सुथरी, मनोरंजन, रोमांचक एवम सब्जेक्ट बेस है अतः सभी आयुवर्ग हेतु देखे जाने योग्य है। युवाओं को यह फ़िल्म विशेष रूप से देखनी चाहिए इस फ़िल्म से उनके अवचेतन मस्तिष्क को नवीन ऊर्जा प्राप्त होगी।

83 - Salute to our National Heros | विश्वकप की सच्ची कहानी

1983 की क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम। www.shivira.com

फ़िल्म मेकर कबीर खान की यह फ़िल्म आपको 1983 के क्रिकेट वर्ल्ड कप की पूरी सच्चाई बताती है। फ़िल्म में यह जानकारी बहुत हैरतअंगेज है कि तब के टीम मैनेजर को क्रिकेट टीम से ज्यादा अपने बटुवें (पर्स) को मैनेज करना पड़ता था एवम बीसीसीआई द्वारा वर्ल्ड कप जीतने पर हर खिलाड़ी को 25,000 रुपये देने की घोषणा पर टीम को यकीन तक नही हुआ था।

1983 के विश्वकप से पहले भारत ने किसी भी विश्वकप से पहले कोई भी मैच तक नही जीता था इसलिए भारत की टीम से किसी भी खेल समीक्षक, खेल प्रेमी या मीडिया को कोई उम्मीद भी नही थी लेकिन एक खिलाड़ी था जिसको खुदकी व अपनी टीम की क्षमता पर पूरा यकीन था। उस खिलाड़ी का नाम था - कपिल देव यानी कुक्कू।

83 - Salutete to our National Heros | कपिल देव यानी कुक्कू

कपिल देव अपने आप मे एक क्रिकेटिंग स्कूल है। भारत का पहला गेंदबाज जिसका ख़ौफ़ विदेशी बैट्समैन के जहन में था तथा पहला बल्लेबाज जिसके सामने विश्व के सर्वश्रेष्ठ बॉलर भी बॉल करने से पहले अपने हश्र की सोचते थे। कपिल पाजी की फील्डिंग बेमिसाल थी। इन सबसे बढ़कर वो खुद थे। एक विजेता, एक देशभक्त, एक साधारण मनुष्य व एक असाधारण खिलाड़ी।

कपिल देव यानी कपिल पाजी कपिल देव भारत के अब तक के सबसे महान ऑलराउंडर हैं। वह दुनिया के एकमात्र क्रिकेटर हैं जिन्होंने टेस्ट (अंतर्राष्ट्रीय मैच) क्रिकेट में ऑलराउंडर के 4,000 टेस्ट रन और 400 टेस्ट विकेट का दोहरा स्कोर बनाया है। कपिल देव से बेहतर खिलाड़ियों की शायद कमी नही हो लेकिन भारत को जीतना उन्होंने ही सिखाया था तथा " नेवर गिव अप " का मंत्र भी उन्होंने ही भारतीय क्रिकेट को दिया था।

विश्वकप 83 के महानायक कपिल देव www.shivira.com

तत्कालीन विश्व क्रिकेट में चार आलराउंडर का बोलबाला था। ये चार आलराउंडर थे- पाकिस्तान के इमरान खान, इंग्लैंड के इयान बॉथम, भारत के कपिल देव तथा न्यूजीलैंड के रिचर्ड हेडली। इन

सबमे आपस मे जबरदस्त कॉम्पिटिशन था। आम आदमी व हर खेल प्रेमी इनके रिकॉर्ड के आधार पर इनकी तुलना भी करता था जबकि चारो बेमिसाल व अलग-अलग व्यक्तित्व थे। आज इनमें से एक पाकिस्तान का सदरे-आजम यानी प्रधानमंत्री, बाकी दो को इंग्लैंड की महारानी की तरफ से "सर" की उपाधि मिल चुकी है तो हमारेके कपिल देव साहब को क्या मिला?

कपिल देव ने व्यवस्था में सुधार हेतु सदैव प्रयास किये। 83 फ़िल्म के अनुसार जब वे ट्रेनिंग कैम्प में थे तो उन्होंने मिलने वाले खाने को लेकर विरोध किया था तथा अपनी बात को मनवाया था। इसी प्रकार वे अपने कैरियर के दौरान व पश्चात भी क्रिकेटर्स के अधिकारों के प्रति अपनी आवाज बुलंद करते रहे तथा इसी कारण उनकी पटरी बीसीसीआई के साथ नही बैठी जिसका खामियाजा भी उनको उठाना पड़ा। कपिल देव जैसी शख्शियत बिरली होती है तथा ऐसे बुलन्द व्यक्तित्व का सम्मान सिस्टम को सदैव लL

83 - Salute to our National Heros | कपिल देव किसी सम्मान के मोहताज नही

भारत के खेल इतिहास में मेजर ध्यानचन्द, उड़न सिक्ख मिल्खा सिंह व सबके यार, सबसे शानदार कपिल देव का नाम त्रिमूर्ति के रूप में अमर-अजर रहेगा। कपिल देव जैसा इंसान जो खिलाड़ियों के हक के लिए लड़ता है वह क्या खुद के सम्मान के लिए लड़ेगा?

अब एक खुलासा करना ही पड़ेगा कि भारतीय क्रिकेट टीम पर दशकों तक मुम्बई तत्कालीन बॉम्बे का वर्चस्व रहा है। जब सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बन सकते है तब राहुल द्रविड़ कोच बन सकते है तो कपिल देव साहब क्यो नही? प्रश्ब बहुत है लेकिन जबाब नही है। जबाब सिर्फ एक ही है की कपिल देव के लिए यह पद अभी छोटे है क्योंकि बन्दा कुछ बड़ा है।

83 - Salute to our National Heros | भारतीय टीम का सामान्य परिचय

आइये, 1983 में क्रिकेट के विश्व कप को जीतने वाली भारतीय टीम के सितारों का परिचय प्राप्त करे।

सुनील गावस्कर एक महान बल्लेबाज | Sunil Gavaskar a great batsman

विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक सुनील गावस्कर ने अपनी तकनीक से विश्व की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी के सामने जबरदस्त बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था। 1983 के विश्वकप में वे भी भारतीय टीम के प्रमुख खिलाड़ी थे। हालांकि उनका बल्ले से इस विश्वकप में ज्यादा योगदान नही रहा था लेकिन इस लीजेंड बल्लेबाज की मैदान में उपस्थिति तथा उनकी अनुभव से ओतप्रोत सलाह भारतीय टीम का एक बड़ा सम्बलन था। उनके बारे में मशहूर था कि उन्होंने तत्कालीन तेज गेंदबाजी के कहर के बावजूद भी निर्भय होकर बल्लेबाजी की तथा कभी भी हेलमेट तक नही पहना था।

कपिल देव विश्व का महान ऑलराउंडर | kapil dev world's greatest all rounder

कपिल देव विश्वप्रसिद्ध आलराउंडर रहे है तथा कपिल देव पहली बार विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान थे. विश्वकप में उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। खासकर जिम्बाबे के खिलाफ खेली गई उनकी 175 रन की पारी आज भी वन डे की यादगार परियों में गिनी जाती है।

कृष्णामाचारी श्रीकांत एक ताबड़तोड़ बल्लेबाज | Krishnamachari Srikkanth as a fastest batsman

श्रीकांत की बैटिंग स्टाइल पूरी तरह से वनडे क्रिकेट को समर्पित थी। उन्होंने भारत की तरफ से ओपनर बल्लेबाज के रूप में अपने कैरियर के दौरान अपनी बैटिंग स्टाइल से दर्शकों का दिल जीत लिया था । 2008 में ये पूर्व दिग्गज खिलाड़ी, भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य चयनकर्ता नियुक्त किया गया था. वह आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद के संरक्षक के तौर पर काम करते रहे हैं. वह अपनी क्रिकेट कमेंट्री के लिए बहुत मशहूर हैं।

मोहिन्दर अमरनाथ व उनकी रहस्यमयी बॉलिंग | Mohinder Amarnath and his mysterious bowling

भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी लाला अमरनाथ के पुत्र सुरेन्द्र अमरनाथ व मोहिन्दर अमरनाथ ने भारत के लिए लम्बे समय तक क्रिकेट खेल था। मोहिन्दर अमरनाथ एक विश्वशनीय बैट्समैन तथा उपयोगी मध्यम गति के बॉलर थे। वे क्रिकेट खेलते समय एक लाल रंग का रुमाल सदैव अपनी जेब मे रखते थे। फाइनल मुकाबले में मैन-ऑफ-द-मैच चुने गये थे. वह वर्तमान में विभिन्न समाचार चैनलों के लिए क्रिकेट विश्लेषक के रूप में नजर आते हैं।

दिलीप वेंगसरकर एक स्टाइलिश बल्लेबाज | Dilip Vengsarkar a stylish batsman

"कर्नल" के नाम से मशहूर वेंगसरकर मध्यक्रम के स्टाइलिश बल्लेबाज थे। इनके बारे में मशहूर था कि वे आरम्भ के एक-दो ओवर नोसिखिया बल्लेबाज के रूप में खेलते थे तथा इसके बाद सेटल होने के बाद बॉलर्स को क्रिकेट सीखा देते थे। विश्व कप में इस खिलाड़ी को सिर्फ दो मैच खेलने का मौका मिला था । दिलीप वेंगसरकर ने भारतीय क्रिकेट में मुख्य चयनकर्ता के रूप में लंबे समय तक अपनी सेवाएं प्रदान की थी।

संदीप पाटिल एक आकर्षक व्यक्तित्व | Sandeep Patil an attractive personality

मुंबई के संदीप पाटिल एक आक्रामक व स्टाइलिश बैट्समैन थे। यह अपने तेज तर्रार बलीबाजी के लिए दर्शकों में बहुत लोकप्रिय थे। इनके मैदान पर आने के बाद रन रेट तेज हो जाती थी। संदीप पाटिल के कोच रहते भारतीय टीम केन्या 2003 के विश्वकप के सेमीफाइनल तक पहुंची थी। लड़कियों में विशेष रूप से प्रसिद्ध इस स्टार खिलाड़ी ने एक फ़िल्म में नायक की भूमिका भी अदा की थी।

रवि शास्त्री एक गरिमामय क्रिकेटर | Ravi Shastri a dignified cricketer

भारतीय क्रिकेट जगत में रवि शास्त्री एक बड़ा नाम रहे है। रवि शास्त्री स्पिनर के अलावा एक शानदार बैट्समैन रहे है। धीमी बल्लेबाजी के लिए मशहूर इस बल्लेबाज ने एक रणजी मैच में एक ओवर में 6 छक्के मारकर अपने विरोधियों को कड़ा जबाब दिया था। कमेंटेटर के रुप में शास्त्री ने क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद जबरदस्त सफलता हासिल की है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के निदेशक के रूप में भी काम किया है। वे भारतीय टीम के कोच भी रहे है।

सैयद किरमानी एक मुस्तैद | Syed Kirmani a ready wicketkeeper

सैयद किरमानी विश्वस्तरीय विकेटकीपर तथा भरोसे के बल्लेबाज थे। रिटायरमेंट के बाद आपने अपनी किस्मत बॉलीवुड में आज़माई थी तथा कुछ फिल्मों में छोटी-बड़ी भूमिका भी निभाई थी।

यशपाल शर्मा एक भरोसेमंद खिलाड़ी | Yashpal Sharma a reliable player

भारतीय विश्व कप विजेता टीम के सदस्य यशपाल शर्मा मध्यक्रम के बल्लेबाज थे। आपको खेल से रिटायर होने के बाद अंपायरिग का भी अवसर मिला था। बाद में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।

रोजर बिन्नी एक प्रयासशील खिलाड़ी | Roger Binny a trying player

रोजर बिन्नी एक आलराउंडर खिलाड़ी थे वे माध्यम तेज गति से गेंदबाजी करते थे तथा बैट्समैन थे। इस विश्वकप में बिन्नी ने 3.82 के इकॉनमी के साथ कुल 18 विकेट लिए थे। बल्ले से भी उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में कुल 73 रन का योगदान दिया था.2012 को राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में नियुक्त किया गया था। अभी भी वह कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं। इनके पुत्र स्टुअर्ट बिन्नी की पहचान भी एक क्रिकेटर के रूप में है।

बलविंदर सिंह संधू व उनके प्रयास | Balwinder Singh Sandhu and his efforts

बलविंदर सिंह संधू भी एक आलराउंडर खिलाड़ी थे। ये मध्यम तेज गति के बॉलर के साथ अंतिम ओवर के खिलाड़ी थे। रिटायर होने के बाद संधू ने मुंबई और पंजाब के कोच के रूप में काम किया था ।

कीर्ति आजाद एक सफल राजनेता | Kirti Azad a successful politician

कीर्ति आजाद भी एक आलराउंडर थे। 1983 के विश्व कप में वे टीम के अहम सदस्य थे। इस वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन साधारण रहा था तथा वह अपनी टीम के लिए पूरे टूर्नामेंट में तीन मैचों में सिर्फ 15 रन ही जोड़ पाए थे। कीर्ति आजाद ने रिटायरमेंट के बाद राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी पहचान सक्रिय राजनेता के रूप में बनाई हैं।

सुनील वाल्सन | Sunil Valson

सुनील वाल्सन एक तेज गेंदबाज रहे थे एवम 1983 की विश्वकप टीम के हिस्सा रहे थे लेकिन इस बात का उनको हमेशा अफसोस रहा कि उनको एक भी मैच खेलने का अवसर नही मिला था।

83 - Salute to our National Heros | भारतीय टीम की सफलता के कारण

  • भारतीय टीम की सफलता का सबसे बड़ा कारण स्वंय कपिल देव थे। कपिल देव की ऊर्जा, देशप्रेम व प्रदर्शन सभी को बेहतर प्रदर्शन हेतु निरन्तर प्रेरणा देता था। उनमे कभी हार नही मानने का जज्बा था। उन्होंने जिम्बाब्वे के विरुद्ध जबकि भारत के मात्र 17 रन के स्कोर पर 5 विकेट गिर चुके थे, तब उन्होंने ऐतिहासिक 175 रन की नाबाद पारी खेल कर सम्पूर्ण क्रिकेट जगत को चोंका दिया था।
  • भारत की तत्कालीन टीम में आलराउंडर खिलाड़ी काफी थे। स्वयम कपिल देव विश्व के महानतम आलराउंडर थे। इनके अलावा मदनलाल, कीर्ति आजाद, मोहिन्दर अमरनाथ, रोजर बिन्नी व बलविंदर संधू भी आलराउंडर कैटेगरी के खिलाड़ी थे। एक टीम में 6 खिलाड़ी ऐसे थे जो कि गेंद व बल्ले दोनों से टीम को योगदान कर सकते थे।
  • भारतीय टीम को विश्व की अन्य टीम गम्भीरता से नही ले रही थी। वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया कप की प्रबल दावेदार थी। इन टीम के फोकस में भारतीय टीम नही थी। इसी चूक के कारण उन्होंने भारत के खिलाफ मैच में अनेक रणनीतिक गलतियां की। अति-आत्मविश्वास के कारण वेस्टइंडीज को आखिरकार फाइनल में घुटने टेकने ही पड़े।
  • भारतीय टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नही थी। सभी खिलाड़ियों ने मिले अवसर पर अपनी प्रतिभा से बढ़कर प्रदर्शन किया तथा अंत मे विजय का वरण किया था।
  • भारतीय टीम के पास कपिल देव का नेतृत्व, सुनील गावस्कर का अनुभव, श्रीकांत व पाटिल की तेजतर्रार बेटिंग, मोहिन्दर अमरनाथ की रहस्यमयी गेंदबाजी व किरमानी की विकेटकीपिंग की ताकत थी।