An exciting anecdote: Who was he?

एक रोंगटे खड़े कर देने वाला किस्सा : वो कौन था?

आजादी के बाद विकास धीमी गति से लेकिन सम्पूर्ण समाज में स्थापित होने की प्रक्रिया में था। शिक्षा, साक्षरता व विज्ञान समाज में विकसित हो रहे थे इसके बावजूद अंधविश्वास व भूत-प्रेतों के किस्से जनसाधारण में बहुत प्रचलित थे।

आजादी के बाद आम रेलकर्मियों व आमजनों में कुछ रेलवे ट्रेक पर होने वाले एक्सीडेंट को लेकर बड़ी उत्कंठा थी। कुछ बातूनी लोग यह अफवाह भी फैला देते थी उन ट्रैक्स पर कुछ अमानवीय शक्तियों के कारण यह एक्सीडेंट होते थे।

एक युवा की नोकरी रेलवे में गार्ड के पद पर हुई। उसे मालगाड़ी के गार्ड पद पर नियुक्ति मिली थी। उसे उन ट्रैक्स पर रेल संचालन हेतु नियुक्त किया था जो कि मरुस्थलीय क्षेत्र होने के कारण वीरान क्षेत्र कहलाते थे।

उसकी ड्यूटी वाले क्षेत्र में एक रेलवे ट्रेक ऐसा भी था जिसमें काफी दुर्घटना हुई थी। एक दो लोगों ने आत्महत्या भी की थी। कुछ लोगों ने इस युवा गार्ड को समझाया कि उसे भी इन ट्रैक्स पर गाड़ी संचालन के समय सावचेत रहना चाहिए।

युवा गार्ड पर इन बातों का कोई असर नही हुआ बल्कि उसने ऐसा कहने वालों का मजाक भी उड़ाया। वह एक पढा-लिखा आधुनिक युवा था एवम वैज्ञानिक सोच रखता था। वह इन भूत-प्रेतों में यकीन नही करता था।

एक सर्द रात वह उसी ट्रेक पर गाड़ी संचालन के समय अपने कम्पार्टमेंट में अकेला था। रेगिस्तान में सर्द राते बहुत ठंडी होती है एवम लोहे से बनी रेलगाड़ी जब देर रात में ठंडी हो जाती है तो सर्दी भी दोगुनी महसूस होने लगती है।

उस जमाने मे जबकि रेलगाड़ी का संचालन भाप के इंजनों से होता था तब रेलगाड़ी के चलने का अपना एक अलग रिदम होता था एवम जब गाड़ी रिहायशी क्षेत्रो के पास से गुजरती थी तब उसकी सीटी सम्पूर्ण क्षेत्र को गुंजायमान कर देती थी। रेलगाड़ी की चाल से अपने शरीर की रिदम को समावेश करते हुए युवा गार्ड ने जब टोर्च की रोशनी में कलाई घड़ी में समय देखा तो पाया कि रात की डेढ़ बज रहे थे।

खिड़की से जब उसने बाहर का मंजर देखा तो खिड़की के बाहर बस सूना, ठंडा व अकेला रेगिस्तान पसरा हुआ था। कम्पार्टमेंट में बस उसका बक्सा, लालटेन( जिसके माध्यम से एक गार्ड रेल के ड्राइवर को संकेत देते थे, यह लालटेन हरा व लाल संकेत देती थी), एक ड्यूटी चार्ट व एक टोर्च थी। कम्पार्टमेंट के बाहर व अंदर सिर्फ और सिर्फ सर्द खामोशी थी। सर्दी से बचने के लिए गार्ड ने खिड़की को कसकर बन्द किया व खुद को कम्बल में और शिद्दत से समेटा।

अचानक गार्ड को महसूस हुआ कि उनके डब्बे से कुछ टकराया है। इससे पहले की गार्ड कुछ हरकत करता खामोशी फिर छाने लगी। गार्ड साहब ने सोचा कि शायद अंधेरे में कोई जानवर चलती रेल से टकरा गया हो।

ऐसे ही कुछ घड़ियां बीती और रेलगाड़ी धीमी रफ्तार से रुकने लगी। जब गाड़ी रुक गई तो गार्ड साहब को बड़ा अजीब लगा क्योकि अगले स्टेशन को आने में काफी समय बाकी था। उन्होंने खिड़की खोल कर देखा तो बाहर वीरानगी का राज था।

इस प्रकार रात के वक्त सुनसान में रेलगाड़ी के अचानक रुक जाने से युवा गार्डसाहब सकते में आ गए। कुछ लम्हा किंकर्तव्यविमूढ़ होकर वह बैठे रहे, लेकिन रेलवे इंजन की लगातार बजती सीटी ने उनको चेतन किया।

उन्होंने कम्पार्टमेंट से बाहर निकलकर इंजन की तरफ देखा तो बहुत दूर खड़े इंजन की मद्धम रोशनी को महसूस किया। गार्ड साहब ने लालटेन को निकाला एवम ट्रेन के ड्राइवर को लालटेन से हरी लाइट का संकेत भेज कर सन्देश दिया कि सब-कुछ ठीक है। बार-बार हरी बत्ती के सन्देश भेजने के बाद भी ड्राइवर ने रेलगाड़ी को स्टार्ट नही किया।

बार-बार हरे संकेत को भेजने के बाद भी ड्राइवर द्वारा गाड़ी को स्टार्ट नही किया तो थक-हार के गार्ड साहब बैठ गए। अचानक आई इस परेशानी से वे सर्द मौसम के अहसास को भुला बैठे। अचानक उन्हें वे लोग याद आ गए जो कहा करते थे कि इस रेलवे ट्रेक पर कुछ परालौकिक शक्तियों का राज है। उस युवा गार्ड ने सर को झटका व परालौकिक शक्तियों के किस्सों को अपने मानस से झटकने की असफल कोशिश की। जब उन्होंने कलाई घड़ी की तरफ देखा तो पाया कि रात के दो बजने में कुछ मिनट बाकी थे।

युवा गार्ड साहब कुछ क्षण तो स्थिर रहे, अचानक उन्होंने संकेतक लालटेन को उठाया और रेलवे के इंजन की तरफ तेजी से चलने लगे। उन्हें आज यह पहली बार एहसास हुआ कि मालगाड़ी बहुत लंबी होती है व अकेला होना बहुत भयंकर एहसास है।

अचानक उनकी हिम्मत उनका साथ छोड़ने लगी व कदमों ने तेज रफ्तार पकड़ ली। वे लालटेन को उठाकर इंजन की तरफ लगभग भागने लगे। रेलवे ट्रेक के दोनों तरफ बिछे पत्थर के टुकड़ों से टकरा कर घोर अंधकार में वह गिरते-पड़ते आखिर इंजन तक पहुंच गए।

इंजन में सवार ड्राइवर व फायरमैन को देखते ही गार्डसाहब की खामोशी टूट गई। घोर गुस्से से उन्होंने ड्राइवर को फटकारा और अपनी उखड़ती साँसों पर कब्जा करते हुए यह कारण जानना चाहा कि बार-बार हरी लाइट का संकेत देने पर भी ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट क्यों नहीं की थी?

इंजन ड्राइवर ने गार्ड साहब को बताया कि उनके डब्बे से हरी नही बल्कि लाल लाइट का संकेत आ रहा था। यह कहकर उसने एक बार फिर दूरी पर खड़े गार्ड साहब के डब्बे की तरफ देखा तो ड्राइवर साहब के भी रोंगटे खड़े हो गए।

उसने सर्द आवाज में गार्ड साहब को कहा कि वो जल्द इंजन में चढ़े ताकि रेलगाड़ी रवाना हो सके। ड्राइवर ने गार्ड साहब को समझाते हुए बताया कि इंजन की तरफ देखो। इंजन की तरफ देखा तो गार्ड साहब भी सकते में आ गए।

ड्राइवर फुसफुसाते हुए बोला ” गार्ड साहब। आप अपने डब्बे में अकेले थे और कह रहे है कि आप लगातार हरा संकेत भेज रहे थे। अब तो आप यहां हो , अपने डब्बे में आप अकेले थे। लेकिन देखो वो कौन है, जो अब भी आपके डब्बे से हमको लाल संकेत भेजकर रुकने का संदेश दे रहा है। ऐसा कहकर इंजन ड्राइवर ने इंजन की सीटी बजाई, फ़ायरमेंन ने तेजी से अग्नि प्रज्ज्वलित की ओर इंजन तेजी से आगे बढ़ गया।

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

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