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अनार के फायदे और नुकसान | Pomegranate Benefits and Side Effects in Hindi

Pomegranate (अनार) -आयुर्वेद में अनार को बहुत ही चमत्कारी वाला फल बताया गया है। अनार का छिलका जितना कठोर रहता है, उतना ही अंदर से स्वादिष्ट, और मीठा होता है। अनार के इस्तेमाल से कई सारी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। केवल अनार ही नहीं, बल्कि पूरा पेड़ ही औषधीय गुणों से भरपूर रहता है। अनार में इतनी खूबियां रहती हैं। कोई रोग हो जाए तो उन्हें सबसे पहले अनार के सेवन की सलाह देते हैं।

Doctor (डॉक्टर) भी कमजोरी दूर करने के लिए, या इलाज के बाद स्वास्थ्य में लाभ पाने के लिए रोगी को अनार खाने की सलाह देते हैं। अनार के उपयोग से सेहत को बहुत-से फायदे मिलते हैं। अनार का प्रयोग कर रोगों की रोकथाम की जा सकती है। अनार का वानस्पतिक नाम-प्यूनिका ग्रेनेटम है यह लाल रंग का होता है। इसमें सैकड़ों लाल रंग के छोटे-छोटे रसीले दाने होते हैं। अनार दुनिया के गर्म प्रदेशों में पाया जाता है। सेहत की दृष्टि से अनार एक उपयोगी फल है। भारत में अधिकांश अनार के पेड़ महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और आन्ध्रप्रदेश में पाए जाते हैं।

अनार का सबसे पहले रोमन भाषियों ने पता लगाया था। रोम निवासी अनार को ज्यादा बीजों वाला सेव कहते थे। अनार के पेड़ सुंदर और छोटे आकार के होते हैं। इन पेड़ों पर फल आने से पहले लाल रंग के बड़े फूल लगते हैं, जो हरी पत्तियों के साथ खूबसूरत दिखते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार अनार लगभग 300 वर्ष पुराना फल है। यहूदी धर्म में अनार को जनन क्षमता का सूचक माना जाता है, जबकि भारत में अनार स्वास्थ्य सम्ब्न्धी गुणों के कारण लोकप्रिय है।

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अनार की प्रजातियाँ/ किस्में-

  • स्वाद में भिन्नता होने के कारण अनार की तीन किस्में होती हैं-
    • देशी अनार का स्वाद खट्टा-मीठा होता है।
    • कन्धार के अनार मीठे होते हैं।
    • काबुल अनार मीठे होते हैं। काबुली अनारों में गुठली रहित मीठा अनार होता है, जिसको बेदाना अनार कहा जाता है। ये अनार सबसे अच्छे होते हैं। अनार की तुलना में कली, और उसके छिल्के में अधिक गुण पाए जाते हैं।
  • रस में भिन्नता के अनुसार अनार तीन प्रकार के होते है-
    • मीठे रस वाले अनार।
    • खट्टे रस वाले अनार।
    • खट्टे-मीठे रस वाले अनार।

अनार के औषधीय गुण-

अनार

में प्रचुर मात्रा में Protin (प्रोटीन), Carbohydrates (कार्बोहाइड्रेट्स), Fiber (फाइबर), Vitamin (विटामिन) और Minerals (खनिज) पाये जाते हैं। अनार का 100 ग्राम उपयोग करने पर शरीर को लगभग 65 किलो कैलोरी जितनी ऊर्जा प्राप्त होती है। अनार का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने के लिए भी किया जाता है। अनार के बीजों से प्राप्त तेल का प्रयोग औद्योगिक क्षेत्र में किया जाता है। अनार के पेड़ की लकड़ी बहुत मजबूत होती है।

अनार रक्तसंचार वाली बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। उच्च रक्तचाप को घटाता है, सूजन और जलन में आराम पहुँचाता है, गठिया और वात रोग की संभावना को घटाता है, और जोड़ों के दर्द को कम करता है, Cancer (कैंसर) की रोकथाम में सहायक होता है, कम उम्र में बूढ़े दिखने की गति को धीमा करता है।

महिलाओं में मातृत्व की संभावना को और पुरुषों में पुंसत्व को बढ़ाता है। अनार को त्वचा के कैंसर, स्तन-कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर और पेट में अल्सर की संभावना को घटाने की दृष्टि से भी उपयोगी माना गया है। अनार का रस वृद्धावस्था में सठिया जाने से अल्सहाइमर रोग की संभावना को भी घटाता है। अनार के पेड़ की डाली से बनी कलम पूजा-उपासना और तांत्रिक प्रयोगों में इस्तेमाल की जाती है। पुजारी/तांत्रिक स्वच्छ कागज़ पर अनार की कलम को लाल रंग की स्याही में डुबाकर रेखाओं और गणित के अक्षरों से एक यंत्र का निर्माण करते हैं, जिसे शरीर पर धारण करने से नकारात्मक उर्जा के प्रभाव कम होते है।

अनार के विभिन्न भाषाओं में नाम -

अनार का वानस्पतिक नाम प्यूनिका ग्रैनेटम् (Punica granatum, Syn-Punica nana Linn, Punica, spinosa Lam) है, और अनार प्यूनिकैसी (Punicaceae) कुल का है। अनार को अनेक नामों से जाना जाता है, जो इस प्रकार हैं -

  1. Hindi (हिंदी) – अनार।
    • दाड़िम।
  2. Urdu (उर्दू) – गुल अनार (Gul anar)।
  3. English (इंग्लिश) – ऐपल ऑफ ग्रेनाडा (Apple ofGrenada)।
    • पोमग्रेनेट ( Pomegranate)।
  4. Sanskrit (संस्कृत) – दाडिम।
    • करक।
    • रक्तपुष्पक।
    • लोहितपुष्पक।
    • दलन।
  5. Oriya (ओरिया) – दालिम (Dalim)।
    • दालिम्बो (Dalimbo)।
  6. Uttarakhand (उत्तराखंड) – दाड़िम (Dadim)।
  7. Assamese (असम) – डालिम (Dalim)।
  8. Kannada (कन्नड़ा) – दालिम्बे (Dalimbe)।
    • हुलिडलिम्बे (Hulidalimbe)।
  9. Konkani (कोंकणी)– दालिम्ब (Dalimb)।
  10. Gujarati (गुजराती)– दाड़म (Dadam)।
    • गुलनार (Gulnar)।
  11. Tamil (तमिल) - मादलै (Madalai)।
    • मडुलै (Madulai)।
    • मडलम (Madlam)।
  12. Telugu (तेलुगु) – दालिम्बकाया (Dalimbkaya)।
  13. Bengali (बंगाली) – दाड़िम गाछ (Dadim Gachh)।
  14. Punjabi (पंजाबी) – दारूण (Darun)।
    • धारू (Dharu)।
    • जामन (Jaman)।
  15. Malayalam (मलयालम) – मातलम (Matalam)।
    • दाड़िमन (Dadiman)।
  16. Marathi (मराठी) – दालिम्बा (Dalimba)।
  17. Nepali (नेपाली) – अनार (Anar)।
  18. Arabic (अरेबिक) – रूमन (Rumman)।
  19. Persian (पर्शियन)– अनार (Anar)।
    • दरख्तेगुलनार (Darakhtegulnar।

अनार के फ़ायदे -

  • यदि बच्चों को बहुत प्यास लगती है तो अनार का प्रयोग करना चाहिए।
  • अनार के सेवन से एनीमिया और पीलिया रोग कम होता है।
  • अनार के उपयोग से दस्त पर नियंत्रण रहता है।
  • पेट में कीड़े होने पर करें अनार का उपयोग।
  • बच्चों की दस्त पर रोक लगाने के लिए अनार का इस्तेमाल।
  • गंजेपन के लिए उपयोगी।
  • चेहरे के दाग-धब्बों की समस्या में अनार का प्रयोग।
  • मुंह के छाले की समस्या में अनार का प्रयोग।
  • हाथ-पांव की सूजन में अनार का इस्तेमाल।
  • त्वचा रोग में अनार से फायदा मिलता है।
  • स्त्रियों में स्तनों को सुडौल बनाने के लिए अनार का सेवन।
  • बच्चों के सूखा रोग में अनार का उपयोग।
  • बार- बार हिचकी आने पर अनार का प्रयोग।
  • नींद ना आने (अनिद्रा) की समस्या में अनार का इस्तेमाल।
  • नाखून के विकार में अनार का उपयोग फायदेमंद साबित होता है।
  • घाव सुखाने के लिए अनार उपयोगी होता है।
  • सिर-दर्द से राहत पाने के लिए अनार का प्रयोग किया जाता है।
  • दांत के दर्द में अनार लाभदायक होता है।
  • अनार के उपयोग से मसूड़ों से खून और पीव आने की बीमारी में लाभ मिलता है।
  • नाक-कान के दर्द में अनार का इस्तेमाल किया जाता है।
  • नाक से खून बहने की समस्या में अनार का इस्तेमाल किया जाता है।
  • अनार का प्रयोग कर कान के दर्द से आराम दिलाता है।
  • कंठ रोग में अनार का सेवन लाभदायक होता है।
  • आंखों के रोगों में अनार से लाभ मिलता है।
  • मोतियाबिन्द में अनार फायदेमंद होता है।
  • भूख बढ़ाने के लिए अनार उपयोगी होता है।
  • अपच की समस्या में अनार का इस्तेमाल किया जाता है।
  • पाचनतंत्र विकार में अनार से लाभ मिलता है।
  • हैजा के रोग में अनार से फायदा मिलता है।
  • अनार के प्रयोग से खांसी और दमा से छुटकारा पाया जाता है।
  • अनार के प्रयोग से गर्भपात की समस्या में फायदा होता है।
  • ल्यूकोरिया रोग में अनार के उपयोग से लाभ होते हैं।
  • सुजाक में अनार के प्रयोग से फायदे होते हैं।
  • गर्भाशय भ्रंश (गर्भाशय का खिसकना) में अनार का इस्तेमाल किया जाता है।
  • अनार के उपयोग से हिस्टीरिया रोग में फायदा होता है।
  • अनार से सिफलिस रोग में फायदा होता है।
  • अनार के इस्तेमाल से टाइफाइड के इलाज में फायदा होता है।
  • अनार के प्रयोग से मूत्र संबंधित रोगों से निज़ात पा सकते हैं।
  • बवासीर में अनार के औषधीय गुणों से लाभ मिलता है।
  • अनार के औषधीय गुण से खूनी बवासीर में प्रभावी होता है।
  • अनार के इस्तेमाल से गुदाभ्रंश (गुदा से मस्सा बाहर निकलना) रोग में फायदा होता है।
  • उल्टी रोकने के लिए अनार का प्रयोग किया जाता है।
  • अनार के उपयोग से खून की उल्टी की बीमारी में लाभ मिलता है।
  • फेफड़ों के रोग में अनार के गुण से फायदा होता है।
  • अनार का प्रयोग टीबी रोग को रोकने में मदद करता है।
  • हृदय रोग में अनार के औषधीय प्रयोग से लाभ मिलता है।
  • दिमाग को तेज करने में असरदार होता है।
  • एनीमिया से राहत पाने में उपयोगी होता है अनार।

अनार के उपयोगी भाग -

  1. अनार के फूल।
  2. फल।
  3. अनार के बीज।
  4. अनार के पौधे के पत्ते।
  5. अनार के पौधे के तने।
  6. अनार के फल के छिलके।
  7. अनार के पेड़ की छाल।

अनार का इस्तेमाल कब और कितनी मात्रा में -

  • नाश्ते में अनार के इस्तेमाल के फायदे - सुबह के समय अनार खाना के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। अनार में पर्याप्त मात्रा में Shugar (शुगर) और Vitamin (विटामिन) पाएं जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं अनार के पौष्टिक तत्व दिन को स्वस्थ शुरुआत देते हैं। शुगर पर्याप्त ऊर्जा देने का काम करती है, जिससे दिन के भोजन तक Energy (एनर्जी) रहती है।
  • दोपहर/दिन में अनार के सेवन के फायदे - दोपहर/दिन में खाना खाने के बाद अनार का सेवन करते हैं। जिससे पेट भरा रहता है और बाहर बिकने वाली हानिकारक चीजों का शिकार नहीं होते।
  • रात को नहीं करें अनार का उपयोग - अनार का उपयोग कभी भी रात को नहीं करना चाहिए क्योंकि रात के वक्त शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी धीमा हो जाता है। अनार में मौजूद फाइबर पेट के लिए रात को पचा पाना मुश्किल होता है इसमें मौजूद शुगर रात को अच्छी तरह से संसाधित नहीं हो पाती, जो शरीर द्वारा Fat (फैट) में बदल देती है।
  • अनार का चूर्ण - 02 - 04 ग्राम
  • अनार का रस - 20 - 40 मिली

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अनार के प्रयोग से नुकसान -

  1. एसिडिटी से परेशान लोगों को अनार का सेवन नहीं करना चाहिए। अनार की ठंडी तासीर की वजह से खाना ठीक तरह से पच नहीं पाता है, जिससे खाना पेट में सड़ने लगता है।
  2. लो ब्लड प्रेशर वाले रोगियों को अनार का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
  3. खांसी की दिक्कत है तो अनार का सेवन ना करें इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
  4. Skin (स्किन) से संबंधित कोई दिक्कत होती है तो अनार से परहेज करना चाहिए क्योंकि अनार का सेवन करने से Skin पर लाल चकत्ते पड़ सकते हैं।
  5. इंफ्लूएंजा, खांसी अथवा कब्ज से पीड़ित हैं तो अनार का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे नुकसान हो सकता है।
  6. निम्न रक्तचाप के पीड़ित को डॉक्टर के अनुसार अनार का सेवन करना चाहिए।
  7. एलर्जी के रोगी को अनार का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार करना चाहिए।
  8. एड्स या मानसिक समस्या होने की स्थिति में हानिकारक हो सकता है।
  9. अनार-दाना का इस्तेमाल दर्पनाशक होता है।

अनार की खेती -

भारत में अनार के पेड़ हर जगह पाए जाते हैं। पश्चिमी हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखण्ड की पहाड़ियों पर अनार की खेती होती है।इसके अलावा ईरान एवं अफगानिस्तान में भी अनार की खेती होती है।