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अश्वगंधा के औषधीय गुण, फायदे, उपयोग और नुकसान(Ashwagandha Benefits in Hindi)

Ashwagandha (अश्वगंधा) - अश्वगंधा या असगंध (Withania somnifera) एक पौधा (क्षुप) होता है। यह पौधा विदानिया कुल का है। विदानिया कुल की पुरे विश्व में 10 तथा भारत में केवल 02 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। भारत में पांरपरिक रूप से अश्वगंधा का उपयोग आयुर्वेदिक उपचार के लिए किया जाता रहा है। इसके साथ इसे नकदी फसल के रूप में भी उगाया जाता है। इसकी ताजा पत्तियों तथा जड़ों में घोड़े की मूत्र की गंध आने के कारण इसका नाम अश्वगंधा रखा गया था।

अश्वगंधा एक प्रकार की जड़ी-बूटी है। अश्वगंधा का प्रयोग कई प्रकार के रोगों में किया जाता है। यह वजन घटाने, बल और वीर्य विकार को ठीक करने के लिए उपयोग में आता है। अश्वगंधा के अन-गिनत फायदों के अलावा अधिक मात्रा में सेवन करने से अश्वगंधा के नुकसान से सेहत के लिए असुविधा उत्पन्न हो सकती है। वर्तमान समय में अश्‍वगंधा के कुछ खास औषधीय गुणों के कारण यह बहुत तेजी से प्रचलित हो रहा है।

अश्वगंधा द्विबीज पत्रीय पौधा होता है। यह विदानिया/सोलेनेसी कुल का पौधा होता है। विदानिया/सोलेनेसी परिवार की विश्व में लगभग 3,000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। और इसके 90 वंश पाये जाते हैं। भारत में केवल इसकी 02 प्रजाति पाई जाती हैं। इस प्रजाति के पौधे सीधे, अत्यन्त शाखित, सदाबहार तथा झाड़ीनुमा 1.25 मीटर लम्बे होते हैं। इसकी पत्तियाँ रोमयुक्त और अण्डाकार होती हैं।

इसके फूल हरे, पीले तथा छोटे एंव पाँच के समूह में लगे होते हैं। इसका फल बेरी जो मटर के समान दूधयुक्त होता है। जो पकने पर लाल रंग का हो जाता है। इसकी जड़े 30 से 45 से.मी. लम्बी 2.5 से 3.5 से.मी. मोटी मूली की तरह होती हैं। इसकी जड़ों का बाह्य रंग भूरा तथा अन्दर से सफेद रहता है।

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यह आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्रयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पौधा है। आयुर्वेद मे अशवगंधा

को मध्य रसायन भी कहा जाता है। जिससे हमारे दिमाग की याद्दाश्त तथा एकाग्रता बढाने के लिए उपयोग किया जाता है। अश्वगंधा को जीणोद्धारक औषधि के रूप में भी जाना जाता है। इसमें एण्टी टयूमर एंव एण्टी वायोटिक के गुण भी पाये जाते हैं। अग्रलिखित बीमारियों के उपचार में अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता है।

क्या है अश्वगंधा -

अश्‍वगंधा अलग -अलग देशों में कई प्रकार की पायी जाती है, किंतु असली अश्वगंधा की पहचान करने के लिए इसके पौधे को मसलने पर उसमें घोड़े के पेशाब जैसी गंध आती है। अश्वगंधा की ताजी जड़ में यह गंध बहुत तेज होती है। वनों में पाए जाने वाले पौधों की तुलना में खेती के माध्‍यम से उगाए जाने वाले अश्‍वगंधा की गुणवत्‍ता अच्‍छी रहती है। लेकिन तेल निकालने के लिए वनों में पाया जाने वाला अश्‍वगंधा का पौधा सबसे अच्‍छा माना जाता है। यह दो प्रकार की होती हैं-

छोटी अश्वगंधा -

इसकी झाड़ी छोटी होने पर यह छोटी अश्वगंधा कहलाती है, किन्तु इसकी जड़ बड़ी होती है। राजस्‍थान में नागौर जिले यह बहुतायत में पाई जाती है और वहां की जलवायु के प्रभाव से यह विशेष रूप से प्रभावशाली होती है। इसलिए उसे नागौरी अश्वगंधा भी कहते हैं।

बड़ी या देशी अश्वगंधा -

इस अश्वगंधा की झाड़ी बड़ी होती है, लेकिन जड़ें छोटी तथा पतली होती हैं। यह बाग-बगीचों, खेतों और पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य मात्रा में पाई जाती है। इसमें कब्‍ज के गुणों की प्रधानता होने और उसकी गंध घोड़े के पेशाब सी होने से संस्कृत में इसे बाजी या घोड़े से संबंधित नाम दिए गए हैं।  

अश्वगंधा की बाहरी आकृति-

अश्‍वगंधा की दो प्रजातियां बाजारों में मिलती हैं -

  1. मूल अश्‍वगंधा Withania somnifera (Linn.) Dunal, यह 0.3-02 मीटर ऊंचा, सीधा, धूसर रंग का घनरोमश तने वाली होती है।
  2. काकनज Withania coagulans (Stocks) Duanl, जो लगभग 01.2 मीटर तक ऊंचा, झाड़ीदार तने वाली होती है।

अश्वगंधा के विभिन्न भाषाओं नाम -

अश्‍वगंधा को आम बोलचाल की भाषा में असगंध के तौर पर जाना जाता है, लेकिन देश-विदेश में इसको कई नामों से जाना जाता है। अश्‍वगंधा का वानस्पतिक नाम (Botanical name) Withania somnifera (L.) Dunal (विथेनिआ सॉम्नीफेरा) Syn-Physalis somnifera Linn. है तथा इसके अन्य भाषाओं में नाम ये हैं -

  • Hindi (हिंदी) – असगन्ध।
    • अश्वगन्धा।
    • पुनीर।
    • नागोरी असगन्ध।
  • English (इंग्लिश)– Winter cherry  (विंटर चेरी)।
    • पॉयजनस गूज्बेर्री (Poisonous gooseberry)।
  • Sanskrit (संस्कृत) – वराहकर्णी।
    • वरदा।
    • बलदा।
    • कुष्ठगन्धिनी।
    • अश्वगंधा।
  • Oriya (ओरिया) – असुंध (Asugandha)।
  • Urdu (उर्दू) – असगंधनागोरी (Asgandanagori)।
  • Kannada (कन्नड़ा) – अमनगुरा (Amangura)।
    • विरेमङड्लनागड्डी (Viremaddlnagaddi)।
  • Gujarati (गुजराती) – आसन्ध (Aasandh)।
    • घोडासोडा (Ghodasoda)।
    • असोड़ा (Asoda)।
  • Tamil (तमिल) – चुवदिग (Chuvdig)।
    • अमुक्किरा (Amukkira)।
    • अम्कुंग (Amkulang)।
  • Telugu (तेलुगु) – पैन्नेरुगड्डु (Panerugaddu)।
    • आंड्रा (Andra)।
    • अश्वगन्धी (Ashwagandhi)।
  • Bengali (बंगाली) – अश्वगन्धा (Ashwagandha)।
  • Nepali (नेपाली) – अश्वगन्धा (Ashwagandha)।
  • Punjabi (पंजाबी) – असगंद (Asgand)।
  • Malyalam (मलयालम) – अमुक्कुरम (Amukkuram)।
  • Marathi (मराठी) – असकन्धा (Askandha)।
    • टिल्लि (Tilli)।
  • Arabic (अरेबिक) – तुख्मे हयात (Tukhme hayat)।
    • काकनजे हिन्दी (Kaknaje hindi)।
  • Farasi (फारसी) – मेहरनानबरारी (Mehernanbarari)।
    • असगंध-ए-नागौरी (Ashgandh-e-nagori)।

अश्वगंधा में पौष्टिक तत्व -

Nutrients (पोषक तत्व) Ashwagandha Powder (अश्वगंधा पाउडर) (प्रति 100 ग्राम) में
Mositure (मॉइस्चर)07.45%
Esh (ऐश)04.41g
Protin (प्रोटीन)03.9 g
Fat (फैट)0.3g
Crude Fiber (क्रूड फाइबर)32.3g
Energy (ऊर्जा)245 Kcal
Carbohydrate (कार्बोहाइड्रेट)49.9 g
Iron (आयरन)03.3 mg
Calcium (कैल्शियम)23 mg
Cerotin (कैरोटीन)75.7 mg
Vitamin C (विटामिन-सी)03.7 mg

अश्वगंधा के फ़ायदे -

  1. हृदय के लिए -इसमें कई तरह के Antioxcident (एंटीऑक्सीडेंट) होते है। जो Cholestrol (कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को नियंत्रित करता है। जिससे हृदय में विकार होने की संभावना कम हो जाती है।
  2. Cencer (कैंसर) में - कैंसर एक खतरनाक बीमारी होती है। अश्वगंधा में ऐसे औषधीय गुण होते हैं। जो ट्यूमर को रोकते हैं। यह शरीर को Cencer (कैंसर) से बचाने में सहायता करता है।
  3. थायराइड के लिए - थायराइड में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करने में लाभदायक रहता है।
  4. तनाव दूर करने - तनाव को दूर करने के लिए अश्वगंधा बहुत फायदेमंद रहता है।
  5. प्रतिरक्षा के लिए - शरीर के लिए Imunity System (इम्युनिटी सिस्टम) मजबूत होना बहुत जरुरी होता है। इसमें ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने का काम करते है। जिससे सर्दी-खांसी की समस्या नहीं होती है।
  6. मोतियाबिंद - आंखो के लिए अश्वगंधा बहुत लाभदायक होता है। इसमें मोतियाबिंद रोग से लड़ने की शक्ति होती है।
  7. त्वचा के लिए - त्वचा सम्बंधित
    समस्याओं को दूर करने लिए इसका उपयोग अधिक फायदेमंद होता है। यह त्वचा में कोलेजन को बढ़ाता है। जिससे त्वचा रूखी नहीं होती है।
  8. बालो के लिए - बालों के गिरने की समस्या को दूर करने के लिए अश्वगंधा महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी मानी जाती है। यह मेलेनिन की हानि से बालों को बचाता है। बालों की जड़ो को मजबूत करता है। बालों के गिरने की समस्या कम हो जाती है।
  9. सफेद बाल की समस्या में उपयोगी होती है।
  10. आंखों की किसी भी प्रकार के लिए यह आवश्यक होती है।
  11. गले के रोग (गलगंड) में प्रभावी होती है।
  12. टीबी रोग में काफी महत्वपूर्ण रहती है।
  13. खांसी के इलाज में प्रयोग में ली जाती है।
  14. छाती के दर्द में लाभकारी होती है।
  15. पेट की बीमारी में प्रयोग की जाती है।
  16. कब्‍ज की समस्या से उबारने में मददगार होती है।
  17. गर्भधारण करने में सहायक होती है।
  18. ल्यूकोरिया के इलाज में फायदेमंद होती है।
  19. इंद्रिय दुर्बलता (लिंग की कमजोरी) दूर करती है।
  20. गुम गठिया के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है।
  21. चोट लगने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  22. शारीरिक कमजोरी के लिए जरूरी होती है।
  23. रक्त विकार में आवश्यक होती है।
  24. बुखार उतारने के लिए फायदेमंद होती है।

अश्वगंधा के उपयोग से नुकसान -

  • रक्तचाप से ग्रस्त लोगों को Ashwagandha का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
  • इसका अधिक सेवन करने से पेट में दर्द व डायरिया जैसी समस्या हो सकती है।
  • यह अनिद्रा दूर करने में फायदेमंद तो होता है, लेकिन अधिक मात्रा में प्रयोग करने से स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।
  • सही मात्रा में उपयोग ना करने पर उल्टी, जी मिचलाने जैसी समस्या होने लगती है।
  • मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए। यह शरीर में रक्त स्तर को नीचे कर देता है।
  • अधिक सेवन करने पर बुखार, थकावट, दर्द की समस्या होने लग सकती है।
  • गर्म प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए इसका प्रयोग नुकसानदेह होता है।
  • इसके नुकसानदेह प्रभाव को गोंद, कतीरा एवं घी के सेवन से ठीक किया जाता है।

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अश्वगंधा के उपयोगी भाग -

  1. जड़
  2. बीज
  3. फल
  4. पत्ते

अश्वगंधा का इस्तेमाल कैसे करें -

  • Ashwagandha की सूखी जड़ की 03 से 06 ग्राम खुराक का सेवन किया जा सकता है।
  • Ashwagandha की खुराक प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, सेहत, समस्या व अन्य कारणों पर भी निर्भर करती है।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना Ashwagandha का उपयोग न करें।
  • जड़ का चूर्ण – 02 - 04 ग्राम।
  • काढ़ा – 10-30 मिली ग्राम।

अश्वगंधा की खेती -

भारत में तथा खासकर सूखे प्रदेशों में Ashwagandha के पौधे पाए जाते हैं। यह अपने आप उग जाते हैं। इनकी खेती भी की जाती है। ये वनों में भी मिल जाते हैं। अश्‍वगंघा के पौधे 2,000-2,500 मीटर की ऊंचाई तक पाये जाते हैं।