हिन्दू धर्म | बुध प्रदोष व्रत करने के लाभ, विधि, उद्यापन, विधि व कथा 2022

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Benefits, Method, Udyapan, Method and Story 2022 of fasting Budh Pradosh

बुध प्रदोष व्रत आज दिनाँक 24 अगस्त 2022, बुधवार को रखा जाएगा। हिन्दू धर्मावलंबियों हेतु आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज बुध प्रदोष व्रत रखा जाता है। हम में से बहुत कम इसका ज्ञान रखते है अतः आइये, इस व्रत की पूर्ण जानकारी प्राप्त करते है।


प्रदोष अथवा त्रयोदशी का व्रत मनुष्य को संतोषी व सुखी बनाता है। वार के अनुसार जो प्रदोष व्रत किया जाता है, वैसे ही उसका फल प्राप्त होता है। सूत जी के कथनानुसार त्रयोदशी का व्रत करने वाले को सौ गाय-दान करने का फल प्राप्त होता है।

श्री सूत जी ने कहा- ‘बुध त्रयोदशी प्रदोष व्रत करने से सर्व कामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत में हरी वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। शंकर शिव जी की आराधना धूप, बेल पत्र आदि से करनी चाहिए।

प्रदोष व्रत तिथि

भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी, बुद्ध प्रदोष व्रत
बुधवार, 24 अगस्त 2022
प्रदोष व्रत प्रारंभ: 24 अगस्त 2022 सुबह 08:31 बजे
प्रदोष व्रत समाप्ति : 25 अगस्त 2022 सुबह 10:38 बजे।

बुध प्रदोष व्रत की विधि

सुबह स्नान के बाद भगवान शिव, पार्वती और नंदी को पंचामृत और जल से स्नान कराएं। फिर गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग और इलायची चढ़ाएं। शाम के समय एक बार फिर स्नान करके इसी प्रकार से भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद सभी चीजें एक बार फिर भगवान शिव को चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें। बाद में भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। इसके बाद आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। जितनी बार आप जिस भी दिशा में दीपक रखेंगे, दीपक रखते समय प्रणाम जरूर करें। अंत में भगवान भोलेनाथ की आरती करें और साथ ही शिव स्त्रोत, मंत्र जाप करें। रात में जागरण भी करें।

प्रदोष व्रत समापन पर उद्धापन

बुध प्रदोष व्रत को ग्यारह या फिर 26 त्रयोदशियों तक रखने के बाद व्रत का समापन करना चाहिए। इसे उद्धापन के नाम से भी जाना जाता है।

उद्यापन करने की विधि

इस व्रत का उद्यापन करने के लिए त्रयोदशी तिथि का चयन किया जाता है। उद्यापन से एक दिन पहले श्री गणेश का पूजन किया जाता है। पूर्व रात्रि में कीर्तन करते हुए जागरण किया जाता है। प्रात: जल्दी उठकर मंडप बनाकर, मंडप को वस्त्रों या पद्म पुष्पों से सजाकर तैयार किया जाता है। “ऊँ उमा सहित शिवाय नम:” मंत्र की एक माला अर्थात 108 बार जाप करते हुए हवन किया जाता है। हवन में आहूति के लिए खीर का प्रयोग किया जाता है। हवन समाप्त होने के बाद भगवान भोलेनाथ की आरती की जाती है शांति पाठ किया जाता है। अंत में दो ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और अपने सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

बुध प्रदोष व्रत की कथा

एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ। विवाह के 2 दिनों बाद उसकी पत्‍नी मायके चली गई। कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्‍नी को लेने उसके यहां गया। बुधवार को जब वह पत्‍नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्‍न किया कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं होता। लेकिन वह नहीं माना और पत्‍नी के साथ चल पड़ा।

नगर के बाहर पहुंचने पर पत्‍नी को प्यास लगी। पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा। पत्‍नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तब उसने देखा कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है। उसको क्रोध आ गया।

वह निकट पहुंचा तो उसके आश्‍चर्य का कोई ठिकाना न रहा, क्योंकि उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी। पत्‍नी भी सोच में पड़ गई। दोनों पुरुष झगड़ने लगे। भीड़ इकट्ठी हो गई। सिपाही आ गए। हमशक्ल आदमियों को देख वे भी आश्‍चर्य में पड़ गए।

उन्होंने स्त्री से पूछा ‘उसका पति कौन है?’ वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। तब वह पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- ‘हे भगवान! हमारी रक्षा करें। मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्‍नी को विदा करा लिया। मैं भविष्य में ऐसा कदापि नहीं करूंगा।’

जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया। पति-पत्‍नी सकुशल अपने घर पहुंच गए। उस दिन के बाद से पति-पत्‍नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे। अत: बुध त्रयोदशी व्रत हर मनुष्य को करना चाहिए।

बुध प्रदोष पूजा विधि

बुध प्रदोष पूजा विधि निम्नानुसार है-

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ॐ इस दिन सुबह स्नान आदि कर निवृत हो जाएं। स्नान करने के ॐ बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मंदिर में भगवान शिव के सामने दीप प्रज्जवलित करें। तथा भोलेनाथ के मंत्रों का ॐ जाप कर जलाभिषेक करें और साथ ही माता पार्वती और ॐ • विघ्नहर्ता भगवान गणेश की भी पूजा अर्चना करें। फिर प्रदोष काल से पहले स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें, ये वस्त्र आपके ॐ एकदम स्वच्छ होने चाहिए। इस समय आप मंदिर या घर कहीं ॐ भी पूजा कर सकते हैं।

यदि आप घर में भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं तो एक ॐ चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और उसपर भगवान शिव, माता • ॐ पार्वती और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें । ध्यान रहे पूजा के समय चौकी पर शिवलिंग जरूर स्थापित करें ।

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