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केले (Banana) के फायदे, उपयोग, औषधीय गुण और नुकसान

Banana (केला) - पूरे विश्व में Banana ( केला ) को बहुत ही पसंद से खाया जाता है और दूध बहुत से लोगों का पसंदीदा भोजन भी होता है। बहुत-सी जगहों पर इसके फूल की सब्जी भी बनाई जाती है, तो कई जगहों पर इसके पत्तों में भोजन किया जाता है।यह एक जड़ी-बूटी है, केला अधिक प्यास लगने की समस्या, घाव, सर्दी-खांसी, जैसी बीमारियों में इस्तेमाल से लाभ मिलते हैं। कुष्ठ रोग, कान के रोग, दस्त आदि रोगों में भी Banana (केले) के औषधीय गुणों से लाभ मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार केले को कदली, केरा बोला जाता है। आंखों के रोग, आग से जलने पर, और पेचिश रोग में औषधीय गुणों के लाभ होते हैं। गोनोरिया, बुखार, और शारीरिक कमजोरी होने पर भी केला उपयोगी होता है।

सभी फलो में केला एक ऐसा फल है जो आसानी से मिल जाता है। यह अन्य फलों की तरह अधिक महंगा भी नहीं होता है। इसमें Vitamin A (विटामिन ए), Vitamin C (विटामिन सी), Vitamin E (विटामिन इ), Vitamin K (विटामिन के), Sodium (सोडियम), Poteshium (पोटैशियम), Calcium (कैल्शियम), Megneshium (मैग्नीशियम), Zink (जिंक), Thymine (थायमिन), Selenium (सेलेनियम), Copper (कॉपर), Phosphorus (फॉस्फोरस), Manganese (मैगनीज) जैसे पोषक तत्व पाये जाते है। स्वास्थ के लिए Banana ( केला ) बहुत लाभकारी होता है।

Banana (केला) क्या होता है -

मूसा जाति के घासदार पौधे और उनके द्वारा उत्पादित फल को आम तौर पर Banana ( केला

) कहा जाता है। मूल रूप सेयह दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णदेशीय क्षेत्र और पपुआ न्यू गिनी में सबसे पहले उपजाया गया था। केले की खेती उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में की जाती है।इसका सबसे पहले प्रमाण 4000 वर्ष पहले मलेशिया में मिला थl इसके पौधे काफी लंबे और सामान्य रूप से काफी मजबूत होते हैं।

केला का

मुख्य या सीधा तना एक छद्मतना होता है। इसकी प्रजातियों में इस छद्मतने की ऊँचाई 02 से 08 मीटर तक और इसकी पत्तियाँ 03.5 मीटर तक लंबी हो सकती हैं। प्रत्येक छद्मतना हरे गुच्छे को उत्पन्न करता है, जो पकने के बाद पीले या कभी लाल रंग में परिवर्तित होते हैं। एक बार फल लगने के बाद छद्मतना मर जाता है और उसकी जगह दूसरा छद्मतना लेता है।

केले के फल लटकते गुच्छों में बड़े होते है, जिसमें 20 फलों तक की एक पंक्ति होती है एक गुच्छे में 03 से 20 की पंक्ति होती है। लटकते हुए समूह को गुच्छा कहा जाता है, व्यावसायिक रूप से इसे "बनाना स्टेम" कहा जाता है इसका वजन 30 से 50 किलो तक होता है। एक फल औसतन 125 ग्राम का होता है, जिसमें लगभग 75% पानी और 25% सूखी सामग्री होती है। प्रत्येक फल में एक सुरक्षात्मक बाहरी परत होती है जिसके अंदर एक मांसल भाग होता है।

प्राचीन काल से इसका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। इसके वृक्ष को पवित्र मन जाता है और उसकी पूजा भी की जाती है। आयुर्वेदिक किताबों में इसकी कई प्रजातियों का जिक्र किया गया है। जो इस प्रकार हैंः-

  • कदली।
  • काष्ठकदली।
  • कदली।
  • काष्ठकदली।
  • गिरीकदली।
  • सुवर्णमोचा।
  • माणिक्य।
  • मर्त्य।
  • अमृत।
  • चम्पकादि।

Banana (केले) के अन्य भाषाओं में नाम -

केले का वानस्पतिक नाम Musa paradisiaca Linn.(म्यूजा पैराडिजिएका) Syn-Musa sapientum Linn. है, और यह Musaceae (म्यूजेसी) कुल का है। केले के अन्य ये नाम भी हैंः-

  1. Hindi (हिंदी) - केला।
    • कदली।
    • केरा।
  2. Sanskrit (संस्कृत) - कदली।
    • वारणा।
    • मोचा।
    • अम्बुसारा।
    • अंशुमतीफला।
    • वारणबुसा।
    • रम्भा।
    • काष्ठीला।
  3. English (इंग्लिश) - प्लेन्टेन (Plantain)।
    • बनाना (Banana)।
    • ऐडम्स् फिग (Adam’s Fig)।
    • Banana tree (बनाना ट्री)।
  4. Assamese (असम) - कोल (Kol)।
    • तल्हा (Talha)।
  5. Oriya (ओरिया) - कोदोली (Kodoli)।
    • रामोकोदिली (Ramokodili)।
  6. Urdu (उर्दू) - केला (Kela)।
  7. Kannada (कन्नड़ा) - बालेहन्नु (Balehannu)।
    • कदली (Kadali)।
  8. Gujarati (गुजराती) - केला (Kela)।
  9. Tamil (तमिल) - कदली (Kadali)।
    • वलई (Valai)।
  10. Telugu (तेलुगु) - अरटि (Arati)।
    • कदलमु (Kadalamu)।
  11. Bengali (बंगाली) - केला (Kela)।
    • कोला (Kola)।
    • कोदली (Kodali)।
  12. Nepali (नेपाली) - केरा (Kera)।
  13. Punjabi (पंजाबी) - केला (Kela)।
    • खेला (Khela)।
  14. Marathi (मराठी) - केला (Kela)।
    • कदली (Kadali)।
  15. Malayalam (मलयालम) - वला (Vala)।
    • क्षेत्रकदली (Chetrakadali)।
    • कदलम (Kadalam)।
  16. Arabic (अरेबिक)- शाजरातुल्ताह्ल (Shajratultahl)।
  17. Persian (पर्शियन) - तुहलतुला (Tuhltula)।
    • मौज (Mouz)।

Banana (केले) के औषधीय गुण -

केले के आयुर्वेदीक गुण-कर्म एवं प्रभाव इस प्रकार हैं-

  • कषाय, मधुर, शीत, गुरु, कफवर्धक; वातशामक, रुचिकारक, विष्टम्भि, बृंहण, वृष्य, शुक्रल, दीपन, सन्तर्पण, ग्राही, संग्राही, बलकारक, हृद्य, स्निग्ध और तृप्तिदायक होते हैं।
  • अधिक प्यास लगने की समस्या, जलन, चोट लगने पर, आंखों की बीमारी में लाभ पहुंचाते हैं।
  • कान के रोग, दस्त, रक्तपितत्त, कफ, योनि दोष आदि में भी फायदे होते हैं।
  • केले के फूल तिक्त, कषाय, ग्राही, दीपन, उष्ण, स्निग्ध, बलकारक, केश्य, हृद्य, वस्तिशोधक, कफपित्त-शामक, वातकारक, कृमिशामक; रक्तपित्त, प्लीहाविकार, क्षय, तृष्णा, ज्वर और शूल-नाशक होते हैं।
  • इसके पत्ते शूल शामक, वृष्य, हृद्य, बलकारक और कान्तिवर्धक होते हैं। यह रक्तपित्त, रक्तदोष, योनिदोष, अश्मरी, मेह, नेत्ररोग और कर्णरोग-नाशक होते हैं।
  • इसका कच्चा फल मधुर, कषाय, शीतल; गुरु, स्निग्ध, विष्टम्भि, बलकारक, दुर्जर, दाह, क्षत, क्षय शामक और वात पित्तशामक होता है।

Banana (केले) के फायदे और Banana (केले) के उपयोग -

  1. इसका उपयोग करने से शरीर में जलन, पित जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।
  2. शरीर के वजन को कम करने में सहायक होता है।
  3. इसके सेवन से आंखो की समस्या नहीं होती है।
  4. हृदय के लिए यह फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें बहुत से पोषक तत्व होते है जो शरीर में रक्त को शुद्ध करते हैं।
  5. अल्सर के मरीजों के लिए उपयोगी होता है।
  6. इसके सेवन से पेट की गैस में आराम मिलता है।
  7. इनके नियमित सेवन से शरीर का ब्लूडशुगर लेवल को नियंत्रित रहता है।
  8. इनका सेवन करने से शरीर में कमजोरी नहीं होती है।
  9. मधुमेह पीड़ितों के लिए इनका सेवन फायदेमंद होता है।
  10. आंखों की जलन में इसका प्रयोग।
  11. नाक से खून निकलने पर इनका इस्तेमाल।
  12. कान के दर्द में सहायक।
  13. दांतों के रोग में लाभकारी।
  14. सांसों की बीमारी में प्रभावी।
  15. आंतों के रोग में उपयोग।
  16. पेचिश की आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल।
  17. दस्त में उपयोगी ।
  18. एसीडिटी की आयुर्वेदिक होते हैं।
  19. मूत्र रोग में सहायक ।
  20. गोनोरिया रोग में प्रभावी।
  21. सिफलिस रोग का इलाज करने में सक्षम।
  22. कुष्ठ रोग के इलाज में उपयोगी।
  23. घाव में फायदेमंद।
  24. बाल हटाने (हेयर रिमूवल) में काम करते हैं।
  25. आग से जलने पर।
  26. मानसिक रोगों (मैनिया, मिर्गी और अनिद्रा) में फायदे।
  27. महिलाओँ को गर्भावस्था के दौरान सेवन करना चाहिए जिससे शरीर स्वस्थ और बच्चा भी स्वस्थ रहेगा।
  28. एनीमिया की बीमारी होने पर महिलाओं को अधिक सेवन करना चाहिए जिससे उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
  29. महिलाओं को अधिक खून मासिक धर्म के दौरान आता है तब दूध में केला मिलाकर सेवन करना चाहिए इससे उनकी समस्या कम हो जाती है।
  30. पाचन तंत्र की समस्या के लिए महिलाओं को दूध के साथ केला का सेवन करना चाहिए है।
  31. बाल गिरने की समस्या के लिए इसकी पत्ती का उपयोग जैतून तेल के साथ करके बालो में लगाना चाहिए।
  32. त्वचा में निखार लाने के लिए इसका सलाद बनाकर उपयोग करना चाहिए जिससे चेहरा निखरने लगता है।
  33. इसके पोषक तत्व सूजन को दूर करने में सहायक होते हैं
  34. आंखो की सूजन को ठीक करने के लिए उपयोग करना चाहिए।

Banana (केले) के उपयोगी भाग -

  • जड़।
  • पंचांग।
  • फूल।
  • तना।
  • फल।
  • पत्ते।

Banana (केला) के इस्तेमाल और खाने का समय -

  1. यदि कोई खेल खेलते हैं व व्यायाम करते है तो उससे शारीरिक शक्ति समाप्त हो जाती है और भूख लगने लगती है। तब इनका सेवन करना चाहिए।
  2. तनाव होने पर सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें बहुत से तत्व होते है जो दिमाग को शांत करते है और तनाव को दूर करते हैं।
  3. इन्हें खाने का सही समय सबुह नाश्ते के साथ व दिन के खाने के साथ और रात के भोजन के साथ लेना चाहिए।
  4. इसको खाली पेट नहीं खाना चाहिए।
  5. केले को इतनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिएः-
    1. रस- 10-20 मिली।
    2. चूर्ण- 10-20 ग्राम।

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Banana (केले) के नुकसान -

  • इसका अधिक मात्रा में सेवन करने शरीर का वजन बढ़ सकता है क्योंकि इनमें 100 से 120 कैलोरी होती है। और अधिक कैलोरी शरीर के लिए नुकसानदायक होती है।
  • इसके कण दांतो में फसने से दांतो में कीटाणु आ जाते हैं जिससे दांतो के गिरने की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • इनका अत्यधिक सेवन करने से सिरदर्द की समस्या हो जाती है वह इसलिए की इनमें अमीनो एसिड अधिक मात्रा में होता है जो शरीर को नुकसान पंहुचाता है।
  • यदि गैस की समस्या है तो उसके लिए अधिक सेवन नुकसानदायक होता है।

Banana (केले) की खेती और कहां उगाया जाता है -

केले की खेती मूलतः बिहार और पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों में की जाती है। जो 1400 मीटर तक की ऊँचाई पर पाए जाते हैं। भारत में विशेषतः उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडू और आँध्र प्रदेश में इसकी खेती की जाती है।