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अलसी बीज के फायदे (Benefits of Flax Seeds in Hindi)

अलसी बीज के फायदे - अलसी का बीज का दूसरा नाम तीसी है। अलसी एक जड़ी-बूटी होती है। जिसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। स्थानों की प्रकृति के अनुसार, अलसी तीसी के Seeds (बीजों) के रंग-रूप, और आकार में भी अंतर पाया जाता है। देश भर में अलसी तीसी के Seeds (बीज) सफेद, पीले, लाल, या थोड़े काले रंग के होते हैं। गर्म प्रदेशों की अलसी तीसी सबसे अच्छी मानी जाती है। सामान्यतौर पर लोग तीसी के बीज तेल के उपयोग में लेते हैं। तीसी के प्रयोग से सांस, गला, कंठ, कफ, पाचनतंत्र विकार सहित घाव, कुष्ठ आदि समस्याओं में उपयोग ली जाती है।

अलसी का बीज का उपयोग घरेलू कार्यों में अक्सर होता है। कई घरेलू व्यंजनों में Flax Seeds (अलसी का बीज) का प्रयोग किया जाता है। अलसी के बीज बहुत ही छोटे होते हैं लेकिन इसमें बहुत से गुण होते हैं। Flax Seeds (अलसी का बीज) को केवल खाद्य पदार्थ के रूप में ही नहीं इस्तेमाल किया जाता बल्कि उससे कई रोगों का इलाज भी किया जा सकता है। Flax Seeds (अलसी का बीज) के उपयोग से अनेक रोगों की रोकथाम कर सकते हैं।

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अन्य भाषाओं में अलसी के नाम (Names of Linseed in Other Languages in Hindi) :

Flax Seeds (अलसी का बीज)

तीसी का वानस्पतिक नाम लाइनम यूसीटैटीसिमम (Linum usitatissimum L.,Syn-Linum humile Mill है, और यह लाइनेसी (Linaceae) कुल की होती है। दुनिया में Flex (अलसी) तीसी को कई नामों से जाना जाता है। जो इस प्रकार हैंः-
  • Hindi (हिंदी) – तीसी
    • अलसी
  • Urdu (उर्दू) – अलसी (Alasi)
  • English (इंग्लिश) – लिनसीड (Linseed)
    • फ्लैक्स प्लान्ट (Flax plant)
    • कॉमन फ्लैक्स (Common flax)
  • Sanskrit (संस्कृत)– अतसी
    • नीलपुष्पी
    • नीलपुष्पिका
    • उमा
    • क्षुमा
    • मसरीना
    • पार्वती
    • क्षौमी
  • Oriya (ओरिया)– पेसू (Pesu)
  • Uttarakhand (उत्तराखण्ड) – अलसी (Alsi)
  • Kannada (कन्नड़ा)– अगसीबीज (Agasebeej)
    • सेमीअगासे (Semeagase)
    • अलसी (Alashi)
  • Konkani (कोंकणी)– सोन्नबीअम (Sonnbiam)
  • Gujarati (गुजराती)– अलसी (Alshi)
  • Tamil (तमिल)– अलिविराई (Alivirai)
    • अलसीविराई (Alshivirai)
  • Telugu (तेलुगु)– अविसि (Avisi)
    • उल्लुसुलू (Ullusulu)
    • मदनजिन्जालु (Madanginjalu);
  • Bengali (बंगाली)– तिसी (Tisi)
    • मसीना (Masina)
    • असिना (Asina)
  • Punjabi (पंजाबी)– अलीश (Alish)
    • अलसी (Alasi)
    • अलसी (Atashi)
  • Marathi (मराठी)– जवस (Javas)
    • अलशी (Alashi)
  • Malayalam (मलयालम)– अगासी (Agashi)
    • चार्म (Charm)
    • चेरुकाना (Cherucana)
    • अकासी (Akasi)
  • Nepali (नेपाली)– अलसी (Alasi)
  • Arabic (अरबिक)– केट्टन (Kettan)
    • बाजरुलकटन (Bazrulkattan)
  • Persian (पर्शियन)– तुख्म-ए-कटन (Tukhm-e-kattan)

अलसी बीज के फायदे (Benefits of Flax Seeds in Hindi) :

  1. नींद ना आने की बीमारी में अलसी का प्रयोग किया जाता है।
  2. आंखों की परेशानी में अलसी का उपयोग लिया कटा है।
  3. अलसी का उपयोग दर्द और सूजन में लाभकारी होता है।
  4. कान की सूजन को ठीक करने में अलसी फायदेमंद होती है।
  5. सरदर्द को कम करने में अलसी का उपयोग किया जाता है।
  6. जुकाम से राहत पाने के लिए अलसी का इस्तेमाल किया जाता है।
  7. खांसी की समस्या में अलसी का प्रयोग किया जाता है।
  8. दमा (दमे) की बीमारी में अलसीका प्रयोग होता है।
  9. वात-कफ दोष में अलसी फायदेमंद साबित होती है।
  10. थायराइड में अलसी का उपयोग लाभदायक होता है।
  11. घाव सुखाने के लिए अलसी का प्रयोग होता है।
  12. आग से जलने पर उपयोग में ली जाती है।
  13. कामोत्तेजना बढ़ाने और वीर्य (धातु रोग) रोग में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  14. मूत्र विकार (पेशाब संबंधित रोग) में उपयोग।
  15. अलसी का प्रयोग सुजाक रोग में।
  16. तिल्ली या प्लीहा के बढ़ने पर अलसी का प्रयोग।
  17. बवासीर में अलसी के तेल के इस्तेमाल।
  18. जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए अलसी का उपयोग।
  19. वात-रक्त विकार में अलसी का उपयोग।

अलसी के नुकसान (Harm of Flaxseed in Hindi) :

  • दस्त में उपयोगी अलसी) - अलसी का सही मात्रा में खाई/उपयोग किया जाए तो इससे कब्ज दूर हो सकती है, किन्तु अधिक मात्रा में ली जाए तो यह दस्त की शिकायत भी कर सकती है।
  • Flex (अलसी) से आंतों में Blockage (ब्‍लॉकेज) रुकावट - पर्याप्‍त मात्रा में तरल पदार्थ लिए बिना जरूरत से ज्‍यादा अलसी खाने से आंतों में Blockage (ब्‍लॉकेज)रुकावट भी आ सकती है।
  • Scleroderma के पीड़ितों को अलसी) नहीं खानी चाहिए क्‍योंकि इससे गंभीर कब्‍ज हो सकता है
  • Allergy (एलर्जी) - ज्‍यादा अलसी खाने से सांस लेने में रुकावट हो सकती है , Low Blood Pressure (लो ब्‍लड प्रेशर) और तीव्रग्राहिता जैसे Allergik Reaction (एलर्जिक रिएक्‍शन) हो सकते हैं।
  • Flex (अलसी) के अधिक प्रयोग से घबराहट, पेट में दर्द और उल्‍टी की श‍िकायत हो सकती है।
  • यदि कोई महिला प्रेग्‍नेंट होना चाहती है - तो Flex
    (अलसी) के बीज एस्‍ट्रोजन की तरह काम करते हैं और जो महिलाएं प्रतिदिन अलसी के बीज खाती हैं उनके पीरियड साइकिल में बदलाव नज़र आ सकता है।
  • इसके अलावा जो महिलाएं हार्मोनल दिक्‍कतों जैसे कि पॉलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम, यूटरिन फायब्रॉयड्स, यूटरिन कैंसर और ओवरी कैंसर से जूझ रही होती हैं, उन्‍हें अलसी को अपने आहार में शामिल करते समय सावधानी रखनी चाहिए।
  • ज्‍यादा मात्रा में अलसी खाने से कई दिक्‍कतों से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।
  • महिलाओं में प्रेग्‍नेंसी के दौरान अलसी असुरक्ष‍ित होती है क्योंकि Flex (अलसी) के बीजों में एस्‍ट्रोजन के गुण होते हैं। इससे पीरियड्स आ सकते हैं। प्रेग्‍नेंट महिलाओं को Flex (अलसी) के बीज खाने की सलाह नहीं दी जाती है, क्‍योंकि इन्‍हें खाने से पीरियड्स आ सकते हैं, जो होने वाले बच्‍चे और मां दोनों को नुकसान पहुंचाती है।

अलसी के उपयोगी भाग (Useful Parts of Flaxseed in Hindi) :

Flex (अलसी) का पंचांग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

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अलसी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Flaxseed in Hindi?) :

Flex (अलसी) को कच्चा भी खा सकते हैं लेकिन इसका स्वाद बढ़ाने के लिए Flex (अलसी) के बीज को 5 मिनट तक भून लें।

भूने हुए Flex (अलसी) के बीज(roasted Flax Seeds) को ग्राइंडर/मशीन (द्वारा) में पीस लें जिसे Flex (अलसी) के चूर्ण का एक चम्मच प्रयोग में ले सकते हैं।

तीसी या Flex (अलसी) का चूर्ण - 2 से 5 ग्राम की मात्रा में ही।

अलसी कहां उगाई जाती है? (Where is Flaxseed Grown in Hindi?) :

Flex (अलसी) की खेती पूरे भारत में की जाती है। भारत में Flex (अलसी) की खेती शरद ऋतु की फसल के साथ की जाती है।

हिमाचल प्रदेश में 1800 मीटर की ऊंचाई तक Flex (अलसी)/तीसी बोई जाती है।