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| On 3 years ago

Bharat Band : Closing markets will not solve problems.

बहुत हो गया ये "बन्द" और "खुले" का खेल। समस्या-समाधान के तरीके और भी है।

"भारत बंद" रोजमर्रा का विषय नही।

कल अमुक लोगो ने किया था , आज अमुक कर रहे है, कल अमुक भारत बंद करेंगे। सोशल मीडिया पर दिल खोल कर "भारत बंद" के दावे सगर्जना किए जा रहे है इसके इतर विभिन्न रैलियों के तहत तो यह भारत बंद रोजमर्रा की सी बात लगने लगा है।

जायज मांग हेतु तरीके भी हो जायज

अपने-अपने हक ओर अपनी-अपनी मांगे है , जो शायद जायज भी है लेकिन इन सबके लिए क्या सभी मंच बन्द

हो गए है कि अब एकमात्र निवारण भारत बंद ही रह गया है। लोग समूह में सक्रियता दर्शित करने को इतने उतावले बन पड़े है कि भारत बंद को लेकर अपने विचार नए से नए अंदाज में व्यक्त कर रहे है और बाकी कुछ नया नही कर पा रहे तो "कॉपी एंड पेस्ट" करके दायित्व निर्वहन कर रहे है।

बन्द से होता है बड़ा नुकसान

भारत जैसे विशाल देश और बढ़ती अर्थव्यवस्था में किसी भी प्रकार के बन्द के आर्थिक नुकसान की गणना एक बेहद जटिल व नामुमकिन जैसा काम है। आज देश की जनसंख्या 125 करोड़ व कार्यकारी जनसंख्या भी 60 करोड़ से ऊपर है। 60 करोड़ लोगों की एक दिन की निष्क्रियता, सार्वजनिक सम्पतियों के नुकसान व 125 करोड़ लोगों द्वारा उठाये गए सामाजिक नुकसान का आकलन किसी छोटे देश के सालाना जीडीपी से कही ज्यादा रहना सम्भावित है।

आइये। देश को करे मजबूत।

समस्याएं अपनी

जगह सत्य है व उनका निराकरण भी राष्ट्र का धर्म है एवम इस हेतु हमारे राष्ट्र में एक मजबूत आधरभूत सरंचना भी कायम है। इस आधारभूत सरंचना का संचालन हम भारतीयों द्वारा ही किया जाता है। एक दिन के बन्द से यह सरंचना कतई मजबूत नही होती अपितु इसमे और कमजोरी जरूर आती है।

समय आ गया है कि हम राष्ट्र हित मे भारत बंद जैसे जुमले इस्तेमाल में लेना बंद करे व राष्ट्र-हित मे देश की आधारभूत सरंचनाओं के विकास व मजबूती के लिए अपनी व्यक्तिगत व सामुहिक शक्तियों को विनियुक्त करे। हम सभी मिलकर जाति, धर्म व सम्प्रदाय से ऊपर होकर राष्ट्रीयता के आधार पर निर्णय करे व व्यक्तिगत लक्ष्यों के परित्याग सुनिश्चित करे।

नए तरीके हो विरोध के भी।

आरम्भिक शिक्षा के दौरान कक्षाकक्ष में हमारे शिक्षक जापान देश मे होने वाली हड़ताल के क्रम में बतलाते थे कि वहाँ के नागरिक सत्ता का ध्यान आकृष्ट करने

के लिए रोजमर्रा से दुगना काम हड़ताल के दिन करते थे। हम भी कुछ अलग प्रकार से अपने विरोध को नियोजित करके अपने पक्ष को रखते हुए राष्ट्र हित मे कार्य जारी रख सकते है।

महज भारत को बंद रखने की जगह भारत को अतिरिक्त समय से अपनी सेवाओं के द्वारा अधिक मजबूती प्रदान कर सकते है और इसी मजबूती से हमारी समस्याओं का समाधान भी प्राप्त कर सकते है। किसी राष्ट्र को बंद करने के आव्हान की अपेक्षा सम्बंधित न्यायालय, मीडिया, मंचन इत्यादि का प्रयोग अधिक बेहतरीन उपाय सिद्ध हो सकता है।