Blackboard Vs Whiteboard: Story, Review, dialogues and Recommendation.

ब्लैकबोर्ड Vs वाईटबोर्ड: शिक्षा के मुद्दे को लेकर बनी एक मसाला फ़िल्म।

ब्लैकबोर्ड Vs वाईटबोर्ड: फ़िल्म समीक्षा, सम्वाद व कहानी।

शिक्षा को आधार रखकर बहुत कम फिल्मों का निर्माण हुआ है। यह फ़िल्म ब्लैकबोर्ड v/s वाईटबोर्ड भी पूर्णतया शिक्षा पर आधारित फिल्म नही बन सकी हैं। आरम्भ में फ़िल्म शिक्षा के मुद्दों को छूती है लेकिन अंततः चूंचूं का मुरब्बा ही बन जाती हैं।

निर्देशक- तरुण बिष्ट
लेखक- जिरेश तिवारी
मुख्य कलाकार- रघुबीर यादव, अशोक समर्थ, अखिलेश मिश्रा, पंकज झा, अलिस्मिता, धर्मेंद्र सिंह, आशुतोष सिंह व मधु राय है।
अनुमानित बजट- 3 करोड़।

रिकमंडेशन

– फ़िल्म को हम 2/5 स्टार देते है। फ़िल्म साफ सुथरी है व कुछ हद तक शिक्षा की मूल समस्याओं को छूती है। इस हेतु निर्माताओं को धन्यवाद लेकिन मनोरंजन, केनवास व क्वालिटी के नाम पर कमजोर है। अंत में कोर्ट रूम प्रोसीडिंग्स को बेहतर बना कर फ़िल्म को सुधारा जा सकता था। रघुबीर यादव एकमात्र स्टार फेस है उन्होंने बस अपना काम पूरा किया है। हम फ़िल्म को टाइमपास केटेगरी में रखते है। फ़िल्म के सेटेलाइट प्रसारण को निश्चित रूप से अधिक दर्शकों का समर्थन मिलेगा।

कहानी

एक नवनियुक्त शिक्षक अमित जब अपनी ग्रामीण स्कूल रामगढ़ के कोचरा में पहुँचता है एवम स्कूल की परिस्थितियों से दो-चार होता है। स्कूल में नामांकन मात्र 25 है व एक हेडमास्टर श्री दीनानाथ (रघुबीर यादव) कार्यरत है। स्कूल में एक मैडम पुनिता हैं जो मुखिया गजराजप्रताप सिंह की साली है। वह स्कूल में एक-दो दिन आती है तथा पूरे माह की हाजरी लगाती है। स्कूल की स्तिथी बहुत दयनीय है। एक दो कमरों में तो मुखिया जी के घर का भूसा तक भरा होता है।
स्कूल में नवनियुक्त शिक्षक बालिका पिंकी व मिडडेमील कुक मिश्री से मिलता हैं। इसी बीच एक प्रेस रिपोर्टर भी सरकारी स्कूल की रिपोर्ट बनाने के लिए आती हैं। रिपोर्टर स्कूल के न्यून नामांकन पर फोकस करती हैं। रिपोर्टर नेगेटिव रिपोर्ट बनाने लगती है तो नवनियुक्त अध्यापक रिपोर्टर को टोकता है।
रिपोर्टर नवनियुक्त अध्यापक को स्कूल सुधारने व पॉजिटिव वातावरण तैयार करने हेतु 2 सप्ताह का समय देती है। नवनियुक्त अध्यापक इस चेलेंज को स्वीकार करता हैं। संस्थाप्रधान भी सहयोग का आश्वासन देते है। रिपोर्टर रश्मि भी आने वाले 15 दिन तक यही रुकने का फैसला करती हैं।
उनके सामने पहली चुनोती पुनिता मैडम को नियमित रूप से स्कूल बुलाने की होती है। रिपोर्टर की उपस्थिति के कारण मुखिया जी को स्कूल के कमरे खाली करने व साली को रोज स्कूल भेजने पर सहमति देनी पड़ती है। स्टूडेंट पिंकी के पिता नवनियुक्त शिक्षक व रिपोर्टर को अपने घर मे रहने की जगह देते हैं।
शिक्षक अमित व रिपोर्टर रश्मि के प्रयासों से कुछ सुधार परिलक्षित होने लगते है। स्कूल का नामांकन भी 150 तक पहुंच जाता हैं। इसी बीच मुखिया भी विद्यायक बनने के फेर में अपनी हरकतों को कम कर देते है। अध्यापक व रिपोर्टर में मित्रतापूर्ण सम्बंध स्थापित होने लगते हैं।
स्कूल में नामांकन बढ़ने से नजदीकी प्राइवेट स्कूल चलाने वाले अमित के दुश्मन बन जाते हैं। रिपोर्टर रश्मि को अपने काम के सिलसिले में वापस लौटना पड़ता हैं। रश्मि स्कूल की विस्तृत रिपोर्ट को टेलिकास्ट कर देती है । रिपोर्ट के कारण मुखिया का विधायक हेतु टिकट पार्टी काट देती हैं। इस रिपोर्ट के बाद मुखिया की अमित से दुश्मनी भी बढ़ जाती है।
मुखिया अपनी टिकट बनाये रखने की कोशिश में टीचर अमित से सम्बंध सुधारने के लिए अपने भाई के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखाने की कोशिश करता है एवम जनता में अपनी छवि बरकरार रखने के डेमेज कन्ट्रोल की दिखावटी कोशिश करता हैं।
इसी बीच एक चाल के तहत स्कूल के मिड डे मील में जहरीला पदार्थ मिलवा दिया जाता है। बच्चों की तबियत खराब हो जाती है। मुखिया अपनी रैली को छोड़कर बच्चों की हेल्प के लिए स्कूल पहुंचता है एवं सभी बच्चों को हॉस्पिटल ले जाया जाता है। इस साजिश में 2 बच्चे मर जाते है एवम 88 बच्चों की तबियत खराब हो जाती हैं।
बच्चों की तबियत खराब होने की साजिश का ठीकरा शिक्षक अमित के सर पर फूटता है। पिंकी द्वारा सूचना देने पर रश्मि गांव पहुचती है एवम अमित के वकील के रूप में कोर्ट में पेश होती है।
कोर्ट में लंबी बहस होती है। दोनो पक्षो द्वारा विभिन्न तर्क रखे जाते थे। विरोधी पक्ष द्वारा अमित पर बच्चों के शोषण के रूप में श्रम कार्य करवाने का आरोप भी लगता हैं। रसोइए के इस बयान के बाद कि अमित खाने को टेस्ट करने के बाद कुछ समय रसोई में अकेला था। एक बार अमित के खिलाफ वातावरण बनता दिखने लगता हैं।
रसोइया मिश्री कोर्ट में बताता है की अध्यापक अमित को एक लिफाफे में कुछ तस्वीरों के द्वारा ब्लैकमेल की कोशिश की गई थी। डिफेंस वकील कोर्ट में यह तर्क देती है कि मुखिया गजराजप्रताप सिंह ने यह साजिश रची थी। अदालत अमित की जमानत मंजूरी कर देती हैं।
पता चलता है बच्चों को जहर मुखिया के विश्वासपात्र नोकर नत्थू ने मिलाया था जिसे बड़ी जद्दोजहद के बाद कोर्ट में पेश किया जाता हैं।
नोकर नथुनी के रहस्योद्घाटन के पश्चात सभी रहस्य खुल जाते है व सत्य की विजय होती हैं।

बदलाव की योजना –

1. दोपहर के मिड डे मील के बाद विद्यार्थियों को स्कूल रोकने की व पढ़ाने की कार्यवाही।
2. जनसम्पर्क करके स्कूल स्टाफ “स्कूल चलो तुम” योजना के माध्यम से स्कूल नही आने वाले बालक-बालिकाओं को चिन्हित करके स्कूल आने के लिए प्रेरित करना।
3. विद्यार्थियों के सहयोग से स्कूल वातावरण में सुधार किया जाता है। साफ-सफाई, रंग-रोगन से स्कूल को सुंदर रूप दिया जाता है।
4. कक्षा में पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता हैं।
5. समय पर निःशुल्क पुस्तकों की सप्लाई, मिड डे मील के पेमेंट के लिए उच्चाधिकारियों से सम्पर्क किया जाता हैं।

म्यूजिक-

“स्कूल चलो तुम” एक सुंदर गीत है जिसके माध्यम से समाज मे सुंदर सन्देश सम्प्रेषण किया जा सकता हैं। “बरसो से जो बन्द पड़े है वो दरवाजे खोलो” भी एक कर्णप्रिय गीत हैं। “ललन मोरा हिंदी, अंग्रेजी , गणित सब पढ़ने लगा है”। भी अच्छा गीत हैं।

सम्वाद-

1. पहली लाइन पहली कक्षा, दूसरी लाइन दूसरी कक्षा व लास्ट लाइन पांचवी कक्षा।
2. यह सच है कि स्कूल की हालात खराब है लेकिन ऐसी नकारात्मक रिपोर्ट अखबार में आने से क्या फायदा हैं।
3.हमारे देश के राष्ट्रपति कोन है?
उत्तर- हम नही है, आप नही है। सही है ना।
4. अगर मन जँच जाए तो पैसे-कोड़ी के लिए रिश्ते थोड़ी टूटते हैं।
5. सरकारी स्कूल के टीचर को जितना पेमेंट मिलता है उतने में प्राइवेट स्कूल के सब टीचर का पेमेंट हो जाता हैं।
6. बेटा इज्जत उसी का होता है, जिसके हाथ मे पावर होता है।
7. हमको खुल के बोलने दीजिए क्योकि वादा आपसे बढ़ कर नही हैं।
8. मास्टरजी आपने तो स्कूल का नक्शा ही बदल दिया।
9. असल मे हमारा डरना ही उनकी ताकत है। हम डरना छोड़ देंगे तो वो डराना छोड़ देंगे।
10. चुनाव से पहले चार पांच महीने हम हाथ जोड़ के खड़े होते है बाद में जनता हमारे सामने हाथ जोड़ कर खड़ी रहती हैं।
11. स्कूल में चपरासी नही होने पर तीन ही विकल्प बचते है। पहला स्कूल गन्दा रहने दे। दूसरा शिक्षक जल्दी आकर पूरा स्कूल साफ करें। तीसरा स्कूल स्टाफ व बच्चे मिलकर सफाई करें व सफाई का संस्कार विकसित करें।
12. बच्चों के शरारतें करने पर क्या हेडमास्टर जी आप जज्बात में आकर बच्चे को थप्पड़ मार देंगे?

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