Categories: Articles
| On 3 years ago

Braveheart Soldier of India: Param Vir Chakra Winner Major Shaitan Singh Bhati of Jodhpur.

भारत के अमर सैनिक : परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह भाटी

शोर्यवीरता के लिए विश्वप्रसिद्ध राजस्थान के जोधपुर के छोटे से गाँव बाणासर (जिसे अब शैतान सिंह नगर कहा जाता है) में लेफ्टिनेंट कर्नल श्री हेमसिंह के घर एक जनवरी 1924 को शैतान सिंह जी का जन्म हुआ। आपने मातृभूमि की रक्षार्थ 18 नवम्बर 1962 को अपने प्राणों की आहुति दी। मेजर शैतान सिंह को कुमाऊँ रेजीमेंट में 1 अगस्त 1949 को सेना में कमीशन प्राप्त हुआ था।

दुर्गम क्षेत्र का भीषण युद्ध।

1962 के भारत-चीन युद्ध मे मेजर की पोस्टिंग लद्दाख के चुशुल सेक्टर में थी। मेजर

की यूनिट रजांग ला दर्रे में 17,000 फ़ीट की ऊंचाइयों पर थी। इस क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी मेजर शैतान सिंह जी की थी।

18 नवम्बर को अलसुबह भारतीय सेना ने क्षेत्र में चीनी सेना की हलचल को महसूस किया एवम उनकी हरकतों पर नजर रखना आरम्भ किया। सुबह पों फटने से पूर्व पाँच बजे भारतीय सैनिकों ने मशीन गनो, राइफल्स और मोटरार से ललकारा तो पता चला कि चीनी सेना ने याकों के गले मे लालटेन बांध कर दिग्भर्मित करने का प्रयास किया था।

इसके पश्चात चीनी सैनिकों ने विभिन्न क्रम में लगातार हमले जारी रखे जिसे जाबांज भारतीय सेनाओं

ने इस बहुत करीबी मुकाबले में चीनीयों को खदेड़ना जारी रखा। अत्यंत ठंडे इलाके में भारतीय टुकडियों के पास बहुत कम साजोसामान था। ठंडे इलाको की अभ्यस्त चीनी सेना की तरफ से लगातार हमले हो रहे थे एवम भारतीयों द्वारा निरन्तर उन्हें खदेड़ने व जबाबी आक्रमण किया जा रहा था। निरन्तर व नियमित यह हमले बहुत नजदीकी व खुंरँगेज थे।

मेजर शैतान सिंह इस खतरनाक युद्ध मे भारतीय ट्रूप्स के सैनिकों का हौसला निरन्तर बढाते हुए हमलों के जबाब सुनिश्चित करते रहे व भारतीय सैनिकों के हौसलों को बनाये रखा व दुश्मन को मुहँ तोड़ जबाब दिया। इन पोस्टो के बीच में मूवमेंट

के दौरान उन्हें दुश्मनों की गोलियाँ लग गई। भारतीय सैनिकों ने उन्हें रणक्षेत्र से निकालने की कोशिश की लेकिन दुश्मनों की तीव्र व लगातार फायरिंग को देखते हुए मेजर ने सैनिकों को निकलने का हुक्म दिया।

सैनिकों ने अपने मेजर के आदेश को मानते हुए भारी मन से मेजर को एक शिलाखण्ड के पीछे छोड़ा। इस युद्ध में 123 में से 114 भारतीय सैनिक शहीद हुए। मेजर ने इस शिलाखण्ड की ओट से युद्ध जारी रखा व अंततः इस वीर मेजर ने मातृभूमि की रक्षार्थ अपने प्राणों की आहुति प्रदान की। मेजर ने प्राण त्यागने से पूर्व वीरता व युद्धकौशल का बेजोड़ उदाहरण पेश किया।

बर्फ पिघलने के बाद रेडक्रॉस सोसायटी व भारतीय सेना की खोज में उनका शव अन्य भारतीय सैनिकों के शवों के साथ मिला। इस युद्ध मे भारत ने 114 सैनिक खोए थे लेकिन उन्होंने सैकड़ो चीनी सैनिकों को शिकस्त दी थी। इस क्षेत्र में भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को कदम जमाने नही दिये थे।

शैतान सिंह नगर।

फलौदी, जोधपुर से 19 किलोमीटर दूर इस गाँव मे 4000 की आबादी है। इस गाँव का मूल नाम पहले "बाणासर" था। परमवीर चक्र विजेता शैतान सिंह के नाम पर इसका नामकरण किया गया है।