Career Mantra: It’s better to pick them early to ensure their success.

कॅरियर मंत्र: कक्षा 6 से ही होना पड़ेगा फोकस।

आज हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा सफल हो। उसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए वह शिक्षा पर भारी विनियोग करता है। आज के गलाकाट प्रतिस्पर्धी युग मे सफलता प्राप्त करना बहुत मुश्किल टास्क हो गया हैं।

सफलता हेतु रोडमैप बनाना होगा। हमको बहुत पहले से लक्ष्य निर्धारित करके तदनुसार संसाधनों का विनियोग करना होगा तभी सफलता वरण करेगी। अगर हम कक्षा 6 से ही तैयारी आरम्भ करेंगे तो हम लक्ष्य तक आसानी से पहुँच सकेंगे।

पाँचवी की मार्कशीट को बेस बनाये।

अभी विद्यार्थियों को पाँचवी बोर्ड की परीक्षा देनी होती है। एक बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट को हम अच्छा आधार मान सकते है। अगर विद्यार्थी पाँचवी बोर्ड में सम्मिलित नही हुआ हो भी उसकी मार्कशीट अच्छा आधार है।

चाइना व पाश्चात्य देश “पिक देम अर्ली” प्लान के तहत बहुत छोटी आयु के खिलाड़ियों का चयन करके उनकी गेम विशेष हेतु ट्रेनिग करते है। इसी कारण विश्व खेल जगत में वे बहुत बेहतरीन परफॉर्म कर रहें हैं।

हम पाँचवी के रिजल्ट की स्टडी करे तो विद्यार्थियों बकाया बेसिक रुझान पकड़ सकते है। उनका किस विषय पर बेसिक्स में कैसा कमांड है, यह समझा जा सकता है। हम जब विद्यार्थी की बेसिक क्वालिटी, एप्टीट्यूड को समझ जाते है तो उसके भविष्य का रोडमेप बना सकते है।

शार्पन विच दे हैव।

जब हमको विद्यार्थी की बेसिक रुचि व क्वालिटी समझ मे आ जाती है तो हमको उनकी बेसिक क्षमता को बढाने के लिए विशेष प्रयास आरम्भ कर देने चाहिए। अगर एक विद्यार्थी अँग्रेजी में बहुत अच्छा कर रहा है तो हमको कक्षा 6 से ही जागरूक होकर उसकी अंग्रेजी विषय की काबलियत को निरन्तर बढ़ाना होगा।
अगर हम कक्षा 6 से उसकी अंग्रेजी की कैपेसिटी को बिल्ड अप करेंगे तो निश्चित रूप से उसका इंटरेस्ट भी बढ़ेगा साथ ही उसकी परफॉर्मेंस भी बढ़ने लगेगी। कक्षा 12 तक वह अंग्रेजी विषय मे अपने साथियों से बहुत आगे हो जाएगा। उसका यही एडवांसमेंट ही उसका कॅरियर बिल्ड करेगा।

एवरी सक्सेज इज यूनिक।

कोई भी व्यक्ति अपने खुद के तरीके से ही सफल हो सकता है। सफलता किसी दूसरे को कॉपी करके नही प्राप्त की जा सकती। यह दुनिया इतनी विशाल, उदार व अवसरों से परिपूर्ण है कि हम एक बार किसी भी विषय की जब विशेषज्ञता हासिल कर लेंगे तो सफलता मिल जाएगी।

आज प्रत्येक क्षेत्र में विशेषज्ञता की आवश्यकता है। अगर हमने कक्षा 6 से बच्चे के उसी इंटरेस्ट को प्लान बना कर इम्प्रूव किया है तो कक्षा 12 तक उसकी विशेषज्ञता दिखने लगेगी।

डिग्री इज अ पासपोर्ट फ़ॉर सक्सेज।

कक्षा 12 के परिणामों के आधार पर जब हम बच्चे को डिग्री कॉलेज में एडमिशन दिलवाएंगे तो उसकी बेसिक योग्यता को बड़ा अवसर मिल जाता है। डिग्री लेवल पर व्यक्ति एक ही विषय के अलग-अलग पहलुओं को पढ़ता है।

डिग्री के साथ ही विद्यार्थियों को प्रोफेशनल प्रेक्टिस देना आरम्भ कर देना चाहिए। डिग्री के साथ ही उनको अपने इंटरेस्ट को अपने रोजगार का माध्यम बनाने का अवसर देना आरम्भ कर देना चाहिए।

सुरेन्द्र सिंह चौहान।
suru197@gmail.com

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