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चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जयंती (Chaitra Purnima and Hanuman Jayanti in Hindi)

चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जयंती के दिन समय बहुत अलग और शुभ माना जाता है। यह हर साल बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष, यह 26/27 अप्रैल, 2021 यानी मंगलवार को मनाया जाएगा। चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विधान है। चैत्र पूर्णिमा और जयंती के अवसर पर आपको रामायण का पाठ (पाठ) अवश्य करना चाहिए और भजन और कीर्तन जैसे धार्मिक कार्य भी किए जाते हैं। तो आइये विस्तार में जानते है, चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जयंती के एक हे दिन होने का महत्व।

हनुमान जयंती के बारे में विभिन्न धारणाएं (Different presumptions about Hanuman Jayanti in Hindi) :

हनुमान जयंती के संदर्भ में दो विषय बहुत प्रचलित हैं। पहला यह कि यह जयंती चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। यह दक्षिण भारत के संबंध में है। खासकर दक्षिण भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है।

दूसरी मान्यता के अनुसार यह जयंती कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत में हनुमान जयंती के दिन खूब दान-पुण्य किया जाता है। इसलिए, दोनों मान्यताओं के अनुसार हनुमान जयंती भक्ति भाव से मनाई जाती है।

हनुमान जयंती पर व्रत विधि (Fast method on hanuman Jayanti in Hindi) :

हनुमान जी की पूजा में आपको ब्रह्मचर्य और पवित्रता का बहुत ध्यान रखना चाहिए। जो

लोग व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत रखने से एक रात पहले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए और जमीन पर सोना चाहिए। अपने दैनिक कार्य से निवृत्त होकर ब्रह्ममुहूर्त में प्रात:काल उठकर राम-सीता एवं हनुमान की पूजा करें। आपको हनुमान जी की मूर्ति की पूजा करनी चाहिए। आपको सिंदूर और चोला चढ़ाना चाहिए। आपको प्रसाद के रूप में गुड़, चना और बेसन के लड्डू अवश्य चढ़ाएं।

'हनुमते नमः' मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। इस दिन आपको रामायण और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए और हो सके तो हनुमान चालीसा सुंदरकांड का अखंड पाठ करें। हनुमान जी का जन्मदिन उनके भक्तों के लिए पुण्य का अंतिम दिन है। इस दिन हनुमान जी को तेल और सिंदूर

का भोग लगाया जाता है। हनुमान जी को मोदक बहुत पसंद है इसलिए उन्हें भी मोदक का भोग लगाना चाहिए। हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, बजरंग वध और रामायण का पाठ करने से हमें हनुमान जी की कृपा प्राप्त होगी।

हनुमान के जन्म की कथा (The story of Hanuman's Birth in Hindi) :

हनुमान जी के जन्म के बारे में एक कथा है कि देवी अंजनी और केसरी की कोई संतान नहीं थी। इस बात से परेशान होकर वे मातंग मुनि के पास गए। मुनि के निर्देशानुसार केवल वायु पीकर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वायुदेव ने उन्हें एक लड़के का आशीर्वाद दिया। उसी समय अयोध्या के दशरथ जी भी पुत्र प्राप्ति के लिए अपनी पत्नियों के साथ यज्ञ कर रहे थे।

इस दौरान प्राप्त होने वाले फलों को तीन पत्नियों के बीच बांटा गया था। एक पक्षी इस फल के एक भाग को लेकर उस स्थान पर चला गया जहाँ अंजनी और केसरी पूजा कर रहे थे। चिड़िया ने इस फल का एक अंश अंजनी के हाथ में गिरा दिया। इस फल को खाने से अंजनी गर्भवती हुई और चैत्र शुक्ल नवमी तिथि के दिन वायु देव की कृपा से हनुमान जी का जन्म हुआ।