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दसवें भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Moon in Tenth House in Hindi

दसवें भाव में चन्द्रमा होने से जातक सतोगुणी, परोपकारी एवं करुणा जातक के स्वाभाविक गुण वाला होता है। शान्त प्रकृति और संतोषी होता है। दशम भाव में चन्द्रमा होने से जातक विद्यावान्, प्रकांड पंडित, विद्वान, चतुर, महान् मतिमान् होता है। विषादहीन, प्रसन्नचित्त, सत्कर्म परायण, पवित्रात्मा, धर्मात्मा और दयालु होता है।

दसवें भाव में चन्द्रमा का फल

दसवें भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Moon in 10th House in Hindi)

  • दसवें भाव में चन्द्रमा (Moon in 10th House) होने से जातक सतोगुणी होता है। परोपकार एवं करुणा जातक के स्वाभाविक गुण होते हैं। शान्त प्रकृति और संतोषी होता है। यथालाभ संतुष्ट रहने वाला होता है। विद्यावान्, प्रकांड पंडित, विद्वान, चतुर, महान् मतिमान् होता है। विषादहीन, प्रसन्नचित्त, सत्कर्म परायण, पवित्रात्मा, धर्मात्मा और दयालु होता है।
  • दशम चन्द्रमा वाले जातक शीलवान् और सच्चरित्र होता है। जातक
    मनस्वी, बुद्धिमान् होता है। उसे परिवार में और समाज में आदर मिलता है। वह यशस्वी होता है। यश दूर-दूर तक फैलता है। लोकप्रिय होता है। तत्पर होकर कामों को करनेवाला, लोकहितैषी, और दानशील होता है। पराक्रमी और शौर्य सम्पन्न होता है। सर्वत्र विजय पाता है।
  • दशम भाव की स्थिति में जातक सब कामों को निष्पन्न सम्पादन करनेवाला होता है। जिस काम को हाथ में लेता है इसमें इसे सफलता मिलती है। शुभ कर्म करता है। सत्पुरुषों, सज्जनों के साथ उपकार करनेवाला होता है। शोभायमान लक्ष्मी से युक्त होता है जिससे जातक का व्यक्तित्व चमक उठता है।
  • चन्द्रमा दशम भाव में होने से जातक धनी, लक्ष्मीवान् और धनाढ़्य, होता है। श्वासुरगृह से प्राप्त धन से धनी होता है। राजमान्य होता है। राजा से धन और मान पाता है। राजकुल से धन का लाभ होता है। राज्य से अथवा तत्समान
    धनी-मानी लोगों से भी सुख प्राप्त होता है। राज्याधिकारियों से सम्पर्क रखने वाला एवं उनमें अपना प्रभाव बनाने वाला बनता है। ऊँचे घराने की स्त्रियों से लाभ होता है। वस्त्र और अलंकार युक्त होता है। प्रसिद्ध व्यापारी, ऐसा जातक दरिद्र घर में जन्म लेकर भी अपने बाहुबल से प्रसिद्ध हो जाता है। पिता के सुख एवं सहयोग को प्राप्त करता है। बन्धु-बान्धवों से सुख प्राप्त होता है। पितृभक्त और कुटुम्बवत्सल होता है। अपने परिवार का पालक होता है।
  • चन्द्रमा दसवें घर में होने से व्यक्ति में नवीन-अंगना- अर्थात् नव परिणीता स्त्री के ऐश्वर्य-प्रभुत्व और मान को देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है। नित्य नवीना नगरवासिनी नारियों से रतिसुख मिलता है। स्त्रियों से विलास करनेवाला और कलाओं का जाननेवाला होता है। यौवन में सर्वप्रकार का सुख प्राप्त होता है। नाना प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं-स्त्री-पुत्र आदि से भरपूर होता है।
  • ऐसे जातक को ज्येष्ठपुत्र से पूर्णसुख प्राप्त नहीं होता है अर्थात् जातक और ज्येष्ठपुत्र का परस्पर वैमनस्य (मनमुटाव) रहता है। लोकोपयोगी वस्तुओं के व्यापार से लाभ होता है। वैश्यवृत्ति से व्यापार में धन प्राप्त होता है। स्मरण-रहे कि चन्द्रमा को वैश्य भी माना गया है। सम्पत्ति सदैव एक-सी नहीं रहती - कभी धन से पूर्ण और कभी धन से खाली।

दसवें भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल ( Negative Results of Moon in 10th House in Hindi)

  • दसवें भाव में चन्द्रमा (Moon in 10th House) वाला जातक निर्बल देहवाला होता है। वाल्यावस्था में अल्पसुख मिलता है अर्थात् बचपन कष्टमय व्यतीत होता है। दूषित चन्द्रमा होने से अकर्मण्य होता है। चरराशि में चन्द्र होने से व्यापार में अस्थिरता होती है। मंगल की युति में भारी नुकसान होता है। शनि की युति में चन्द्र होने से व्यवसाय में कठिनाइयाँ आती हैं। 
  • भावेश पर पापग्रह
    की दृष्टि होने से, अथवा पापग्रह साथ में होने से जातक बुरे कामों को करनेवाला होता है। कामों में विघ्न पड़ते हैं-रुकावटें आती हैं।   
  • दशमभाव स्थित चन्द्रमा मेष, कर्क, तुला वा मकर राशि में होने से बचपन में ही माता-पिता का वियोग होता है।
  • इस भाव के चन्द्र से चुनाव में यश मिलता है। नेतृत्व प्राप्त होता है। मेष, कर्क वा मकर में चन्द्र होने से आयु भर स्थिरता बहुत कम मिलती है। नौकरी में हमेशा परिवर्तन होते रहते हैं।      वृश्चिक राशि को छोड़कर अन्य किसी राशि में चन्द्र होने से माता-पिता का सुख नष्ट होता है। यदि इन दोनों में कोई एक जीवित रहे तो परस्पर अच्छे सम्बन्ध नहीं रह सकते।