Categories: Astrology
| On 2 months ago

पहले भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

चंद्रमा संवेदनशीलता और भावनाओं के बारे में है, और संचार पर तीसरे घर के नियम । इस तरह, 3 घर में चंद्रमा होने वाले व्यक्तियों को उनके दिल और दिमाग में क्या है, इसे साझा करने में कोई समस्या नहीं है। तथ्य की बात के रूप में, वे बहुत अधिक खुलापन हो सकता है।

पहले भाव में चन्द्रमा का फल

पहले भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 1st House in Astrology)

  • लग्न के चन्द्र का सामान्य फल, प्रेम, शान्ति, सत्यप्रियता, सत्वशीलता, कलह से घृणा करना आदि है।
  • चन्द्रमा-लग्न में हो
    तो जातक बलवान्, ऐश्वर्यशाली, सुखी, व्यवसायी, गान-वाद्यप्रिय एवं स्थूल शरीरवाला होता है। जातक मे कामशक्ति, पूर्णरूप से रहती है, स्त्रियों द्वारा सम्मान प्राप्त होता है। धनागम के साधन बने रहते हैं और समाज में अधिक प्रतिष्ठा बनी रहती है।
  • जातक पराक्रमी और राजवैभव पानेवाला होता है। चन्द्र लग्न में होने से घूमने-फिरने का शौकीन होता है।
  • जो लोग नीेंद में चलते हैं, बोलते हैं, या ऐसे ही काम करते हैं, उनके लग्न में चन्द्रमा होता है। लग्न का चन्द्रमा पापग्रहों के साथ क्षीण होने से पूर्वोक्त फल अल्पमात्रा में होते हैं।
  • लग्न का चन्द्र अग्नितत्व राशि में होने से जातक का स्वभाव साहसी और महत्वाकांक्षी होता है।
  • लग्न का चन्द्रमा मेष, सिंह और धनु में होने से जातक स्थिर, मितभाषी, और काम करने में निरालस होता है। कामेच्छा थोड़ी होती है।
  • बहुत हलचल पसन्द नहीं करता है। क्रोधी और रूपए-पैसे के विषय में वेफिक्र होता है।

पहले भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 1st House in Astrology)

  • लग्न में चन्द्रमा हो तो मनुष्य जड़ (मूर्ख वा आलसी) और कृतघ्न होता है। लग्न में चन्द्र होने से जातक मिथ्याभाषी होता है।
  • अत: लोगों की दृष्टि में विश्वासपात्र नहीं होता है। लग्न
    में चन्द्रमा होने से जातक मूर्ख, मूक (गूंगा) व्याकुल चित्त वाला, अथवा धूर्त, नेत्रहीन (अंधा) अनुचित कार्य करनेवाला, दूसरों का दास, दुबला-पतला शरीरवाला होता है।
  • सर्दी और कफ जनित रोगों से पीडि़त एवं कृश शरीर रहा करता है। वधिर, व्याकुल हृदय गूँगा तथा विशेषतया दुर्बल देह होता है।
  • व्याधि से, जल से भय प्राप्त होता है। 15 वें वर्ष में बहुत सी यात्राएँ करनी पड़ती हैं। कपटी और बहुत बोलनेवाला वितंडावादी होता है। डरपोक, अस्थिर बुद्धि, विलासी,और धूर्त होता है। स्त्री-वियोग सहना होता है।
  • मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन राशि का होकर लग्न में हो
    तो जातक रोगी, मूर्ख, निर्धन, बलहीन और वधिर होता है। 1,2,4 राशियों को छोड़कर चन्द्रमा लग्न में हो तो पुरुष उन्मत्त अर्थात् अभिमानी (गर्वीला) नीच, बहरा, व्याकुल चित, गूंगा और विशेषत: कृष्ण्वर्ण देहवाला होता है।
  • चन्द्रमा नीचराशि में अथवा पापग्रह के साथ होने से जातक जड़बुद्धि (मूर्ख) अतिदीन, और सदैव धनहीन होता है। मिथुन, सिंह आदि अन्य राशियों में होकर चन्द्रमा लग्न में होने से जातक उन्मत्त (पागल वा घमंडी) नीचवृत्तिका। चन्द्र के साथ पापग्रह होने से जातक अल्पायु होता है।