Categories: Astrology
| On 3 weeks ago

दूसरे भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Moon in 2nd House in Hindi

द्वितीय भाव में चन्द्रमा जातक चंचल स्वभाव, सुखी, यशस्वी, सहनशील, कमल की भाँति कीर्तिमान् तथा चाँद जैसी  सुन्दर होगा। विद्वानों के समाज में सम्मानित होगा। जैसे चन्द्रमा की वृद्धि और हानि नियमित रूप से होती है इसी प्रकार चन्द्रप्रभावान्वित्त व्यक्तियों को भी उतार-चढ़ाव होते हैं।

दूसरे भाव में चन्द्रमा का फल

दूसरे भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 2nd House in Astrology)

  • दूसरे भाव में चन्द्रमा (Chandra in 2nd House) होने
    incontent-ad ampforwp-incontent-ad1">
    से जातक मधुरभाषी, सुन्दर, भोगी, परदेशवासी, सहनशील, शान्तिप्रिय एवं भाग्यवान् होगा
  • जातक दानी, बुद्धिमान्, निधि के सदृश धन से परिपूर्ण, चंचल स्वभाव, सुखी, यशस्वी, सहनशील, कमल की भाँति कीर्तिमान् तथा चाँद जैसी सुन्दर होगा विद्वानों के समाज में सम्मानित होगा
  • द्वितीय भाव में चन्द्रमा के जातक को शरीर से अत्यन्त सुखी होगा बहुत बड़े परिवार वाली होगी। सुखी संतान तथा धन से युक्त होगा मित्र बहुत होंगे। स्त्रियों से अच्छी मदद मिलेगी।
  • जातक को विविध वस्तुओं के संग्रह का
    बहुत शौक होगा। सार्वजनिक हित के कार्यों में भाग लेकर विजयी होगा
  • दूसरे भाव में चन्द्रमा के जातक को विदेश में प्रवास करने से भाग्योदय हो सकता है। सार्वजनिक संस्थाओं के सम्बन्ध से भाग्योदय होगा। शुभग्रहों से सम्बन्ध होने से जातिका बहुत सी भाषाओं की पण्डित तथा विविध विद्याओं की ज्ञाता होगा चन्द्र बलवान् और शुभ सम्बन्धित हो तो सम्पत्ति सुख अच्छा मिलेगा।

दूसरे भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 2nd House in Astrology)

  • द्वितीय भाव में चन्द्रमा (Chandra in 2nd House) के जातक पुरूषों के साथ विलास करेगी अपने कुटुम्ब में प्रेम थोड़ा होगा। जातक की बहिन से अथवा कन्या से धन का नाश होगा।
  • जातक निर्धन और अल्पबुद्धि होगी। वकीलों को बहुत लाभ होगा। धनभाव का चन्द्रमा डाकुओं के लिये भी लाभदायक है। जैसे चन्द्रमा की वृद्धि और हानि नियमित रूप से होती है इसी प्रकार चन्द्रप्रभावान्वित्त व्यक्तियों को भी उतार-चढ़ाव होते हैं।
  • द्वितीय भाव में चन्द्रमा के जातक को संपत्ति की
    स्थिति समुद्र के ज्वारभाटे के समान स्थित्यन्तर होते रहते हैं। चन्द्र से पापग्रह का सम्बन्ध होने से जातिका विद्या से वंचित रहेगी। क्षीण चन्द्रमा होने से जातिका अटक-अटक कर बोलने वाली निर्धन, मलिनात्मा तथा कम अक्ल (मूर्ख) होगी।
  • द्वितीय भाव में चन्द्रमा के जातक के कारक तत्व में आए हुए रोगों का इलाज करके डाक्टर लोग धन-मान, तथा कीर्तिमान प्राप्त करेंगे।