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| On 2 months ago

तीसरे भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

चंद्रमा संवेदनशीलता और भावनाओं के बारे में है, और संचार पर तीसरे घर के नियम । इस तरह, तीसरे घर में चंद्रमा होने वाले व्यक्तियों को उनके दिल और दिमाग में क्या है, इसे साझा करने में कोई समस्या नहीं है।

तीसरे भाव में चन्द्रमा का फल

तीसरे भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 3rd House in Astrology)

  • चन्द्रमा तीसरे स्थान में होने से जातक प्रसन्नचित्त, तपस्वी, आस्तिक, मधुरभाषी, कफरोगी एवं पे्रमी होता है।
  • सहजभाव में स्थित
    चन्द्रमा व्यक्ति को सहोदरों से सुख, अपने पराक्रम से उन्नतिशील और स्वजनों से सुखी रहनेवाला बनाता है।
  • जातक अपने पराक्रम द्वारा द्रव्य लाभ कर पाता है।
  • जातक के प्रताप की उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। अपने भाई बन्धुओं से अधिक सुख मिलता है। जातक की प्रवृत्ति धर्मिक कार्यों में होती है।
  • संसार में इसका आदर सम्मान होता है। जातक अपने वंश में एक मुख्य पुरुष होता है।
  • तीसरे स्थान में चन्द्रमा होने से जातक को भाई-बहिनों का सुख अच्छा मिलता है।
  • दो भाई-और तीन
    बहिनें होती हैं और ये सब नीरोग होते हैं। पड़ोसियों से सम्बन्ध अच्छे रहते हैं। और उनसे लाभ होता है।
  • 28 वें वर्ष के करीब बहुत प्रवास करना होता है। कीर्ति और प्रसिद्धि का आरम्भ होता है, और सत्कृत्य किये जाते हैं।

तीसरे भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 3rd House in Astrology)

  • तीसरे घर में चन्द्रमा भ्राताओं के विषय में अच्छा नहीं है। बहिनों से सुख प्राप्ति कराता है।
  • तृतीय स्थान में चन्द्रमा के साथ रवि होने से बहिनों
    का वैधव्य संभावित है-या तो गृहकलह से संसार-सुख नहीं मिलता, या मृत्यु होती है अथवा बोझ होती हैं।
  • जातक का अनिश्चयी स्वभाव होता है। चुगुलखोर होता है। अजीब तरह की रुचि होती है। जातक को कफ सम्बन्धी रोग अधिकता से होते हैं। वायु - प्रधान शरीर वाला होता है।
  • भाई-बंधुओं को हानि पहुँचाने वाला होता है। स्त्रीसुख के लिए भी तृतीय चन्द्र सामान्य है। तृतीयभाव मे चन्द्रमा होने से जातक कामासक्त रहता है तथा अनेक स्त्रियों का उपभोग करता है किन्तु इतना मधुरभाषी होता है कि चरित्र पर स्पष्टतया सन्देह नहीं किया जाता।
  • तृतीय भाव में चन्द्रमा होने से जातक जीवहिंसक, अल्पसुखवान्, स्वबन्धुपालक, और निर्दयी होता है। घर में गाय-भैंस आदि पशुधन का अभाव रहता है।
  • व्यवसाय में बार-बार परिवर्तन होता है। इस भाव के चन्द्रमा से प्रवास बहुत होते हैं किन्तु इनमें सुखप्राप्ति बहुत थोड़ी होती है।
  • चन्द्रमा पापग्रह की राशि में होने से जातक बहुभाषी अर्थात् निरर्थक बक-बक करनेवाला होता है।