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चौथे भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन | Moon in 4th House in Hindi

चौथे भाव में चन्द्रमा के जातक को माता, स्त्री और संतान का सुख मिलेगा। जातक के अच्छे मित्र होंगे।खानों से अच्छी आमदनी जातक। सुख की उत्तरोत्तर वृद्धि जातक। जीवन का उत्तरार्ध बहुत सुखपूर्ण होगा। माता से विरासत में सम्पत्ति मिलने का योग होगा। चन्द्र से घर, जमीन, खेती आदि विषयों में सुख प्राप्त होगा।

चौथे भाव में चन्द्रमा का फल

चौथे भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 4th House in Astrology)

  • चतुर्थ स्थान में चन्द्रमा (Chandra in 4th House) होने से जातक दानी, मानी, सुखी, उदार, रोगरहित, रागद्वेष वर्जित, कृषक, विवाह के पश्चात् भाग्योदयी, जलजीवी एवं बुद्धिमान् जातक।
  • चौथे भाव में चन्द्रमा के जातक विद्वान, आचारवान् और सुखी जातक। माता, स्त्री और संतान का सुख मिलेगा। जातक के अच्छे मित्र होंगे।
  • जातक लोभी प्रकृति की नहीं जातक। महत्वाकांक्षा और नीरोग रहना इस भाव के चन्द्रमा के विशेष फल हैं। चन्द्रमा चतुर्थभाव में होने से जातक बलवान् प्रतापी भूमिपति (राजा) की भंडारी अर्थात् कोषाध्यक्ष जातक।
  • चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के जातक बांधवों द्वारा राज्य में सर्वदा अधिकारी बनाया जायेगl। चन्द्र से घर, जमीन, खेती आदि विषयों में सुख प्राप्त होगा। नदी-समुद्र आदि में व्यापार द्वारा धन कमायेगी।
  • चन्द्र बलवान् होने से विवाह से धनप्राप्ति-भाग्योदय, और स्टेट मिलने का योग होगा। खानों से अच्छी आमदनी जातक। सुख की उत्तरोत्तर वृद्धि जातक। जीवन का उत्तरार्ध बहुत सुखपूर्ण होगा। माता से विरासत में सम्पत्ति मिलने का योग होगा। माता के कारण भाग्योदय होगा। माता पर भक्ति भी जातक।
  • चौथे भाव में चन्द्रमा के जातक की भक्ति अर्थात प्रेम, देवताओं और ब्राह्मणों में जातक अर्थात् देवताओं और ब्राह्मणों में श्रद्धा रखेगी। पेटैंट दवाइयों का व्यापार, पौउडर, इत्र तेल आदि सुगन्धित वस्तुओं का निर्माण व्यापार लाभदायक हो सकता
    है।
  • चन्द्रमा के पुरुष राशियों में होने से - नया घर बनवाना, माता से सम्पत्ति की प्राप्ति, माता द्वारा भग्योदय, विवाह के बाद भाग्योदय आदि फलों का अनुभव आता है।

चौथे भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 4th House in Astrology)

  • चौथे भाव में चन्द्रमा (Chandra in 4th House) का फल यह है कि वचपन में माता-पिता की मृत्यु हो सकती है और कोई सुख प्राप्ति नहीं होती। यदि माता-पिता जीवित रहे तो उनसे मनमुटाव रहता है। 32 वें वर्ष तक स्थिरता नहीं होती, तदनन्तर भाग्योदय होता है।
    विवाह के बाद कुछ स्थिरता होती है।
  • जातक विद्या के प्रति अरुचि और प्रमाद भाव देता है। मांस-मछली आदि अभक्ष्य पदार्थों को खानेवाला होता है, अतएव सदा बीमार रहता है।जातक की माता रोगग्रस्त रहती है।
  • चौथे भाव में चन्द्रमा जातक परपुरूषरत होती है। सवारी का सुख नहीं होता है। सुख की अभिलाषा बहुत होती है किंतु सुख की प्राप्ति नहीं होती।
  • चन्द्रमा क्षीणकाय और पापग्रहों के साथ युति होने से जातक की माता की मृत्यु जल्दी होती है।