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| On 2 months ago

पांचवें भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

पांचवें भाव में चन्द्रमा के जातक को कई प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करता है। पंचम भाव में चन्द्रमा ऐसे जातक बोलने की चतुरता से अन्यों को ठगकर धन प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति को भूमि का सुख सहज रूप में मिलता है। पांचवें भाव में चन्द्रमा को राजनैतिक कामों में अच्छी सफलता मिलती है। विजयी बनाता है एवं समाज में उसकी गणना सम्मानित जनों में होती है।

पांचवें भाव में चन्द्रमा का फल

पांचवें भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 5th House in Astrology)

  • जब जातक का चन्द्रमा पांचवे भाव (Chandra in 5th House) में हो उसका भाग्य अच्छा होता है एवं वह शुभ कर्म करने वाला होता है।
  • जातक का पंचम भाव का चन्द्रमा जातक का स्वभाव चिन्ता करने वाला बनाता है। चन्द्रमा इस भाव में जातक को कई प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करता है।
  • पंचम भाव का चन्द्रमा हो तो उस व्यक्ति के कन्याएँ होती है एवं पुत्र प्राप्ति में बाधा उत्पन होती हैं । ऐसा जातक रोगी, कामुक, भयजनक मुखवाला होता है। हीनबली तथा शत्रुक्षेत्री होकर यह चन्द्रमा जब पन्चमभाव में हो तो मनुष्य को स्त्रीसुख तो मिलता है किन्तु वह मनुष्य पुत्र सुख से रहित तथा पौत्रसुख से वंचित रहता है।
  • पंचम भाव में स्थित यह चन्द्रमा यदि क्षीणकाय हो अथवा पापग्रहों से युक्त हो तो उसकी कन्या चंचल होती हैं । यदि चन्द्र दूषित हो तो अनिष्ट फल देता है। ऐसा व्यक्ति मलिन चित का एवं कष्टयुक्त होता है। इसी से असफलता, निराशा और मन की अस्थिरता, ये फल मिलते हैं। चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो तो वह व्यक्ति हंँसमुख किन्तु ठगानेवाला होता है। ऐसे जातक बोलने की चतुरता से अन्यों को ठगकर धन प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति को भूमि का सुख सहज रूप में मिलता है। भूमिलाभ भी होता है।
  • रत्नों का लाभ होता है। वस्त्रों से युक्त होता है।
  • व्यापार से, ब्याज पर रुपया उधार देने से, तथा कई एक अन्य प्रकारों से द्रव्यलाभ होता है। उसे राजकुल से भूमि, उत्तम वस्त्र, और धन का लाभ होता है।
  • धन का सुख और नाना विधि सुख प्राप्त होता है। वैभव और आनन्द से युक्त होता है।
  • चौपाए जानवारों दूध देनेवाले गाय-भैंस आदि से लाभ होता है। गाय-भैंस आदि दूध देनेवाले पशुओं की समृद्धि से, दूध के व्यापार से भारी लाभ होता है।
  • जातक राजमन्त्री होता है अर्थात वह ऊँचे सरकारी पद पर कार्य करता है। यदि पूर्ण बलवान् होकर चन्द्रमा पंचम भाव
    में हो तो मनुष्य सुखी होता है। किसी दूसरे का निग्रह करने में समर्थ होता है। राजनैतिक कामों में अच्छी सफलता मिलती है। विजयी बनाता है एवं समाज में उसकी गणना सम्मानित जनों में होती है।
  • ऐसा जातक चंचल, सदाचारी, एवं क्षमाशील होता है।
  • जातक डरपोक होता है। अनेक प्रकार की कला और गुणों से सुयक्त करता है। सब कामों में सावधान रहनेवाला और शुभ आचरण वाला होता है। वुद्धि निर्मल होती है। विद्या हृदयग्राहिणी होती है। ऐसा जातक उत्तम विद्वान् होता है। वह तेजस्वी, मेधावी एवं विनम्र स्वभाव वाला होता है। ऐसे व्यक्ति जितेन्द्रिय, सत्यवक्ता, प्रसन्न रहनेवाला, संग्रह करनेवाला, तथा सुशील होते है तथा ज्ञानवान राजयोगी होता है।
  • जब चन्द्रमा पंचम भाव में हो जातक पुत्र-सन्ततियुक्त होता हैं एवं उसकी सन्तानों में पुत्रियां अधिक होती हैं। निश्चय ही उसे उत्तम सन्तान का सुख प्राप्त होता है। सन्तान उत्तमकोटि की होती है। जातक के सुशील मित्र होते हैं। जातक को कन्याएं होती हैं, एक पुत्र भी होता है। स्त्री और बच्चे बहुत प्यारे होते हैं। चन्द्र प्रसवराशि में हो तो काफी संतति होती है। बलवान हो तो सन्तान भाग्यशाली होती है।
  • ऐसे जातक को अलंकारों से युक्त स्त्री का सुख प्राप्त होता है। उसकी स्त्री पतिवशवर्तिनी और पतिपरायण होती
    है। उसकी स्त्री रूप-लावण्यवती होती है। वह कभी-कभी यह क्रोधित भी हो जाती है अर्थात् मानलीला में कोप करने का नाटक करती है। चन्द्रमा का पंचम स्थान स्त्री स्थान का लाभ का स्थान है। इस लिए यहाँ चन्द्र हो तो स्त्री से लाभ और भाग्योदय होता है। इसके घर में दो स्त्रियाँ होती हैं, अर्थात् यह दो स्त्रियों का पति होता है। स्त्री देवता-चण्डी-दुर्गा आदि की उपासना करने से मनोवंछित पदार्थो की प्राप्ति होती है। अर्थात् चन्द्रमा स्त्री-ग्रह है। अत: स्त्री जाति के देवता शीघ्र वरदायक हो जाते है।
  • जातक के जन्म देते समय इसकी माता को भारी कष्ट उठाना पड़ता है । उपर वर्णित शुभफल का अनुभव चन्द्र के पुरुष राशियों में होने पर अधिक होगा। चन्द्र बलवान् हो तो सट्टा और जुआ से बहुत लाभ होता है। वृष, कन्या, मकर राशियों में चन्द्र हो तो कन्याओं का आधिक्य होता है, पुत्र सन्तान देरी से होती है। मिथुन, तुला, कुम्भ राशियों में चन्द्र के होने से पुत्र-सन्तति का होना मुश्किल होता है। प्राय: कन्याएँ होती हैं। पुत्र नहीं होता है।
  • जब पंचमभाव से संतति का विचार किया जावे तो पति-पत्नी दोनों की कुंडलियों का विचार एकसाथ करना चाहिए, क्योंकि कई बार केवल पति की कुण्डली से बताया गया फल अनुभव में
    नहीं आता। मिथुन, तुला, कुम्भ में चन्द्र हो तो मनुष्य बहुत थोड़ा बोलता है परन्तु काम अधिक करता है।

पांचवें भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 5th House in Astrology)

  • जब पंचम भाव का चन्द्रमा (Chandra in 5th House) हो तो कन्याएँ होती है। पुत्र नहीं होते।
  • ऐसा जातक रोगी, कामुक, भयजनक मुखवाला होता है।
  • यदि हीनबली तथा शत्रुक्षेत्री होकर यह चन्द्र पन्चमभाव में हो तो मनुष्य को स्त्रीसुख तो मिलता है किन्तु यह मनुष्य पुत्रसुख रहित तथा पौत्रसुख से वंचित रहता है।
  • पंचमभाव स्थित यह चन्द्रमा यदि क्षीणकाय हो अथवा पापग्रहों से युक्त हो तो कन्या चंचल होती। चन्द्र दूषित हो तो अनिष्ट फल देता है।
  • ऐसा व्यक्ति मलिन चित का, और कष्टयुक्त होता है। इसी से असफलता, निराशा और मन की अस्थिरता, ये फल मिलते हैं।
  • चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो तो वह व्यक्ति हंँसमुख किन्तु ठगानेवाला होता है। बोलने की चतुरता से आप्तों को ठगकर धन प्राप्त करता है।