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| On 2 months ago

छठे भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

ज्योतिष ज्ञान के अनुसार चन्द्रमा का छठे भाव में शुभ फल की तुलना में अशुभ फल ज्यादा प्रतीत होते हैं। ऐसे जातक का स्वास्थ्य कमजोर रहता हैं एवं उसे अधिक संघर्ष करना पड़ता हैं।

छठे भाव में चन्द्रमा का फल

छठे भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 6th House in Astrology)

  • छठे भाव में चन्द्रमा (Moon in 6th House) के शुभ फल बहुत कम मिलते हैं। जातक के स्वभाव में उदारता रहती है।
  • षष्ठ भाव में चन्द्रमा जातक को राजद्रोही बनाता है किन्तु यह राजद्रोह जनहित में न्याय-प्राप्ति के लिए होता है इसलिये समाज में सम्मान दिलाता है एव माँ के प्रति निष्ठा नहीं रहती।
  • छठे भाव में जातक मातृभक्त नहीं होता है अर्थात् जातक का मन जन्मदात्री माता की ओर से मलिन रहता है।
  • षष्ठ भाव में चंद्र में चन्द्रमा होने से चाहे कितने
    ही प्रबल शत्रु हों जातक उन पर अपने प्रताप से अधिकार जमा लेता है। शत्रु मुंह की खाकर इसके आगे नतमस्तक हो जाते हैं। बन्धुओं के साथ झगड़ा होता है, राजा से (सरकार से) तथा चोरों से कष्ट रहता है। स्त्रियों से दु:ख पहुँचता है। नौकरी में सफलता मिलती हैं।   
  • चन्द्रमा पुरुषराशियों में होने से उपर दिये अच्छे फल अधिक मिलते हैं। चन्द्र शुभ होने से छोटे-मोटे फायदे होते हैं।

छठे भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 6th House in Astrology)

  • षष्ठ भाव में चन्द्रमा Moon in 6th House) के जातक को नौकरों से बहुत तकलीफ होती हैें वे कायम नहीं रह सकते। छठेभाव में चन्द्रमा से शरीर सौख्य अच्छा नहीं मिलता। इससे रोग बढ़ते हैं।
  • छठे भाव में चन्द्रमा होने से उदर के रोगों से पीड़ा रहती है। "षष्ठे नर उरभवै: रोगै: संपीडि़तोभवति।" जातक कफरोगी होता है। आँखों की बीमारी होती है।
  • शत्रुओं से भय और जल तत्व से सम्बन्धित रोग करता है। चन्द्रमा अपनी दशा अन्तर्दशा काल में मारक बनता है अथवा मरणतुल्य कष्ट दिया करता है।    
  • षष्ठ भाव में चन्द्रमा क्षीणकाय होने से जातक अल्पायु होता है।  "राजनीकरेस्वल्पायु: षष्ठगते भवति संक्षीणे।"