Categories: Astrology
| On 2 months ago

आठवें भाव में चन्द्रमा का फल | स्वास्थ्य, करियर और धन

आठवें भाव में चन्द्रमा के जातक दानी, विनोदशील और विद्वान् होता है। धर्म और शास्त्रों का प्रेमी, अध्यात्मज्ञानी, योगी, कल्पनाशक्ति से युक्त होता है।पापग्रह से युक्त होने से ये लाभ नहीं होते। मेष, सिंह, धनु राशियों में अष्टमभाव का चन्द्र होने से किसी न किसी मार्ग से धन मिलता है। अष्टमभाव में चन्द्रमा विवाह के कारण बन्धुओं का त्याग करना पड़ता है। दुर्जनों द्वारा पीडि़त होता है।

आठवें भाव में चन्द्रमा का फल

आठवें भाव में चन्द्रमा का शुभ फल (Positive Results of Chandra in 8th House in Astrology)

  • आठवें भाव में चन्द्रमा (Chandra in 8th House) के जातक स्वाभिमानी होता है। बुद्धिमान् और तेजस्वी होता है। दानी, विनोदशील और विद्वान् होता है। धर्म और शास्त्रों का प्रेमी, अध्यात्मज्ञानी, योगी, कल्पनाशक्ति से युक्त होता है।
  • आठवें स्थान का चन्द्रमा
    incontent-ad ampforwp-incontent-ad1">
    व्यापार से लाभ कराता है। मृत्युपत्र द्वारा अथवा वारिस के अधिकार से अथवा विवाह के द्वारा विशेष लाभ होता है।
  • चन्द्र उच्च का, अथवा स्वगृह में होने से ये लाभ होते हैं। पापग्रह से युक्त होने से ये लाभ नहीं होते। मेष, सिंह, धनु राशियों में अष्टमभाव का चन्द्र होने से किसी किसी मार्ग से धन मिलता है। कर्क, वृश्चिक, धनु वा मीन लग्न हो, लग्न से चन्द्रमा अष्टमभाव में होने से जातक योगाभ्यासी, उपासक वा वेदान्ती होता है।    
  • अष्टमभाव में चन्द्रमा के स्त्री राशि में चन्द्र होने से जातक के घर की गुप्त बातें नौकरों से बाहर निकल जाती है। आयु का 44 वाँ वर्ष सम्पत्ति नाशक होता है।

आठवें भाव में चन्द्रमा का अशुभ फल (Negative Results of Chandra in 8th House in Astrology)

  • आठवें भाव का चन्द्रमा (Chandra in 8th House) कष्टकारी होता है। जातक वाचाल, सन्देहशील, आत्माभिमानी, उद्विग्न, चिन्तायुक्त, एवं ईर्ष्यालु होता है। जातक क्रोधी, कामी, विकारग्रस्त, प्रमेहरोगी होता है। स्थिरबुद्धि नहीं होता है। चित्त उद्वेग के कारण व्याकुल रहता है। बन्धन से दुखी होता है। दुराग्रही, निर्दय और दीन, कष्टयुक्त-प्रगल्भ, और पापी होता है। देशत्याग करदेने वाला और दयाहीन होता है। राजा और चोरों से संत्रास और भय होता है। युद्ध करने के लिए उत्सुक रहता है। महारोगों का भय, अर्थात् साध्य या असाध्य राजरोगों का भय लगा रहता है।
  • अष्टमभाव में चन्द्रमा के जातक शरीर से रोगी रहता है। जल तत्व प्रधान होने के कारण कफ व्याधियों से ग्रस्त रखता है। शरीर में वायुप्रधान रोग होते हैं। जातक के घर में उत्तमोत्तम अनुभवी डाक्टरों, वैद्यों या हकीमों का
    आना जाना बना रहता है। शत्रुमूलक बड़ी-बड़ी व्याधियाँ, भय और आपत्तियाँ सदैव लगी रहती हैं।
  • अष्टमभाव में चन्द्रमा स्वगृही हो, शुक्र वा गुरु के घर में हो अथवा बुध की राशि में हो, और स्वयं पूर्णवलवान होने से जातक को श्वास-कास आदि नानाविध दु: होते हैं और सदा दु:खी रहता है। "वारिभूता महाव्याधय:" अर्थात् जलोदर आदि जलजन्य (जल तत्व सम्बन्धित) रोग होने की सम्भावना रहती है। नेत्रों के रोग होते हैं शीतज्वर की पीड़ा होती है।
  • अपान विकार (गैस्टिक ट्रबल) होने की सम्भावना रहती है।क्षण-क्षण में मूर्छा रोग होता है। 'वारिभूता भीतय:' अर्थात् जल में डूबकर मर जाने का भय भी होता है। तालाब, कुएँ आदि में डूबकर मर जाने का भय रहता है। जल से भय और अपान विकार (गैस्टिक ट्रबल) एवं जल तत्व सम्बन्धित रोग होने की सम्भावना
    रहती है। बलवान् शत्रु आक्रमण करें - ऐसा सन्देह भी बना रहता है।
  • आठवें भाव में चन्द्रमा के जातक बेकार घूमनेवाला होता है। वाहनसुख थोड़ा मिलता है। विवाह के कारण बन्धुओं का त्याग करना पड़ता है। दुर्जनों द्वारा पीडि़त होता है। देश त्याग करना पड़ता है। चन्द्र पापगृह में अथवा पापग्रह से युक्त हो तब तो अशुभफल निश्चय से मिलते हैं।    
  • अष्टमभाव में चन्द्रमा पापी ग्रह भी राशि में होने से जातक अल्पायु: होता है। शुक्ल पक्ष में रात्रि में जन्म होने से आठवें स्थान में स्थित चन्द्रमा माता के समान रक्षा करता है। चन्द्रमा स्वक्षेत्र (कर्क) में हो, या अपने उच्चस्थान वृष में होने से जातक दीर्घायु होता है।