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भारत के चार धाम (Char Dham Name List in Hindi)

भारत में विभिन्न धर्म और सम्प्रदाय के लोग रहते है। इन धर्मो में हिंदू धर्म सबसे प्राचीन और सनातन धर्म माना जाता है। भारत में सबसे अधिक लोग हिंदू धर्म को मानने वाले लोग रहते है। हमारे भारत देश में कई प्रकार के सिद्ध तीर्थ स्थल मौजूद है जिनकी महिमा का वर्णन हमारे वेदो और पुराणो किया गया है l भारतीय परम्परा में तीर्थ स्थल वे माने जाते है जो भगवान के किसी अवतार के चरण रज से पवित्र हो या जहा पर किसी ऋषि मुनि ने तपस्या की हो l  

रामेश्वरम धाम यात्रा

भारत में बहुत सारे तीर्थ स्थल और मंदिर है। जिनमे से भारत के चारधाम (Char Dham) की यात्रा को विशेष मान्यता प्राप्त है। हिंदू शास्त्रों की मान्यता है कि जो व्यक्ति चार धामों की यात्रा कर लेता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। उसे सीधे वैकुण्ठ की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म के आचार्यो के अनुसार व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार तो चार धाम की यात्रा अवश्य ही करनी चाहिए।

ये चार धाम (Char Dham) चार दिशा, चार पदार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, चार पुरुषार्थ, चार मुक्ति, चार युग और चार अवस्था के प्रतीक है l 

भारत के चार धाम के नाम (Char Dham of India in Hindi) :

• उड़ीसा – जगन्नाथ पुरी मंदिर (पूर्व में)

• गुजरात – द्वारकाधीश मंदिर (पश्चिम में)

• उत्तराखंड – बद्रीनाथ मंदिर (उत्तर में)

• तमिलनाडु – रामेश्वर मंदिर ( दक्षिण में)

1) बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड

बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे हिमालय पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के विख्यात मंदिरो में से एक है। कहा जाता है कि

भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण यहां ध्यान में बैठ गए थे, उन्हे यह पता नहीं था कि यहां पर बर्फ गिरती है। तब उनकी बर्फ से रक्षा के लिए माता लक्ष्मी ने स्वयं बद्री (बेरी ) का पेड़ बनकर उनकी ठण्ड और बर्फ से रक्षा की थी l 

इसकी स्थापन 9वीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी। यहा पर भगवन विष्णु की मूर्ति शालिग्राम शिला से बनी है जिनके साथ लक्ष्मी, नर और नारायण, नारद, उद्धव, और कुबेर की भी पूजा होती है l बद्रीनाथ मंदिर सतयुग में बना हुआ है । यहाँ पर दो कुंड है एक तप्त कुंड जिसमे से गर्म पानी निकलता है और दूसरा शीतल कुंड इसमें ठंडा  पानी मिलता है l इस मंदिर को भूवैकुण्ठ अर्थात धरती का वैकुण्ठ कहा जाता है l 

हिमालय पर्वत पर स्थित होने के कारण इस मंदिर के कपाट/दरवाजे  6 महीने बंद रहते है। शेष 6 महीने की मंदिर खुला रहता है । कार्तिक मास में दीपावली के बाद मंदिर के कपाट बंद होते है। इसी मंदिर से ही चार धाम की यात्रा शुरू होती है ऐसी मान्यता है कि यह पर भगवान् विष्णु ध्यान करते है l ऐसी मान्यता है की यहाँ पर 6 महीने मनुष्य और 6 महीने देवता सेवा करते है l 

बद्रीनाथ मंदिर के बारे में और विस्तार में पढ़ने के लिए जाये, बद्रीनाथ धाम यात्रा

2) जगन्नाथ पुरी मंदिर, उड़ीसा

भारत के पूर्व में स्थित उड़ीसा में भगवान विष्णु के आठवे अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित जगन्नाथ पुरी मंदिर चार धामों में से एक है। जगन्नाथ का अर्थ सम्पूर्ण जगत का नाथ अर्थात स्वामी होता है। यह वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। यह

कलयुग में बना चार धाम में से एक मंदिर माना जाता है l इस मंदिर में भगवlन श्री कृष्ण की लकड़ी की प्रतिमा स्थापित है जिसे हर 12 वर्ष बाद नई बनाकर बदली जाती है l 

इस मंदिर में मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा की जाती है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ अर्थात श्री कृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम, और बहन सुभद्रा जी की मूर्ति गर्भ गृह में स्तिथ  है। इस मंदिर में प्रति वर्ष आषाढ़ द्वितीया को भव्य रथयात्रा का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया जाता है। जिसमे हजारों लोग शामिल होते है। इस मंदिर में भगवान को चावल का भोग लगाया जाता है जिसकी विशेष मान्यता है l 

इस मंदिर में लगने वाली विशालकाय धव्जा को प्रतिदिन बदला जाता है l मुख्य मंदिर के आस पास बहुत सारे देवी देवताओ के मंदिर स्तिथ है l यह मंदिर समुद्र के किनारे स्तिथ है l सबसे ख़ास बात यह है की यहाँ भगवान की अधूरी मूर्तियों की पूजा की जाती है l इस मंदिर की ध्वजा हवा के विपरीत दिशा में लहराती है जो की विज्ञान के नियम के बुल्कुल उलटी है l इस मंदिर लगा नीलचक्र किसी भी दिशा से देखने पर सामने दिखाई देता है l इस मंदिर की रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई है जहा पर हमेशा एक मात्रा में ही भोजन बनता है लेकिन आश्चर्य की बात यह कि आज तक न तो भोजन कम पड़ा और न ही ज्यादा हुआ l 

जगन्नाथ पुरी मंदिर के बारे में और विस्तार में पढ़ने के लिए जाये, जगन्नाथ पुरी धाम यात्रा

3) रामेश्वर मंदिर, तमिल नाडु

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के किनारे भारत का तीसरा धाम

रामेश्वर मंदिर स्थित है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर त्रेता युग में बना है तथा इस मंदिर के बनने के पीछे यह कथा प्रचलित है कि जब भगवान् श्री राम सीता माता को  लंका से लाने के लिए प्रस्थान कर रहे थे उस समय अपने कार्य की सफलता के लिए उन्होंने शिव लिंग की स्थापना की थी वही शिवलिंग आगे चलकर रामेश्वर के नाम से विख्यात हुई | रामेश्वर का शाब्दिक अर्थ है राम के ईश्वर l 

इस मंदिर में भक्त दूर दूर से पैदल चल कर कावड़ में गंगाजल भरकर भगवान् शिव का अभिषेक करते है और उनसे अपनी  मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करते है l इसी मंदिर के आगे सेतु समुंद्रम स्तिथ है जो सेतु भगवान श्री राम ने लंका विजय अभियान के समय बनवाया था l शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों में भी इस मंदिर की गणना की जाती है l   

रामेश्वर मंदिर के बारे में और विस्तार में पढ़ने के लिए जाये, रामेश्वरम धाम यात्रा

4) द्वारकाधीश मंदिर, गुजरात

यह मंदिर गुजरात के पश्चिमी समुद्री तट पर स्थित है। यह द्वापर युग में बना भगवान् द्वारकाधीश जी मंदिर है l द्वारकाधीश भगवान् श्री कृष्ण का ही दूसरा नाम है l द्वारिका को भगवान श्री कृष्ण की राजधानी मानी जाती हैl  यहा पर श्री कृष्ण के साथ राधा के स्थान पर रुक्मिणी की पूजा की जाती है l यह मंदिर द्वापर युग में बना चार धामों में से एक धाम है l इस मंदिर की ख़ास बात यह है कि इस मंदिर पर लगने वाली धव्जा बहुत बड़ी होती है जिसको दिन में पुरे तीन बार बदला जाता है l 

यहाँ भगवान श्री कृष्ण की काले रंग कि

चतुर्भुजी मनमोहक प्रतिमा है l ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में यहा भगवान् श्री कृष्ण यही पर अपने परिवारजनो और 16108 रानियों के साथ निवास करते थे जहा द्वारिकाधीशजी का मंदिर है वहा पर उनका महल हुआ करता था शेष द्वारिका उनके स्वधाम जाने के बाद समुद्र में डूब गयी थी जिसके अवशेष आज भी समुद्र में पाए जाते है l इसी मंदिर के पास गोमती कुंड है जहा पर श्रद्धालु स्नान करते है l ऐसी मान्यता है की यह भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करने से जन्म जन्मांतर में किये गए पापो से मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है l 

ये था सारांश विवरण चार धाम, उनकी स्तिथि और महत्व के बारे में जो बहुत के रोचक और भारतीय प्राचीन परम्पराओ का सार है l इन चार धामों की यात्रा वाकई अपने आप में बहुत रोमांचक और अद्वितीय है l 

द्वारकाधीश मंदिर के बारे में और विस्तार में पढ़ने के लिए जाये, द्वारिका धाम यात्रा

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