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चिकनगुनिया का इलाज व घरेलू उपचार (Chikungunya Treatment in Hindi)

चिकनगुनिया का इलाज व घरेलू उपचार - यह एक वायरल संक्रमण होता है। इस लेख में Chikungunya Treatment जो एडीज व इजिप्ती और एडीस एल्बोपिक्टस नाम के मच्छर के काटने से फैलता है चिकनगुनिया दुनिया भर में पाया जाता है, विशेष रूप से Africa (अफ्रीका), Asia (एशिया), और India (भारत) में पाया जाता है इसके लक्षण संक्रमण के एक सप्ताह के अंदर दिखाई देते हैं. बुखार और जोड़ों में अचानक दर्द होता है मांसपेशियों में दर्द, सरदर्द , थकान, और दाने भी हो सकते हैं कई लोगों में Chikungunya (चिकनगुनिया) का असर कम हो जाने के बाद एक सप्ताह के अंदर बेहतर महसूस होने लगता है।

विश्व में सबसे पहले चिकनगुनिया सन 1995 में दक्षिण तंजानिया में पाया गया था। इसके बाद पुरे विश्व में चिकनगुनिया फैलने लगा। भारत में 2010 में चिकनगुनिया का वायरस दिल्ली में देखा गया था। तथा कुछ साल के पश्चात 2016 एक बार फिर चिकनगुनिया लोगो पर हावी होता गया Chikungunya (चिकनगुनिया) मानसून के मौसम के दौरान आम तौर पर होने वाली कुछ बीमारियों में से एक है। यह बीमारी मनुष्यों में मच्छरों के काटने के कारण होती है।

Chikungunya (चिकनगुनिया) संक्रमित मच्छरो के काटने से मनुष्यो में फैलता है। जिससे उनके शरीर में बुखार एव जोड़ो में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह संक्रमित रोग कुछ दिनों के लिए रहता है।

बहुत कम मामलो में किसी व्यक्ति की मृत्यु चिकनगुनिया रोग से हो जाती है। चिकिस्तक के अनुसार इसके लक्षण लंबे समय तक रहते है। और शरीर को कमजोर बनाते रहते है।

चिकनगुनिया से बचने के उपाय (Prevention of Chikungunya in Hindi) :

  • गिलोय का रस दिन में 2-2 पीना चाहिए
  • पपीते के पत्तों का रस पीना चाहिए
  • भोजन में प्रोटीनयुक्त आहार को सम्मिलित करना
  • नारियल पानी पीना चाहिए
  • अनार खाना चाहिए
  • हरी सब्जियाँ
  • दूध
  • गर्म पानी का प्रयोग
  • ज्यादा आराम करें
  • तुलसी के पत्ते खाने चाहिए
  • तुलसी के पत्तों से उसका काढ़ा बनाकर पीना चाहिए
  • योग और प्राणायाम करने चाहिए जिनमे:-
    • कपालभाति
    • उज्जाई
    • अनुलोम-विलोम
  • कामकाज में इस्तेमाल होने वाला पानी ढक कर रखें
  • एंटी बैक्टीरिया और डेटॉल का छिड़काव करना चाहिए
  • शरीर को ढक कर रखें
  • साफ़ - सफाई रखें
  • बरसात के मौसम में ध्यान रखें

चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं? (Chikungunya Symptoms in Hindi) :

  • हाथों और पैरों में चकत्ते(निशान) बन जाते हैं।
  • जोड़ो में दर्द होने लगता है
  • कमजोरी आ जाना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • सिरदर्द
  • थकान महसूस होना
  • पीठ दर्द
  • आँखों में दर्द/ जल;जलन
  • अनिद्रा
  • गले में खराश होना

कैसे पता चलेगा कि मुझे चिकनगुनिया है कि नहीं? (How to Diagnose Chikungunya in Hindi?) :

  • Chikungunya (चिकनगुनिया) शरीर  मे आने के बाद 2-4 दिन में फैलता है
  • Chikungunya (चिकनगुनिया) में 39 (102.2)डिग्री तक बुख़ार हो जाता है
  • सिर और हाथ पैरों पर चकत्ते (लाल निशान बन जाते हैं )
  • पुरे शरीर में दर्द होता है खासतौर पर जोड़ों और मांसपेशियों में
  • सरदर्द होता है
  • आँखों में दर्द रहता है (रोशनी से डर लगने लगता है )
  • नींद नहीं आना
  • कमजोरी आना

चिकनगुनिया का इलाज व घरेलू उपचार (Chikungunya Treatment in Hindi) :

Chikungunya (चिकनगुनिया) के विरूद्ध बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के संपर्क मे आने से बचना है उन दवाओं का प्रयोग करना जिनसे मच्छर दूर भाग जाते है Odomos (ओडोमोस) लम्बी बाँहों के कपड़े पहनना, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती उपयोग में लेना, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना आदि सावधानियाँ रखनी चाहिये

चिकनगुनिया का इलाज व घरेलू उपचार :

  • तुलसी की पत्तियां - Chikungunya (चिकनगुनिया) में तुलसी के पत्ते अधिक फायदेमंद साबित होते हैं इससे डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर की समस्या से बचा जा सकता है
  • लहसुन - 10-12 लहसुन की कलियों का प्रतिदिन सेवन करना
  • गिलोय - गिलोय में (एंटी-इंफ्लेमेटरी), (एंटी-अर्थराइटिस) और (इम्यूनोमॉड्यूलेटरी) गुण पाए जाते हैं जो Chikungunya (चिकनगुनिया) से लड़ने में मदद करते है
  • शहद व नींबू - शहद में एंटी-बैक्टीरियल व एंटी-माइक्रोबियल गुणपाए जाते हैं, जो Chikungunya (चिकनगुनिया) व संक्रमण संबंधी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं नींबू में विटामिन-सी होता है, जो एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है।
  • पपीते के पत्ते - पपीते के पत्तों में लार्विसाइड गुण होता है, जो चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों से मुकाबला कर सकता है
  • नारियल पानी - इसमें हेपेटोप्रोटेक्टिव और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव मददगार होते हैं, जिससे बीमारी से उबरने में आसानी होती है इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जिससे जोड़ों के दर्द को कम होता है
  • हल्दी - हल्दी के करक्यूमिन में कई संक्रमण संबंधी बीमारियों से लड़ने के खिलाफ एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं,
  • लालमिर्च - लालमिर्च में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो सूजन को कम, दर्द को कम करने के लिए घरेलू उपचार के तौर पर काम में ली जाती है
  • अंगूर - इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट व एंटीवायरल जैसे कई गुण होते हैं,
  • गाजर - गाजर में अल्फा और बीटा-कैरोटीन होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
  • बर्फ की सिकाई - जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या होती है। ऐसे में बर्फ की सिकाई करने से आराम मिलता है। बर्फ की सिकाई से रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है।
  • तेल की मालिश - तेल को गर्म करके लगाना जिसमें अरंडी के तेल से मालिश करना एक अच्छा उपाय साबित होता है।
  • दवाई - चिकनगुनिया Treatment बुखार का इलाज और दर्द को कम करने के लिए एसिटामिनोफेन या पेरासिटामोल दवाई लेना
  • तरल पदार्थ - चिकनगुनिया में अधिक तरल पदार्थ का उपयोग करना इससे शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सकता है।

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चिकनगुनिया फैलता कैसे है? (How Chikungunya Spreads From One to Another in Hindi?) :

चिकनगुनिया एक संक्रमण बीमारी है। जो संक्रमित मच्छरों से मनुष्यों में फैलती है। चिकनगुनिया (CHIKV) के कारण होता है। चिकनगुनिया मच्छर के काटने के बाद, बीमारी की शुरुआत 4-8 दिनों के बाद होती है। चिकनगुनिया में बुखार की अचानक शुरुआत होती है, जो जोड़ों के दर्द के साथ होती है। जोड़ों का दर्द दुर्बल करने वाला होता है। यह कुछ दिनों तक रहता है, लेकिन कभी -कभी हफ्तों, महीनों या सालों तक भी बढ़ सकता है। चिकनगुनिया तीव्र, सूक्ष्म या पुरानी बीमारी का कारण बन सकता है। चिकनगुनिया में मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में सूजन, सिरदर्द, मतली, थकान और दाने शामिल होते हैं।