Child Rights: Every child is entitled to these 5 rights.

बाल अधिकार: हर बच्चे का हक बनता है इन 5 अधिकारों पर।

मनुष्य जीवन अत्यंत सुंदर व सुखद है आवश्यकता उसे भली भांति से आकार देने की है। एक छोटे से बच्चे के निम्न अधिकार आवश्यक रूप से सुरक्षित रखे जाने चाहिए ताकि उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास हो सके एवम वे अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल मानवता व राष्ट्र के हित मे कर सकें।

आशा

हर बच्चे की असली ताकत उसकी कोमल सम्वेदनाएँ एवम उसके मन मे पल्लवित आशाएं है। वह जीवन भर इन आशाओं का पीछा करता है एवम इन्ही के दम पर सफलता के परचम लहराता है।
एक बच्चे के दिल मे आशाएं बनी रहे ताकि वह सकारात्मक जीवन जी सके इस हेतु परिवार, समाज व विद्यालय को बेहद सजग रहकर उनसे व्यवहार करना चाहिए एवम उनकी छोटी छोटी आशाओं को पूरा करने का निरन्तर प्रयास करना चाहिए।
एक बच्चा आशा करता है कि उसे प्यार-दुलार के साथ ही सम्मान भी मिले अतः उसकी बात को सुना-समझा जाना चाहिए एवम उसकी आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए।

स्वास्थ्य।

अत्यंत पुरानी कहावत है कि स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। एक बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर सजगता बहुत जरूरी है। जबकि स्तिथी बहुत विपरीत है आज विकासशील व्यवस्था की प्रमुख समस्या कुपोषण एवम एनिमिया रोग है।इनके चलते करोड़ो बच्चे अपनी क्षमताओं का उपयोग नही कर पा रहे है।

यह आवश्यक है कि हम राष्ट्रीय व राज्यीय बजट में इस क्रम में सम्पूर्ण प्रावधान करे एवम इन प्रावधानों की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करे।स्कूल, परिवार व समाज मिलकर देश के नोनिहालों के बेहतर स्वास्थ्य हेतु प्रयास करे।

सुरक्षा।

विभिन्न कानूनों के बावजूद भी बच्चों का शोषण जारी है। बच्चों के शोषण के विभत्स व दिल दहलाने देने वाले उदाहरणों के अतिरिक्त उनसे मजदुरी करवाना एक सामान्य सी बात मानी जाती है। जिस उम्र में उनके विकास हेतु खेलना-कूदना आवश्यक है उस उम्र में इनका अस्वास्थ्यकर स्तिथियों में उनसे कठोर श्रम करवाना गम्भीर राष्ट्रीय चिंता है।
यह आवश्यक है कि अगर हम एक सभ्य समाज की कामना रखते है तो आज के बच्चों हेतु एक सम्पूर्ण सुरक्षा चक्र उन्हें उपलब्ध करवाए।

शिक्षा

निश्चित रूप से स्वंत्रता मिलने के पश्चात हमने औपचारिक शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है एवम आज विश्व परिदृश्य में भारत एक बड़ी शिक्षा शक्ति कर रूप में उभरा है इसके बावजूद भी हमे अभी भी पाठ्यक्रम, शिक्षा पद्धति एवम नवाचारों कर क्षेत्रों में बहुत कुछ करना शेष है।
हमको भारतीय शिक्षा व शैक्षिक तत्वों के बारे में काम करना ही होगा ताकि एक सुसंस्कारित पीढ़ी विकसित हो सके।

खुशियां।

मन प्रसन्न रहे तो दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है अतः हमको पूरी कोशिश करनी होगी कि हमारे नन्हे-मुँहे स्कूल, परिवार व समाज मे हर समय खुश रह सके। इस हेतु स्कुलों में सहशैक्षिक व खेल-कूद गतिविधियों में इजाफा करते हुए उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

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