दिनाँक 13 अगस्त 2022 की सम्पूर्ण धार्मिक जानकारी

20220812 233420 | Shivira Hindi News

आज 13 अगस्त 2022 है। प्रत्येक व्यक्ति को आज के दिन की सनातन धर्म के अनुसार पूरी जानकारी होनी चाहिए। हम आपके लिए पूर्ण जानकारी प्रस्तुत कर रहे है। हमने यह जानकारी विश्वसनीय सोशल मीडिया स्त्रोत से ली है।

*आज की हिंदी तिथि* ️ युगाब्द-५१२४*
*️ विक्रम संवत-२०७९*
*⛅ तिथि – द्वितीया रात्रि 12:53 तक तत्पश्चात तृतीया*

*⛅दिनांक – 13 अगस्त 2022*
*⛅दिन – शनिवार*
*⛅शक संवत् – 1944*
*⛅अयन – दक्षिणायन*
*⛅ऋतु – वर्षा*
*⛅मास – भाद्रपद*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅नक्षत्र – शतभिषा रात्रि 11:28 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद*
*⛅योग – शोभन सुबह 07:50 तक तत्पश्चात अतिगंड*
*⛅राहु काल – सुबह 09:30 से 11:07 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:15*
*⛅सूर्यास्त – 07:14*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:47 से 05:31 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:23 से 01:07 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण -*
*⛅ विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

* शनिवार के दिन विशेष प्रयोग *

* शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मन्त्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । ( ब्रह्म पुराण )*

* हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*

*आर्थिक कष्ट निवारण हेतु*

*एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।*

*जो लोग शनिवार को क्षौर कर्म कराते हैं उनके आयुष्य क्षीण होता है, अकाल मृत्यु अथवा दुर्घटना का भय रहेगा ।*
– *क्या करें, क्या ना करें ?*

*शास्त्रों का प्रसाद आपके लिए है*

*अग्नि पुराण में आता है :*
*मल-मूत्र से अशुद्ध हो जानेवाले मिट्टी, ताँबा और सुवर्ण के पात्र पुनः आग में पकाने से शुद्ध होते हैं ।*

*उपरोक्त से अन्य किसी प्रकार से अशुद्ध हो जानेवाले ताँबे के पात्र अम्ल (खट्टे पदार्थ) मिश्रित जल से शुद्ध होते हैं ।*

 *काँसे और लोहे के बर्तन क्षार (राख आदि) से मलने पर पवित्र होते हैं ।*

*मोती आदि की शुद्धि केवल जल से धोने पर ही हो जाती है । जल से उत्पन्न शंख आदि के बने बर्तनों, सब प्रकार के पत्थर के बने हुए पात्रों तथा साग, रस्सी, फल, मूल और दालों की शुद्धि भी इसी प्रकार जल से धोनेमात्र से हो जाती है ।*

*[वर्तमान में फलों को पकाने, अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने आदि हेतु रसायनों (केमिकल्स) का उपयोग किया जाता है, अतः उन्हें उपयोग से पूर्व अच्छी तरह धोना चाहिए । सेव आदि फलों पर मोम, केमिकल की पर्त चढ़ी रहती है, जिसे चाकू से खुरच के निकालना चाहिए ।]*

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