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Computer

वर्तमान आधुनिक युग में कम्प्यूटर सीखना हर किसी के लिए आवश्यक हैं। इस हेतु हमने आपके लिए सरल भाषा में कम्प्यूटर संबंधित नोट्स तैयार किये हैं। विश्वास है की ये नोट्स आपकी महत्वपूर्ण सहायता करेंगे।

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Fundamental of Computer | कम्प्यूटर सिस्टम


इस पाठ में हम कम्प्यूटर सिस्टम के मूलभूत डिजाइन का परिचय प्रस्तुत करेेंगे जैसे कि कम्प्यूटर सिस्टम के विभिन्न भाग किस तरह से संगठित होते हैं तथा किसी विशिष्ट कार्य
को करने के लिए विभिन्न कार्य किस प्रकार से किए जाते हैं। आपने देखा होगा कि किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए एक क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से कम्प्यूटर को निर्देश
दिए जाते हैं। कम्प्यूटर के अवयवों को दो भागों में विभाजित किया जाता है, अर्थात् हार्डवेयर सॉफ्टवेयर । इस पाठ में हम हार्डवेयर जैसे कि स्वयं मशीन तथा उससे जुड़े हुए
उपकरण अर्थात्, माॅनीटर, कीबोर्ड, माउस इत्यादि और साॅफ्रटवेयर जो विभिन्न कार्यों को करने के लिए हार्डवेयर का उपयोग करते हैं, उनकी चर्चा करेंगे।

Computer Skills | कम्प्यूटर पर सिखने योग्य दक्षता

इस आलेख को अध्ययन करने एवं समझने के पश्चात आपमें निम्नलिखित दक्षताएं उत्पन्न हो सकेगी। Its necessary to develop these skills on computer to every person.

  1. कम्प्यूटर सिस्टम की मूलभूत संरचना को स्पष्ट कर सकेंगे
  2. विभिन्न प्रकार के इनपुट तथा आउटपुट उपकरणों को स्पष्ट कर सकेंगे
  3. साॅफ्रटवेयर और इसके वर्गीकरण को परिभाषित कर सकेंगेऋ
  4. ्सिस्टम साॅफ्रटवेयर और एप्लिकेशन साॅफ्रटवेयर के बीच अंतर कर
  5. कम्प्यूटर भाषा और उसके वर्गीकरण का वर्णन कर सकेंगे।

when computer was invented ? | कम्प्यूटर का अविष्कार कब हुआ ?

वर्तमान कम्प्यूटर की खोज एवं डिजाइन का कार्य १८२२ से आरम्भ हो गया था। समय समय पर इसके अधिक परिवर्धित व विकसित डिजाइन बनती गई। वर्तमान में हम जिस गति एवं सुविधा से कम्प्यूटर को इस्तेमाल करते हैं। ऐसी तीव्र गति तथा शुद्धता पहले कभी नहीं थी। आजकल सुपर कम्प्यूटर्स का निर्माण हो चूका हैं। जिनके द्वारा हम अत्यंत तीव्र गति से गणना करके परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

Who invente Computer? | कम्प्यूटर का आविष्कार किसने किया ?


CHARLS BABBAGE को कम्प्यूटर की प्रथम आधुनिक डिजाइन बनाने का श्रेय जाता हैं। चार्ल्स बेबेज ने अपने जीवन काल में कम्प्यूटर की तीन परिष्कृत डिजाइन तैयार की थी। चार्ल्स स्वयं के स्तर पर फंड की कमी के चलते कभी कम्प्यूटर नहीं बना सके थे लेकिन डिजाइन निर्माण करने के कारण प्रथम श्रेय उन्ही को दिया जाता हैं।

when computer was invented ? | कम्प्यूटर क्या हैं?

कम्प्यूटर एक आधुनिक उपकरण हैं जिसके द्वारा किसी भी डाटा को किसी अर्थपूर्ण जानकारी में बदला जा सकता हैं। यहां डाटा जिसे हिंदी में समंक कहते हैं वह किसी भी प्रकार का हो सकता हैं जैसे किसी कक्षा के विद्यार्थियों की ऊंचाई एवं वजन। किसी कक्षा के विद्यार्थियों को ऊंचाई एवं वजन की जानकारी को हम कम्प्यूटर को उचित निर्देश प्रदान करते हुए एवं अन्य जानकारी को संबंधित करते हुए एक विशेष डॉकुमेंट का निर्माण कर सकते हैं।

Computer Notes for what can Computer do ? | कम्प्यूटर क्या कार्य कर सकता हैं ?

कम्प्यूटर उचित निर्देश मिलने पर अनेकानेक कार्य कर सकता हैं। कम्प्यूटर जो कार्य कर सकता है, उसके संदर्भ में भी कम्प्यूटर को परिभाषित किया जा सकता है। कम्प्यूटर डाटा को ग्रहण [accept] कर सकता है, डाटा का भंडारण [ Storage ] कर सकता है, डाटा को इच्छित रूप में संसाधित [ Process ] सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर संग्रहित डाटा को पुर्नप्राप्त [ Retrieve ] कर सकता है और परिणाम को मनचाहे फॉर्मेट में प्रिंट कर सकता है।

characteristics of Computer? | कम्प्यूटर की विशेषताएं


कम्प्यूटर की मुख्य विशेषताएँ हैं। उच्च गति , परिशुद्धता , बुद्धिमतापूर्वक कार्यों की सम्पन्नता, बहुआयामी कार्यों को करने की शक्ति और भंडारण। कम्प्यूटर अत्यंत तीव्र गति से गणन कार्य कर सकता हैं।

उच्च गति उच्च गति से यहां आशय तीव्र गति से गणना कार्य करने से हैं।

परिशुद्धता से यह मतलब हैं कि कम्प्यूटर द्वारा की गई गणनाओ में किसी प्रकार की त्रुटि अथवा गलती होने के संभावना नहीं होती हैं।

बुद्धिमतापूर्वक कार्यों की सम्पन्नता कम्प्यूटर की अपनी क्षमता होती है तथा वह लिए गए निर्देशों की पालना अपने पूर्ण क्षमता से करके योग्य एवं विश्वसनीय परिणाम प्रस्तुत करते हैं।

अपनी इन विशेषताओं के कारण आज दुनिया का सबसे आवश्यक उपकरण बन चूका हैं। मानव के विकास में कम्प्यूटर की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका हैं।

Computer Structure | कम्प्यूटर की सरंचना

कम्प्यूटर का ब्लाॅक आरेख चित्रा 1.1 में दिखाया हैः

What computer works? | कम्प्यूटर क्या कार्य करता हैं?


मुख्यतः कम्प्यूटर पाँच बड़े कार्यों को संपन्न करता है, चाहे उसकी बनावट या आकार कुछ भी हो। ये मुख्य कार्य हैंः-

  • 1. यह इनपुट द्वारा डाटा या निर्देश स्वीकार करता है,
  • 2. यह डाटा को संग्रहित करता है।
  • 3. यह उपयोगकर्ता की आवश्यकता अनुसार डाटा को संसाधित करता है,
  • 4. यह परिणामों को मनचाहे रूप में आउटपुट के द्वारा दर्शाता है,
  • 5. यह कम्प्यूटर के भीतरी आपरेशनों को नियंत्रित करता है। हम आगे इनमें से प्रत्येक कार्य पर चर्चा करेंगे।

कम्प्यूटर के कार्य |

हम आगे इनमें से प्रत्येक कार्य पर चर्चा करेंगे।

Computer Unit | इनपुट यूनिट

यह डाटा और प्रोग्राम को कम्प्यूटर सिस्टम में प्रविष्ट [ Enter ] करने की प्रक्रिया है।

Computer Unit | कंट्रोल यूनिट

ब्न्द्धः इनपुट, आउटपुट, संसाधन, तथा भंडारण की प्रक्रिया कंट्रोल यूनिट के निरीक्षण में की जाती है। यह निर्धारित करता है कि डाटा प्राप्त करना कब प्रारंभ किया जाए तथा डाटा प्राप्त करना कब बंद किया जाए, और डाटा का भंडारण कहाँ किया जाए इत्यादि। यह ध्यान देता है कि क्रमबद्ध पद्धति द्वारा कम्प्यूटर के आंतरिक कार्यों को किस प्रकार संपन्न किया जाए।

Compute Memory Unit | मेमोरी यूनिट

डाटा और निर्देशों को संग्रहित करने के लिये कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है।

Computer Notes for Arithmatic Logic Unit | अर्थमेटिक लाॅजिक यूनिट

ALU द्वारा मुख्य रूप से जोड़ना, घटाना, गुणा करना, भाग, तार्किक और तुलनात्मक कार्य किए जाते हैं।

Computer Notes for Output | आउटपुट

उपयोगी जानकारी प्राप्त करने के लिए डाटा द्वारा परिणामों को पेश करने की पद्धति को आउटपुट कहा जाता है।

एएलयू और सीयू को संयुक्त रूप से सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट CPU कहा जाता है। आप सीपीयू को कम्प्यूटर सिस्टम का मस्तिष्क भी कह सकते हैं।


Pheripheral Device | परिधीय उपकरण


परिधीय उपकरण कम्प्यूटर में बाह्य रूप से जोड़े जाते हैं। कुछ विशेष कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए इन उपकरणों का उपयोग किया जाता है। परिधीय उपकरण निम्नलिखित हैंः

  • इनपुट उपकरण
  • आउटपुट उपकरण
  • अन्य परिधीय उपकरण


Input Device | इनपुट उपकरण


इनपुट उपकरण उपयोगकर्ता से डाटा और निर्देशों को स्वीकार करते हैं। नीचे विभिन्न इनपुट उपकरणों के उदाहरण हैं, जो इस उद्देश्य के लिये कम्प्यूटर से जोड़े जाते हैंः

  • कीबोर्ड
  • माउस
  • लाइट पेन
  • ऑप्टिकल स्कैनर
  • टच-स्क्रीन
  • ध्वनि के लिए माइक्रोप्.ाफोन
  • ट्रैक-बाॅल


Key Board | कीबोर्ड


कीबोर्ड सबसे सामान्य इनपुट उपकरण है ;जैसा कि चित्रा 1.3 में दिखाया गया है। कीबोर्ड के कई प्रकार उपलब्ध हैंऋ उनमें कुछ भिन्नताएँ हैं, अन्यथा वे समरूप हैं। सबसे अधिक
उपयोग किया जाने वाला कीबोर्ड QWERTY कीबोर्ड है। आमतौर पर आदर्श कीबोर्ड में 104 कुंजियाँ होती हैं। इन कीबोर्ड में, कर्सर को नियंत्रित करने वाली कुंजियों को दो जगह
पर रखा गया है, ताकि न्यूमैरिक पैड का आसानी से उपयोग किया जा सके।




Mouse | माउस


माउस एक विद्युत-यांत्रिक Electro-mechnical हाथ से प्रयोग किए जाने वाला उपकरण है ;जैसा कि चित्रा 1.4 में दिखाया गया हैद्ध। इसका उपयोग प्वाइंटर की तरह किया जाता है। इसके द्वारा विभिन्न कार्य किए जा सकते हैं जैसे कि मेन्यू कमांड का चयन करना, आइकन को स्थानांतरित करना, Windows के आकार में परिवर्तन लाना, प्रोग्राम प्रारंभ करना और विकल्पों का चयन करना।

साधारणतः माउस में एक आंतरिक , चुम्बकीय पदार्थ से परत चढ़ी हुई बाॅल होती है, जिसे आमतौर पर एक सपाट सतह पर रखा जाता है और जो डेस्क्टाॅप पर माउस की गतिविधि का पता लगाती है। आजकल गतिविधि का पता लगाने के लिए ऑप्टिकल या लेज़र माउस का उपयोग किया जाता है। आजकल सभी विंडोज़-आधारित एप्लिकेशनस माउस के साथ कार्य करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। कठिनता से याद रखे जाने वाले कुंजी संयोजनों Key-combinations को आसान ‘प्वांइट एवं क्लिक Point and click कार्यवाही के बदले स्थापित करने के लिए माउस का उपयोग किया जाता है। परन्तु यह सभी कीबोर्ड कार्यों को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है। यह कमांड-आधारित कार्यों के लिए एक विकल्प हो सकता है।

Light Pen | लाइट पेन


यह एक इनपुट उपकरण है जो डिस्प्ले स्क्रीन पर ऑब्जेक्ट को चुनने के लिए प्रकाश-संवेदी संसूचक light sensitive detector का प्रयोग करता है। लाइट पेन माउस के समान होताहै ;जैसा कि चित्रा 1.5 में दिखाया गया है, सिवाय इसके कि लाइट पेन द्वारा आप प्वाइंटर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकते हैं और पेन द्वारा ऑब्जेक्ट को इंगित कर डिस्प्ले-स्क्रीन पर को चुन सकते हैं।



Optical Scanner | ऑप्टिकल स्कैनर


इस उपकरण का उपयोग स्वचालित रूप से डाटा-संग्रहण करने के लिए किया जाता है। इस श्रेणी के उपकरण मैन्युअल रूप से इनपुट किए जाने वाले डाटा को पूर्णतः से समाप्त कर देते हैं। उदाहरण के लिए, बार कोड रीडर Bar Code Reader वास्तव में, विशेष प्रकार का इमेज स्कैनर है।


इमेज स्कैनर छपी हुई छवियों IMAGE को एक इलेक्ट्राॅनिक स्वरूप में परिवर्तित करता है, जिसे कम्प्यूटर की मेमोरी में संग्रहित किया जा सकता है, और एक उचित साॅफ्रटवेयर की सहायता से संग्रहित छवि में बदलाव किया जा सकता है। स्कैनर का एक अन्य उदाहरण ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्नीशन ओ.सी.आर. है, जिसका उपयोग बैंकों द्वारा टाइप किए हुए या मुद्रित Printed पेज की स्कैन-छवि को टेक्स्ट में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है ताकि उसे कम्प्यूटर पर संपादित किया जा सके।



Touch Screen | टच स्क्रीन


टच पैनल डिस्प्लेज़ पैड्स Touch Panel Display Pades आजकल कीबोर्ड के विकल्प के रूप में प्रदान किए जाते हैं। इनके द्वारा इनपुटस कम्प्यूटर की स्क्रीन द्वारा दिए जा सकते हैं, जो माॅनीटर से इनपुट को स्वीकार करता है। उपयोगकर्ता स्क्रीन पर प्रदर्शित किए गए इलेक्ट्राॅनिक बटनों को छूते हैं या वे लाइट पेन का उपयोग कर सकते हैं।


Microphone | माइक्रोफोन


माइक्रोफोन एक इनपुट उपकरण है, जो ध्वनि को इनपुट के रूप में लेता है। कीबोर्ड से एंटर की गई जानकारी की तुलना में ध्वनि-संचार में त्राुटि की संभावना अधिक होती है। दो प्रकार
के माइक्रोफोन उपलब्ध हैं, जैसा कि चित्र 1.8 में दिखाया गया हैः

  • डेस्कटाॅप माइक्रोफोन
  • हाथ द्वारा उपयोग लाया जाने वाला माइक्रोफोन



Track Ball | ट्रैक बाॅल


ट्रैक बाॅल एक प्वाइंटिंग उपकरण है जो उल्टा रखे माउस जैसा होता है ;जैसा कि चित्रा 1.9 में दिखाया गया हैद्ध। प्वाइंटर को चलाने के लिए, आप अपने अँगूठे, उँगलियों या हाथ
की हथेलियों द्वारा बाॅल को घुमाते हैं।

आमतौर पर बाॅल के निकट तीन बटन होते हैं, जिनका उपयोग आप माउस बटन की तरह करते हैं। माउस की अपेक्षा ट्रैक-बाॅल का एक लाभ यह है कि ट्रैक-बाॅल स्थिर रहता है, इसलिए
इसका उपयोग करने के लिये अधिक स्थान की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा आप ट्रैक-बाॅल को अपनी गोद सहित किसी भी प्रकार की सतह पर रख सकते हैं। इन दोनों
कारणों से ट्रैकबाॅल पोर्टेबल कम्प्यूटरों के लिये अध्कि लोकप्रिय प्वाइंटिंग डिवाइस है।


Output Devices of Computer | कम्प्यूटर के आउटपुट उपकरण


आउटपुट उपकरण डाटा को संसाधित कर उपयोगकर्ता को जानकारी वापस लौटाता है। कुछआमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले आउटपुट उपकरण हैंः

  • माॅनीटर ; विजुअल डिस्प्ले यूनिट
  • प्रिंटर
  • प्लाॅटर
  • स्पीकर


Moniter | माॅनीटर


सभी आउटपुट उपकरणों में से माॅनीटर ;जैसा कि चित्रा 1.10 में दिखाया गया हैद्ध सम्भवतः सबसे महत्वपूर्ण आउटपुट उपकरण है, क्योंकि लोग दूसरे उपकरणों की तुलना में इसका प्रयोग अध्कि करते हैं। वीडियो अडैप्टर कार्ड और माॅनीटर के द्वारा कम्प्यूटर की जानकारीदृश्यमान रूप से प्रदर्शित की जाती है। सीपीयू के अन्दर संसाधित जानकारी, जिसे प्रदर्शित करना आवश्यक है, वीडियो अडैप्टर को भेजी जाती है। वीडियो अडैप्टर जानकारी के प्रारूप को उसी प्रकार से परिवर्तित करता है, जैसे एक टेलीविज़्ान जानकारी को प्रदर्शित करता है, जो उसे केबल सर्विस द्वारा भेजी जाती है। माइक्रो-कम्प्यूटरों के साथ उपयोग किए जाने वाले माॅनीटर के दो मूलभूत प्रकार हैंः

  • सीआरटी CRT
  • एलसीडी LCD

CRT | केथोड रे ट्यूब

कैथोड रे ट्यूब CRT कैथोड रे ट्यूब माॅनीटर एक विशिष्ट माॅनीटर है जो आप एक डेस्कटाॅप कम्प्यूटर पर देखते हैं। यह एक टेलीविज़्ान के स्क्रीन की तरह दिखता है, और उसी की तरह कार्य करता है। इस प्रकार के माॅनीटर बड़ी वैक्यूम-ट्यूब का प्रयोग करते हैं, जिन्हें कैथोड रे ट्यूब CRT कहा जाता है।

लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले


लिक्विड क्रिस्टल डिसप्ले LCD इस प्रकार के माॅनीटर को फ्रलैट पैनल माॅनीटर भी कहा जाता है। इनमें से अधिकांश छवियों की प्रस्तुति के लिए लिक्विड क्रिस्टल डिसप्ले
;एल.सी.डीद्ध का उपयोग करते हैं। इन दिनों एलसीडी माॅनीटर बहुत लोकप्रिय हैं।


जब लोग विभिन्न माॅनीटर की क्षमताओं के बारे में बात करते हैं, तब वे माॅनीटर के रेजाॅल्यूशन की बात करते हैं। अधिकतर माॅनीटरों का रेजाॅल्यूशन 800:600 पिक्सेल होता है। उच्च कोटि के माॅनीटर का रेजाॅल्यूशन 1024:768 पिक्सेल या पिफर 1280:1024 पिक्सेल भी हो सकता है। आजकल माॅनीटरस् उच्च रेजाॅल्यूशन या निम्न रेजाॅल्यूशन में उपलब्ध हैं।


PRINTER | प्रिंटर

कम्प्यूटर पर दस्तावेज़्ा बनाने के बाद उसकी हार्ड-प्रति ;प्रिंट-आउटद्ध लेने के लिए उसे प्रिंटर पर भेजा जा सकता है। कुछ प्रिंटर विशेष सुविधाएँ प्रदान करते हैं, जैसे कि रंगीन और
विशाल पृष्ठ-स्वरूप। सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले कुछ प्रिंटर इस प्रकार हैंः

  • लेज़र प्रिंटर
  • इंक जेट प्रिंटर
  • डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटर
  • लाइन प्रिंटर

LEDGER PRINTER | लेजर प्रिंटर


लेजर प्रिंटरः लेजर प्रिंटर उच्च गुणवत्ता के प्रिंट का उत्पादन करता है, जिसका प्रयोग अधिकतर प्रकाशन क्षेत्रा में किया जाता है। यह अत्यधिक तीव्र होता है, और इसमें आवाज़्ा
नहीं होती है। इसके अतिरिक्त, लेज़्ार प्रिंटर का संचालन करना बहुत आसान हैऋ इसमें स्वचालित रूप से पेपर की लोडिंग होती है। सबसे तेज़्ा गति वाला लेज़्ार प्रिंटर प्रति मिनट 200 मोनोक्रोम पेज और 100 रंगीन पेज प्रिंट कर सकता है।

INK JET PRINTER | इंक जेट प्रिंटर


INK JET PRINTER | इंक जेट प्रिंटर इंक जेट प्रिंटर करीब 64 नोजल Nozals का उपयोग कर कागज पर सीधे स्याही छिड़क कर छवि का निर्माण करता है। यद्यपि यह जिस छवि का निर्माण करता है, वह आमतौर पर लेज़्ार प्रिंटर जितनी स्पष्ट नहीं होती है किन्तु उसकी गुणवत्ता काफ़ी अच्छी होती है। आमतौर पर इंक जेट प्रिंटर, डाॅट मैट्रिक्स और लेज़र प्रिंटर के बीच एक अच्छा विकल्प है।



लेजर प्रिंटर की तरह इंकजेट प्रिंटर भी शांत और सुविधाजनक है, लेकिन इसकी गति बहुत तेज़ नहीं होती है। डाॅट-मैट्रिक्स प्रिंटर की तुलना में इंकजेट प्रिंटर अधिक महँगा होता है लेकिन लेजर प्रिंटर की तुलना में इसकी कीमत आधी होती है।

DOT MATRICS PRINTER | डॉट मेट्रिक्स प्रिंटर


डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटरः डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटर एक समय पर बहुत लोकप्रिय था। यह बहु-उपयोगी और सस्ता आउटपुट उपकरण है। डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटर में प्रिंट हैड रिबन से टकराता है और
डाॅट के संयोजन से टेक्स्ट ;या छविद्ध का निर्माण करता है, इसी कारण से इसका नाम डाॅट मैट्रिक्स प्रिंटर है। इसकी गति कैरेक्टर्स प्रति सेकंड ;सीपीएसद्ध में मापी जाती है। हालांकि, यह सस्ता है, परन्तु अधिक शोर करता है और निम्न गुणवत्ता के प्रिंट देता है।

LINE PRINTER | लाइन प्रिंटर



लाइन प्रिंटरः लाइन प्रिंटर का प्रयोग सामान्यतया विशाल कम्प्यूटर के साथ टेक्स्ट आधारित डाटा प्रोसेसिंग रिपोर्ट के लिए किया जाता है। लाइन प्रिंटर तीव्र गति का प्रिंटर है जिसकी गति प्रति मिनट लगभग 100 से 3800 लाइन होती है। विगत समय में लाइन प्रिंटर के प्रिंट की गुणवत्ता उच्च नहीं थी। प्रौद्योगिकी में विकास के साथ लाइन प्रिंटर के प्रिंट की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। इसकी कीमत लाखों रुपये में है।



PLATER | प्लाॅटर


प्लाॅटर एक विशेष तरह का आउटपुट उपकरण है जो प्रिंटर की तरह भिन्न तरीके से कागज पर चित्रों का निर्माण करता है। विशाल आरेख या छवियों का निर्माण करने के लिए प्लाॅटर्स
डिजाइन किए गए हैं, जैसे भवनों की निर्माण योजनाएँ या यांत्रिक वस्तुओं के लिए ब्लूप्रि तैयार करना। प्लाॅटर उसी पोर्ट में जोड़ा जा सकता है, जिसे प्रिंटर के लिए उपयोग किया
जाता है।


क्लिप रैक में विभिन्न रंग के पैनस की श्रृंखला और रोबोटिक आर्म प्लाॅटर के भाग हैं। प्लाॅटर कम्प्यूटर से जो निर्देश ग्रहण करता है वे हैंः रंग और लाइन के शुरू और अंत होने के निर्देशांक। इस जानकारी के साथ प्लाॅटर अपने आर्म से सही रंग को उठाता है और उसेनिर्देशांकों की शुरूआत पर लाकर पेन को कागज की सतह पर रखता है, और निर्देशांकोंके अंत तक चित्राण करता है।बहुत छोटी सीधी रेखा की श्रृंखला बनाते हुए प्लाॅटर वक्र रेखाओं का निर्माण करता है।


प्लाॅटर सामान्य रूप से दो डिज़्ााइन में आते हैंः

फ्लैट बेड एवं ड्रम

  • फ्रलैट बेडः छोटे प्लाॅटर जिन्हें मेज पर रखा जा सकता है, पर इनमें कागज के आकार की सीमा होती है।
  • ड्रमः यह प्लाॅटर बड़े आकार के होते हैं, जो असीमित लंबाई के कागज के रोल काउपयोग करते हैं।



Speaker | स्पीकर


स्पीकर ;जैसा कि चित्रा 1.16 में दिखाया गया हैद्ध एक अन्य प्रकार का आउटपुट उपकरण है, जिसका उपयोग संगीत और बातचीत सुनने के लिए किया जाता है।


Memory System in Computer | कम्प्यूटर में मेमोरी सिस्टम


कम्प्यूटर मेमोरी दो प्रकार की होती हैंः प्राइमरी और सेकेंडरी। प्राइमरी मेमोरी कम्प्यूटर सिस्टम का आवश्यक भाग है और प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा इस पर सीधे पहुँच प्राप्त की जाती है। रैम RAM प्राइमरी मेमोरी का एक उदाहरण है। जैसे ही कम्प्यूटर बंद किया जाता है, प्राइमरी मेमोरी का डाटा लुप्त हो जाता है।


सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में प्राइमरी मेमोरी की गति अधिक तीव्र होती है। सेकेंडरी मेमोरी के उदाहरण हैंः सीडी-राॅम, CD-ROM पेन ड्राइव Pen Drive आदि।


Software | सॉफ्टवेयर


जैसा कि आप जानते हैं, कम्प्यूटर स्वयं कुछ भी नहीं कर सकता है। उपयोगकर्ता कम्प्यूटर को निर्देश देता है कि क्या करना है, कैसे करना है और कब करना है। किसी भी कार्य को करने के लिए, आपको कम्प्यूटर को विशिष्ट अनुक्रम में निर्देशों का सैट देना होता है। निर्देशों के इस सैट को प्रोग्राम कहा जाता है। साॅफ्रटवेयर प्रोग्रामों का सैट होता है जो हार्डवेयर को विशिष्ट कार्यों को विशिष्ट क्रम में करने का आदेश देता है। साॅफ्रटवेयर का मुख्यतः निम्नलिखित श्रेणियों और उप श्रेणियों में वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसा कि चित्रा 1.17 में दिखाया गया है।


SYSTEM SOFTWARE | सिस्टम साॅफ्रटवेयर


जब आप कम्प्यूटर स्विच आॅन करते हैं तो राॅम ;त्व्डद्ध में भंडारित प्रोग्राम का निष्पादन होता है, जो कम्प्यूटर की विभिन्न इकाइयों को सक्रिय कर देते हैं और आपके द्वारा काम करने के लिए उन्हंे तैयार करते हैं। प्रोग्रामों के इस सैट को सिस्टम साॅफ्रटवेयर कहा जाता है।

सिस्टम साॅफ्रटवेयर प्रोग्राम के वे सैट हैं, जो कम्प्यूटर को चलाने, कम्प्यूटर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करने, और कम्प्यूटर के संसाधनों का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम इसी श्रेणी में आता हैं।


आपरेटिंग सिस्टम एक साॅफ्रटवेयर है जो उपयोगकर्ता को कम्प्यूटर के साथ संचार के लिए इन्टरफेस प्रदान करता है, हार्डवेयर यंत्रों ;डिस्क ड्राइव, कीबोर्ड, माॅनीटर इत्यादि का प्रबंधन करता है, डिस्क प्रोफाइल सिस्टमों का प्रबंधन और देखरेख करता है, और एप्लिकेशन प्रोग्रामों को सहयोग करता है। यूनिक्स, विंडोज़ और लाइनेक्स कुछ लोकप्रिय आपरेटिंग सिस्टम हैं।


आपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता को वे सभी सुविधाएँ प्रदान करता है, जो सिस्टम का उपयोग करने तथा उसका अनुरक्षण करने के लिए आवश्यक हैं। लेकिन यह सभी की अपेक्षाओं
को पूर्ण नहीं कर पाता है। इसी कारण से एक भिन्न प्रकार का सिस्टम साॅफ्रटवेयर जिसे यूटिलिटीज Utilities कहा जाता है, प्रयोग में आया। ये वे प्रोग्राम हैं जो एक आपरेटिंग
सिस्टम की कार्यात्मकता और उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को मिटाता है। यूटिलिटीज प्रोगामस एक विस्तृत श्रेणी के साॅफ्रटवेयर हैं, जैसे कि कम्प्रेस [जिप] /अनकम्प्रेस {अनजिप ] साॅफ्रटवेयर, एंटी वायरस साॅफ्रटवेयर, स्प्लिट एंड ज्वाइन पफाइल साॅफ्रटवेयर इत्यादि।


Application Software | एप्लिकेशन साॅफ्रटवेयर


एप्लिकेशन साॅफ्रटवेयर प्रोग्रामों का एक सैट होता है, जिसे विशेष कार्यों को सम्पन्न करने के लिए लिखा जाता है। उदाहरण के लिए एप्लिकेशन पैकेज़ जो पुस्तकालय को प्रबंधित करता है, उसे लाइब्रेरी इन्फॉर्मेशन सिस्टम कहते हैं। इसका उपयोग पुस्तकालय की जानकारी का प्रबंधन करने के लिए किया जाता है, जैसे कि किताबों की जानकारी

रखना, लेखा धारक की जानकारी, किताबों के वितरण की जानकारी, किताबों को वापस करने की जानकारी रखना इत्यादि। एक अन्य एप्लिकेशन पैकेज जो विद्यार्थी की जानकारी का प्रबंधन करता है, उसे स्टूडेंट इंपफाॅर्मेशन सिस्टम कहते हैं। यह विद्यार्थी के रोल नम्बर, नाम, माता-पिता का नाम, पता, कक्षा, संभाग, परीक्षा के परिणाम को संसाधित करने इत्यादि का प्रबंधन करता है।

एप्लिकेशन साॅफ्रटवेयर को मुख्यतः दो प्रकार में वर्गीकृत किया जा सकता हैः

  • जर्नलाईज़ेड पैकेज
  • कस्टमाइज्ड पैकेज

Generalized Package | जनरलाइज्ड पैकेज


ये उपयोगकर्ता सहायक user- friendly साॅफ्रटवेयर हैं जो उपयोगकर्ता की सामान्य जरूरतों के लिए लिखे जाते हैं, जैसे कि दस्तावेज तैयार करना, चित्र बनाना, डाटा/सूचना का प्रबंधन करने के लिए डाटाबेस तैयार करना, प्रेजेंटेशन बनाना, खेल खेलना इत्यादि।


यह प्रोग्राम का एक समूह है जो विशेष समस्याओं को हल करने के लिए सामान्य उद्देश्य के टूल्स ;उपकरणद्ध प्रदान करता है। कुछ जनरलाइज्ड पैकेजों को नीचे सूचीब( किया गया हैः

  • वर्ड प्रोसेसिंग साॅफ्रटवेयर इनका प्रयोग दस्तावेजों को बनाने के लिए होता हैं। वर्ड परपफेक्ट, एम.एस.वर्ड, ओपन ऑफिस राइटर।
  • स्प्रेडशीट [डाटा विश्लेषण] लोटस स्मार्ट सूइट, एम.एस एक्सेल, ओपन ऑफिस कैल्क , एप्पल नंबर्स।
  • प्रेजेंटेशनः प्रेजेंटेशन ग्रापिफक्स, एम.एस. पावरपाॅइंट, ओपन ऑफिस इम्प्रेस।
  • डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टमः एम.एस एक्सेस, ओपन ऑफिस बेस,एम.एस.-एस. क्यू. एल. सर्वर, आरेकल।
  • ग़्रापिफक्स टूल्सः पेंट शाॅप प्रो, अडोब फाॅटोशाॅप।

Custmized Pacakge | कस्टमाइज़्ड पैकेज


यह वे एप्लिकेशनस होते हैं, जिनका विकास किसी संगठन/संस्था की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है। उदाहरणः विद्यार्थी की जानकारी का विवरण, भुगतान [पेरोल] पैकेज, माल-सूची नियंत्रण [इन्वेंट्री कंट्रोल] आदि।

ये पैकेज हाई-लेवल कम्प्यूटर लैंग्वेज़ का उपयोग करके विकसित किए जाते हैं।

COMPUTER LANGUAGES | कम्प्यूटर की भाषाएँ


भाषाएँ संचार का एक साधन हैं। सामान्यतः लोग भाषा का उपयोग करके एक दूसरे के साथ बातचीत करते हैं। इसी आधार पर भाषा द्वारा कम्प्यूटर के साथ संचार किया जाता है। यह भाषा उपयोगकर्ता और मशीन दोनों के द्वारा समझी जाती है। प्रत्येक भाषा की तरह जैसे कि अंग्रेजी , हिन्दी के अपने व्याकरण के नियम हैं, उसी प्रकार से प्रत्येक कम्प्यूटर भाषा भी नियमों द्वारा बंधी हुई है, जिन्हें उस भाषा का सिंटैक्स syntax कहा जाता है। कम्प्यूटर से संचार करने के दौरान उपयोगकर्ता के लिए वे सिंटैक्स आवश्यक होते हैं।


कम्प्यूटर भाषा को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया हैः

Low Level Language लो लेवल लैंग्वेज़


लो लेवल का अर्थ उस मौलिक तरीके से है जो मशीन को समझ में आती है। लो लेवल लैंग्वेज़ के उदाहरण नीचे दिए गए हैंः


Machine Language | मशीने लेंग्वेज


यह भाषा 0 और 1 रूप में होती है, जिसे बाइनरी कहते है और जो सीधे कम्प्यूटर द्वारा समझी जाती है। यह मशीन पर निर्भर होती है। यह सीखने में कठिन है और प्रोग्राम लिखने के लिए और भी कठिन है।


Assmlbly Language | असेम्बली लैंग्वेज़्


इस भाषा में मशीन कोड 0 और 1 को सांकेतिक कोड द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है ;जिसे निमोनिक्स कहते हैंद्ध, ताकि इसे अधिक अनुकूल बनाया जा सके। प्रोग्रामिंग संरचना को सुधारने के लिये यह प्रथम चरण है।


मशीन लेवल प्रोग्रामिंग की तुलना में असेम्बली लैंग्वेज़ प्रोग्रामिंग अधिक सरल है और इसमें कम समय लगता है। मशीन लैंग्वेज़्ा प्रोग्रामों की तुलना में असेम्बली लैंग्वेज़ में गलतियों को ढूँढ़ना और उन्हें ठीक करना अधिक आसान होता है। ये भी मशीन पर निर्भर होती है। प्रोग्रामरों को उस मशीन के बारे में पता होना चाहिए जिस पर प्रोग्राम चलाना है।

High Level Language | हाई लेवल लैंग्वज़


आप जानते हैं कि लो लेवल लैंग्वेज़्ा के लिए हार्डवेयर के विस्तृत ज्ञान की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह मशीन निर्भर होती है। इन मुश्किलों को दूर करने के लिए हाई लेवल लैंग्वेज़्ा का विकास किया गया है, जो किसी भी समस्या को हल करने के लिए सामान्य और आसानी से समझे जाने योग्य अंग्रेजी के कथनों का उपयोग करती है। हाई लेवल लैंग्वज़्ा कम्प्यूटर पर निर्भर नहीं होती है और इसमें प्रोग्रामिंग करना बहुत सरल होता है। विभिन्न हाई लेवल लैंगवेज़्ोस का वर्णन नीचे किया गया हैः्र

बेसिक BASIC [बिग्निर्स आल पर्पस सिम्बाॅलिक इंस्ट्रक्शन कोड] यह व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है एवं आसानी से सीखी जा सकने वाली सामान्य उपयोग की भाषा है। प्रारंभिक दिनों में मुख्यतः माइक्रोकम्प्यूटर में इसका उपयोग किया जाता था।

कोबोल [COBOL ] [काॅमन बिजनेज ओरिएंटेड लैंग्वेज़] व्यवसायिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग की जाने वाली एक मानकीकृत भाषा।

फोरट्रान [FORTRAN] फार्मूला ट्रांसलेशन गणित संबंधी और वैज्ञानिक समस्याओं को हल करने के लिए इसका विकास किया गया था। यह वैज्ञानिक समुदाय मेंअत्यधिक लोकप्रिय भाषाओं में से एक है।

C : स्ट्रक्चर्ड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज़ जिसका उपयोग सभी उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि वैज्ञानिक अनुप्रयोग, वाणिज्यिक अनुप्रयोग, गेम्स को विकसित करना आदि।

C++ लोकप्रिय आब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज़, जिसका उपयोग सामान्य उद्देश्य के लिए किया जाता है।


COMPILER AND ASSEMBLER | कम्पाइलर और असेम्बलर


जैसा कि आप जानते हैं कि हाई लेवल लैंग्वेज़्ा मशीन पर निर्भर नहीं होती है और असेम्बली लैंग्वेज़्ा चूंकि मशीन पर निर्भर होती हैश् पिफर भी उसमें निर्देशों के लिए निमोनिक्स का पयोग किया जाता है जिसे मशीन नहीं समझती है। अतः दोनों लैंग्वेज़्ा द्वारा प्रदान किए गए निर्देशों को मशीन समझ सके, इसके लिए कम्पाइलर और असेम्बलर की आवश्यकता होती
है ताकि वे इन निर्देशों को मशीन लैंग्वेज़्ा में परिवर्तित कर सकें।


साॅफ्रटवेयर ;प्रोग्रामों का सैटद्ध जो हाई लेवल लैंग्वेज़्ा में लिखे प्रोग्राम को पढ़ता है और उसे मशीन लैंग्वेज़्ा में एक समतुल्य प्रोग्राम में परिवर्तित करता है, उसे कम्पाइलर कहते हैं।
प्रोग्रामर द्वारा हाई लेवल लैंग्वेज़्ा में लिखे गए प्रोग्राम को सोर्स प्रोग्राम कहा जाता है और कम्पाइलर द्वारा अनुवाद किए जाने के बाद उत्पन्न प्रोग्राम, आॅब्जेक्ट प्रोग्राम कहलाता है।



साॅफ्रटवेयर ;प्रोग्रामों का सैटद्ध जो असेम्बली लैंग्वेज़्ा में लिखे प्रोग्राम को पढ़ता है और उसे मशीन लैंग्वेज़्ा में एक समतुल्य प्रोग्राम में परिवर्तित करता है, असेम्बलर कहलाता है।

NOTE | विशेष नोट

शिविरा [ हिंदी इंटरनेट ] के पाठको हेतु हम उपरोक्त वर्णित जानकारी को और बेहतर समझाने हेतु नियमित रूप से छोटे छोटे अन्य सहायक लेख आपके लिए पब्लिश करेंगे।

उपरोक्त लेख के माध्यम से आपको कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी मिल गई है। आइये। अब सीखते हैं हम आसानी से कम्प्यूटर पर अपना फोल्डर कैसे बना सकते हैं। https://shivira.com/folder/

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