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| On 3 years ago

स्थानांतरण हेतु उत्सुक आशार्थियों शिक्षकों/कार्मिकों हेतु करणीय कार्य।

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प्रत्येक राज्य कर्मचारी का पहला प्रयास इच्छित राजकीय सेवा में प्रवेश प्राप्त करना एवम इसके पश्चात गृह जिले में पदस्थापित होना होता है। इच्छित पदस्थापन प्राप्ति से कार्मिक की कार्यदक्षता में भी वृद्धि होती है।
प्रत्येक विभाग में स्थानांतरित कार्मिक को एक स्थान से दूसरे स्थान पर कार्यग्रहण के मध्य एक निश्चित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। एक स्थानांतरण के आशार्थी कार्मिक में निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए ताकि अवांछित परेशानी का सामना नही करना पड़े।

स्थानांतरण हेतु आवेदन-

प्रत्येक विभाग का स्वयम का स्थानांतरण-कलेंडर होता है अतः कलेंडर के अनुसार जागरूक रहकर विभागीय निर्देशो/आदेशो की अनुपालना में निर्धारित पारूप में स्थानांतरण हेतु आवेदन करना चाहिए।
आवेदन पत्र में वांछित सूचनाओं को शुद्ध व स्पष्ट रूप से अंकित करना चाहिए। किसी भी प्रकार की झूठी या भ्रामक सूचना कदापि नही लिखनी चाहिए।
वर्तमान युग मे अधिकतर विभाग स्थानांतरण हेतु ऑनलाइन आवेदन प्राप्त कर रहे है। हमे भी ऑनलाइन आवेदन उचित ईमेल आईडी पर प्रेषित करने के साथ ही हार्ड कॉपी विभागीय पते पर रजिस्टर्ड डाक से प्रेषित करनी चाहिए।
भविष्य में सन्दर्भ हेतु स्थानांतरण आवेदन की एक प्रति व्यक्तिगत रिकॉर्ड में अवश्य रखनी चाहिए।

स्थानांतरण से पूर्व आवश्यक तैयारी-

आवेदन कर देने के पश्चात एक राजकीय कार्मिक को सुविधा पूर्वक स्थानांतरण पश्चात कार्यमुक्त होने के लिए निम्न कार्य समयानुसार पूर्णकर लेने चाहिए।

1. विद्यालय/कार्यालय में अपने प्रभार (Charge) से सम्बंधित अभिलेखों की जांच पश्चात उन्हें आदिनांक अपडेट कर के अभिलेखों की सूची का निर्माण।

2. विद्यालय/कार्यालय से लिये गए सभी अग्रिम राशियों का वाउचर सहित पूर्ण लेखा-जोखा तैयार कर कार्यालयाध्यक्ष के निर्देशानुसार सम्बंधित कार्मिक को लेखा सुपुर्द कर पावती प्राप्त करना।

3. कार्यालयाध्यक्ष द्वारा संधारित स्वयम के सेवाअभिलेख को आदिनांक अपडेटेशन।

4. स्वयम के द्वारा लिए गए आकस्मिक अवकाशों के अतिरिक्त अन्य अवकाश यथा- मेडिकल लीव, पीएल, विशेष अवकाश इत्यादि की स्वीकृति करवाकर स्वयम की प्रति प्राप्त करना।

5. "वेतन पंजिका" को अपडेट करवाना व वर्तमान विद्यालय/कार्यालय से GA 55 प्राप्त कर लेना चाहिए।

6. स्थानांतरण पश्चात जिला परिवर्तन अपेक्षित हो तो स्थानीय बैंक , जहाँ की आपका वेतन आहरित होता है" से अगर कोई ऋण चल रहा हो तो उसका सम्भव होने पर पुनर्भुगतान कर एनओसी प्राप्त करना।

7. जिला परिवर्तन होने पर सम्बंधित जिले से नए जिले में जीपीएफ व एसआई अकॉउंट ट्रांसफर होता है अतः वर्तमान जिले के सम्बंधित कार्यालय में सम्पर्क करके अथवा ऑनलाइन होने की दशा में अपने खातों का अपडेटेशन करवाना।

8. कार्यालय/विद्यालय में अपने पदेन दायित्व पूर्ण करने का कार्य कर लेना चाहिए। इस हेतु यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त समय का विनियोग भी उचित है।

9. कार्यालय/विभाग के बाहर अन्य विभागों यथा- प्रशासन, चुनाव, बीएलओ सम्बंधित कार्यभार मिला हो तो बकाया कार्य समाप्त करके एनओसी प्राप्त कर लेना चाहिए।

10. स्वयम के स्टाफ, ग्रामीणों से किसी प्रकार का वितीय लेनदेन हो तो समाप्त करना।

11. एसडीएमसी से एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया आरम्भ करना।

स्थानांतरण आदेश प्राप्त होने के पश्चात कार्यवाही-
स्थानांतरण-आदेश प्राप्त होते ही निम्न कार्य करना सुनिश्चित करे।

1. स्थानांतरण आदेश में स्वयम से सम्बंधित सूचनाओं यथा - नाम, वर्तमान कार्यस्थल, नवीन पदस्थापना स्थान को चैक करना व किसी प्रकार की अशुद्धि होने पर स्थानांतरण अधिकारी को अविलम्ब सूचित कर संशोधन करवाना।

2. स्वयम के प्रभार की "चार्ज देने वाली सूचियां" मय कार्यमुक्ति हेतु प्रार्थना-पत्र कार्यालयाध्यक्ष/कन्ट्रोलिंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना।

3. कार्यग्रहण की अंतिम दिनांक से पूर्व नवीन स्थान पर कार्यग्रहण करना एवम कार्यग्रहण किन्ही कारणों से अगर सम्भव नही हो तो अविलम्ब सकारण आवेदन पत्र स्थानांतरण अधिकारी के समक्ष वर्तमान कार्यालयाध्यक्ष के माध्यम से प्रस्तुत करना।

4. अन्तर ब्लॉक स्थानांतरण होने पर खण्ड अधिकारी के माध्यम से व अंतर जिला स्थानांतरण होने पर जिला स्तरीय अधिकारी के माध्यम से कार्यमुक्त होकर नवीन स्थल पर कार्यग्रहण करना।

5. वर्तमान आहरण-वितरण अधिकारी से "अंतिम वेतन भुगतान पत्र" LPC प्राप्त करना।

6. आपसे चार्ज ग्रहण करने वाले कार्मिक से हस्ताक्षर करवाकर "चार्ज लिस्ट" अपने अधिकार में लेना।

7. कार्यमुक्त होने के साथ ही नवीन स्थान का पता देकर सेवाअभिलेख स्थानांतरित करने हेतु आवेदन करना।
सादर।

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