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Departmental procedure related to expenditure of Boys Fund and Development fund.

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छात्र कोष व विकास कोष को व्यय करने सम्बंधित विभागीय व्यवस्था।

छात्रकोष/विकास कोष के सामयिक, समुचित
शैक्षिक स्तर में गुणवत्ता अभिवृद्धि के उद्धेश्य से निम्नलिखित व्यवस्था है-

1. कार्य योजना-

सत्रांत में विद्यालय के अगले सत्र की आवश्यकताओं का आकलन कर विद्यालय प्रबन्धन/विद्यालय विकास कोष एव प्रबन्धन समिति, छात्र-अभिभावक संघ, विद्यालय स्टाफ, प्रतिभावान एवं गठित समिति सदस्यों से विचार विमर्श कर कार्य योजना का निधारण किया जावे। सामयिक समीक्षा के दौरान कार्ययोजना में शैक्षिक गुणात्मक सुधार से संबंधित बिन्दुओं पर अपेक्षित संशोधन हेतु संस्था प्रधान को पूर्ण स्वायत्तता होगी। कार्ययोजना में विद्यार्थियों के प्रभावी शिक्षण हेतु शिक्षण अधिगम सामग्री, खेलकुद सामग्री व बैठक व्यवस्था हेतु फनीचर, दरी-पटटी आदि के क्रय के साथ-साथ पीने के पानी की व्यवस्था, बालक-बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक शौचालय का निर्माण, मरम्मत, रख-रखाव एवं विद्यालय परिसर सहित उनकी सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दीजावेगी।

2. राशि का उपयोग-

छात्रकोष/विकास कोष के सुचित उपयोग की दृष्टि से प्रत्येक विद्यालय स्तर पर गठित विद्यालय प्रबन्धन समिति अथवा विद्यालय विकास कोष एवं प्रबन्धन समिति उत्तरदायी होगी। यह समिति छात्रकोष शुल्क / विकास कोष शुल्क के उपयोग हेतु प्रतिवर्ष आवश्यकताओं के परिपेक्ष्य में प्राथमिकता तय करेगी, जिससे विद्यालय का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके। यथा संभव संस्था प्रधान इस कोष से स्वयं के कार्यालय (Office Chamber ) पर व्यय नहीं कर सकेंगे। छात्रहित से संबंधित कार्यों को प्रथम प्राथमिकता प्रदान कर आदर्श वित्तीय मानकों/नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से राशि व्यय कर सकेंगे। कार्य योजना के अनुरूप व्यय की जाने वाली राशि के प्रस्ताव का संबंधित समिति से स्वीकृति लिया जाना अनिवार्य होगा। अपरिहार्य स्थिति में छात्र हित में समिति की स्वीकृति के बिना किये जाने पर कार्योत्तर स्वीकृति के पश्चात ही किया हआ व्यय नियमित माना जायेगा।

3. छात्र कोष /विकास कोष से किये जाने योग्य कार्य-

विद्यालय प्रबन्धन समिति अथवा विद्यालय विकास कोष एवं प्रबन्धन समिति से अनुमोदन पश्चात शैक्षिक गुणवत्ता सुधार, विद्यार्थियों हेतु बैठक व्यवस्था,
पीने के पानी व बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छटॉयलेट्स की उपलब्धता हेतु नियत किये गए कोष/विकास कोष से कराय जा सकेंगे। विद्यार्थियों का अध्ययन सचारू रूप से चलाने तथा व्यय का जान वाली राशि की सार्थकता के परिपेक्ष्य में में संस्था प्रधान का सुविधा हेतु प्रस्तावित कार्यों की सूची निम्नानुसार है:-

3.1 छात्रकोष के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्य-

3.1.1 विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संख्या में दरी पट्टी, डेस्क एवं टेबल कुर्सी की कक्षा स्तर अनुसार व्यवस्था।
3.1.2 कक्षा कक्ष संचालन हेतु चॉक, डस्टर, सहायक शिक्षण सामग्री व पोस्टर्स, सहायक शिक्षण सामग्री आदि की व्यवस्था।
3.1.3 उच्च गुणवत्ता वाले फाईबर बोर्ड/श्याम पट्ट।
3.1.4 बच्चों के प्रवेश उत्सव पर नव प्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत, विद्यालय पहचान पत्र बनवाना व अच्छा कार्य करने वाले लोकसेवक/एनजीओ का सम्मान।
3.1.5 परिसर, कक्षा-कक्ष में रंग-रोगन/वॉल पेंटिग। कक्षा 1 से 5 के लिए लहर कार्यक्रम की भांति, कक्षा 6 से 8 के लिए सामान्य ज्ञान एवं जानकारी एवं कक्षा 9 से 12 के लिए महापुरूषों के चित्र, विभागीय
योजनाएं, भामाशाह एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का विवरण, महापुरूषों के नाम, छात्रवृति व अन्य योजनाओं का विवरण विद्यालयों में उपयुक्त स्थानों पर अंकित कराया जाना।
3.1.6 खेलकूद प्रवृतियों के लिए खेल सामग्री यथा- फुटबॉल, वॉलीबाल, बास्केटबॉल, नेट आदि।
3.1.7 खेलकूद प्रतियोगिताएं, छात्र प्रवतियां सांस्कृतिक प्रवृतियां, सामाजिक प्रवृतियां, मनोरंजन उत्सव, समारोह पुरस्कार, शाला पत्रिका, अतिथि सत्कार, निमंत्रण पत्र आदि।
3.1.8 समान/ गृह परीक्षा संचालन व्यय।
3.1.9 शारदे बालिका छात्रावासों की बालिकाओं हेतु शैक्षिक गतिविधियां।
3.1.10 समाज उपयोगी उत्पादक कार्य ( SUPW) एवं कार्यानुभव गतिविधिया।
3.1.11 पुस्तकालय-वाचनालय हेतु प्रत्येक विद्यालय में समाचार पत्र हिन्दी/ अंग्रेजी, पाक्षिक पत्र-पत्रिका छोटे बच्चों की पत्रिकाएं/महापुरूष की जीवनियां व अन्य पुस्तकों की व्यवस्था।
3.1.12 विद्यालय प्रार्थना सभा एवं अन्य सांस्कतिक कार्यक्रमों के लिए माइक, हारमोनियम, तबला, ढोलक रंगोली निर्माण सामग्री, रंगोली बनाने का पुस्तकें आदि।
3.1.13 विद्यार्थियों के प्रगति रिपोर्ट कार्ड की व्यवस्था।
3.1.14 कक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को प्रमाण पत्र व पुरस्कार।
3.1.15 प्रत्येक परख व परीक्षा समाप्ति के 7 दिवस की अवधि में अभिभावक के साथ संवाद (पीटीए बैठक) व फोटोग्राफी।
3.1.16 कक्षा 8 से 12 के प्रथम श्रेणी उतीर्ण विद्यार्थियों के साथ अभिभावको की ग्राम/कस्बे के मुख्य मार्ग से रैली निकालना एवं फोटोग्राफी।
3.1.17 विधवा/ परित्यक्ता/विशेष योग्यजन अभिभावकों के बच्चों को निःशुल्क विद्यालय पोशाक-कपड़े, जूते व मोजे (दो जोड़ी) तथा स्कूल बैग-कक्षा 1 से 5 के लिए।
3.1.18 कमरों में पंखे, वाटर कूलर, वाटर प्यूरीफायर एवं ठण्डे पानी हेतु फ्रीज की व्यवस्था एवं विद्युत बिल /पानी का बिल/टेलिफोन बिल का भुगतान।
3.1.19 विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, खेलकूद, शिक्षा उन्नयन, शोधकार्य आदि को प्रोत्साहित किये जाने की दशा में तीन माह में एक वाकपीठ।
3.1.20 विद्यालय सूचना पट्ट एवं साईन बोर्ड आकर्षक तरीके से बनवाने व ज्ञानार्थ-प्रवेश, सेवार्थ-प्रस्थान संबंधी पेंटिग आदि।

3.2 विद्यालय विकास कोष संबंधी कार्य-

3.2.1 स्कूल परिसर(बाहर-अन्दर) पेड़ कटाई-छंटाई।
3.2.2 कक्षा कक्षों की माईनर रिपेयर यथा-किवाड़, खिड़की, बिजली फिटिंग, टूटफूट, पानी लाईन, माईनर सिविल वर्क।
3.2.3 बालिकाओं हेतु संचालित शारदे बालिका छात्रावासों का विकास।
3.2.4 विद्यालय परिसर में माँ सरस्वती की प्रतिमा (स्टेच्य) का निर्माण।
3.2.5 पूर्व से संचालित विकास योजनाओं से डवटेल कर विद्यालय में विकास कार्य।
3.2.6 विद्यालय परिस में पेयजल,हैण्डपम्प आदि का निर्माण (जन सहयोग व विकास योजनाओं से)
3.2.7 निर्माण कार्यों में खेलकूद मदान चारदीवारी, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल कोर्ट
व ऑडिटोरियम आदि का निर्माण।

4.0 पर्यवेक्षण

4.1 संस्था प्रधान प्रत्येक माह के अन्त में छात्र कोष में उपलब्ध राशि की समीक्षा के लिए उत्तरदायी होंगे। विद्यालय पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण से संबंधित अधिकारी भी अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में छात्र कोष की राशि के संबंध में टिप्पणी अंकित करगें तथा विद्यालय का प्रभावी संचालन/विद्यार्थियों के हित को दृष्टिगत रखते हुए छात्र कोष /विकास कोष के उपयोग हेतु आवश्यक होने पर संस्था प्रधान को निर्देश देने केलिए अधिकृत होंगे।
4.2 जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक/उप निदेशक (माध्यमिक) एवं निदेशालय के अधिकारी निरीक्षण के दौरान छात्र कोष/विकास कोष की राशि के उपयोग की स्थिति की समीक्षा करेंगे तथानिरीक्षण प्रतिवेदन में इसका उल्लेख करेंगे, जिससे इस राशि का विद्यालय/विद्यार्थियों के लिए प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
4.3 जिला शिक्षा अधिकारी संबंधित शाला प्रधानों से प्रत्येक माह के अन्त मेंबनिम्नांकित प्रारूप में सूचना प्राप्त कर विद्यालयवार अवशेष राशि वबविद्यालय योजना के अनुसार प्रस्तावित कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे तथा समीक्षा पश्चात आवश्यक निर्देश संस्था प्रधानों को जारी करेंगे जिससे विद्यालय स्तर पर विद्यालयों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके।

क्र.सं. विद्यालय का नाम बैक का खाता माह के प्रारम्भ में उपलब्ध राशि माह में व्यय की राशि माह के अंत मे शेष राशि

उक्त परिपेक्ष्य में यह भी उल्लेखनीय है कि निर्देशों के पश्चात विद्यालयों में छात्रकोष/विकास कोष का प्रभावी उपयोग नहीं करने पर संस्था प्रधानों के विरुद्ध कार्यवाही की जावेगी।

(कार्यालय निदेशक माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर क्रमांकःशिविरा-माध्य/मा/स/22423/01-02 दिनांक: 28 फरवरी 2015)

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