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डिप्रेशन का लक्षण और उपाय (Depression Symptoms and Treatment in Hindi)

डिप्रेशन का लक्षण और उपाय - एक सामान्य और गंभीर बीमारी है जो महसूस करने, सोचने के तरीके और कार्य करने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। डिप्रेशन उदासी की भावनाओं या उन गतिविधियों में रुचि की हानि का कारण बनता है। Depression कई तरह की भावनात्मक और शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। Depression काम और घर पर काम करने की क्षमता को कम कर सकता है।

डिप्रेशन का लक्षण और उपाय (Depression Symptoms and Treatment in Hindi) :

डिप्रेशन का लक्षण और उपाय निम्न प्रकार से हो सकते है -

डिप्रेशन के लक्षण? (Depression Symptoms in Hindi) :

  • उदासी महसूस करना
  • उदास मनोदशा का होना
  • आनंद लेने वाली गतिविधियों में रुचि का कम होना
  • आनंद की हानि होना
  • भूख न लगना
  • वज़न कम होना
  • सोने में परेशानी
  • बहुत ज्यादा सोना
  • थकान होना
  • शारीरिक गतिविधि में कमी
  • स्थिर बैठने में असमर्थ
  • धीमी गति से चलना
  • व्यर्थ और दोषी महसूस करना
  • सोचने, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • निर्णय लेने में कठिनाई
  • मृत्यु या आत्महत्या के विचार आना

डिप्रेशन के कारण (Cause of Depression in Hindi) :

डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण यह होता है की क्या कहेंगे लोग, हमारे मन में डिप्रेशन ने ना जाने कितने मनोविकारों को जन्म दिया है। अपना जीवन साथी/अपनी जीविका, करियर अपनी पसंद से ना चुन पाना एक बड़ा कारण होता है जिसमें तनाव व दुख का जो आगे चल के डिप्रेशन का रुप ले लेता है जैविक, आनुवांशिक, मनोसामाजिक, जैव रासायनिक असंतुलन के कारण डिप्रेशन हो सकता है।

डिप्रेशन के भौतिक कारण भी अनेक हैं जैसे कुपोषण, आनुवांशिकता (Heriditory) हॉर्मोन,

मौसम, तनाव, बीमारी, नशा, अप्रिय स्थितियों में लंबे समय तक रहना, पीठ में तकलीफ आदि प्रमुख कारणहोते हैं। 90% डिप्रेशन के रोगी नींद की समस्या से ग्रस्त होते हैं। अपने ढंग से न जी पाना और बहुत अधिक महत्वकांक्षी होना इच्छाओं की पूर्ति न हो पाना डिप्रेशन को जन्म देता है। कोई हादसा या प्रिय जन से बिछड़ जाना भी डिप्रेशन को जन्म देता है।

डिप्रेशन से कैसे पार पाएं? (Depression Treatment in Hindi) :

  • Depression (अवसाद) दूर करने के लिए आठ घंटे की नींद लें। नींद पूरी होगी तो दिमाग तरोताजा होगा और नकारात्मक भाव मन में कम आएंगे।
  • प्रतिदिन सूरज की रोशनी में कुछ देर रहें।
  • ध्यान व योग को दिनचर्या में शामिल करें।
  • पसंदीदा कार्यों की एक सूची बनाना जिनमें
    • क़िताब पढ़ना
    • संगीत सुनना
    • खाना खाना
    • लिखना
    • TV देखना
  • गुस्से को नियंत्रित रखना
  • लंबी साँस लेना
  • सोचने समझने के बाद प्रतिक्रिया देना
  • निडर सौम्यता से अपना मत रखना (अपनी बात रखना)
  • दिमाग पर नियंत्रण

पुरूषों में डिप्रेशन (Depression in Men in Hindi) :

  • Depression (अवसाद) से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा उदास रहता है।
  • व्यक्ति हमेशा स्वयं को उलझन में एवं हारा हुआ महसूस करता है।
  • Depression (अवसाद) से ग्रस्त व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है।
  • किसी भी कार्य में ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी होती है।
  • Depression (अवसाद) में पुरुष खुद को परिवार एवं भीड़ वाली जगहों से अलग रखने की कोशिश करता है।
  • वह ज्यादातर अकेले रहना पसन्द करता है।
  • खुशी के वातावरण में या खुशी देने वाली चीजों के होने पर भी वह व्यक्ति उदास ही रहता है।
  • Depression (अवसाद) में पुरुष हमेशा चिड़चिड़ा रहता है
  • बहुत कम बोलता है।
  • Depression (अवसाद)
    में पुरुष भीतर से हमेशा बेचैन होते हैं तथा हमेशा चिन्ता में डूबे हुए दिखाई देते हैं।
  • निर्णय लेने पर स्वयं को असमर्थ पाते हैं
  • हमेशा भ्रम की स्थिति में रहते हैं।
  • डिप्रेशन में पुरुष अस्वस्थ भोजन की और ज्यादा आसक्त रहता है।
  • डिप्रेशन में पुरुष कोई भी समस्या आने पर बहुत जल्दी हताश हो जाते हैं।
  • डिप्रेशन में पुरुषों को बहुत अधिक गुस्सा आने की समस्या देखी होती है।
  • हर समय कुछ बुरा होने की आशंका से घिरे रहना।

महिलाओं में डिप्रेशन (Depression in Women in Hindi) :

अधिकतर महिलाएं यह स्वीकार करने में हिचकती हैं कि वे किसी प्रकार के Depression (अवसाद) का सामना कर रही हैं। सच्चाई यह है कि हर चार में से एक महिला को जीवन में कभी- कभी गंभीर डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है। महिलाओं में डिप्रेशन के बढ़ते खतरे को Harmon (हॉर्मोन) के स्तर में बदलाव होता है।

  • गर्भावस्था - महिलाओं में डिप्रेशन का बड़ा कारण है। चिकित्सकीय रूप से माना जाता है कि प्रेग्नेंसी का समय महिलाओं के लिए सामान्य रूप से उदास और बेहोश होने की उच्च जोखिम का समय होता है। पर्याप्त देखभाल और ध्यान नहीं दिया जाए, तो गर्भावस्था संबंधी डिप्रेशन लंबे समय तक जारी रह सकता है और गर्भ में बच्चे के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। आमतौर पर मोटापे और अन्य समस्याओं की शिकार महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान इसके होने की आशंका ज्यादा होती है।
  • डिलीवरी के बाद - नवजातशिशु को जन्म देने के बाद पहले हफ्तों में माता भावनाओं के एक रोलर कोस्टर से गुजरती है। इसे बेबी ब्लूज कहते हैं जो डिलीवरी के कुछ दिनों
    बाद तक होती है। इस दौरान ज्यादातर महिलाएं आंसू, चिंता, आत्म-संदेह, थकान आदि महसूस करती हैं। यदि ऐसी भावनाएं लंबे समय तक जारी रहती हैं तो गंभीर डिप्रेशन की समस्या हो जाती है।
  • वैवाहिक अवसाद - शादी से पहले और उसके बाद लड़की और उसके परिवार से समाज की बहुत सारी उम्मीदें होती हैं। उसे खुद भी शादी से कई उम्मीदें होती हैं जो अक्सर पूरी नहीं होती। इसके अलावा शादी के दौरान दुल्हन या इसके बाद वह अकेली हो जाती है। प्रियजनों से दूर जाने की चिंता धीरे-धीरे Depression (अवसाद) में तब्दील हो जाती है। अन्य कारक जैसे दूल्हे के परिवार की दहेज की उम्मीदें या घरेलू हिंसा से हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
  • डायस्टियमिया - यह लंबे समय तक चलने वाला निम्न-श्रेणी का डिप्रेशन है। और अधिकतर होम मेकर्स में देखा जाता है। यह आमतौर पर मूड ब्लूज़ से शुरू होता है। इसके चलते वयस्क महिलाएं निराशावादी और ऊब का शिकार हो जाती हैं। इससे भूख में परिवर्तन हो सकता है, नींद की बीमारी, थकान, और फैसले लेने में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इस प्रकार की विकार वाली महिलाएं चुपचाप और उदासीन रहना पसंद करती हैं।
  • पीरियड्स संबंधी विकार - यह महीने में एक बार होता है। इसके चलते मासिक धर्म चक्र शुरू होने से पहले चिड़चिड़ापन और घबराहट होती है। मस्तिष्क अचानक आंतरिक हाॅर्मोनल परिवर्तनों से असामान्य प्रतिक्रिया दिखाता है। इससे महिलाएं भावनात्मक और शारीरिक रूप से कमजोर हो सकती हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, थकान और जल्दी से अभिभूत होना आदि शामिल हैं। यह लंबे समय तक बना रहे तो
    महिला निराशावादिता का शिकार हो सकती है और यह उसके पारिवारिक रिश्ते को भी प्रभावित कर सकता है। यह सिंड्रोम पीसीओडी/पीसीओएस जैसी समस्याओं की शिकार महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को अधिक प्रभावित करता है।

किशोरावस्था में डिप्रेशन (Depression in Teenagers in Hindi) :

  • किन्हीं कार्यों में ध्यान केंद्रित न होना
  • बहुत ज्यादा सोना
  • बिलकुल भी नींद नहीं आना
  • ज्यादा खाना या बहुत कम खाना
  • पसंदीदा चीजों में भी रूचि खत्म होना

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इन बातों पर भी ध्यान दीजिये डिप्रेशन में (Things to Remember While Suffering From Depression in Hindi) :

  • डिप्रेशन को दूर करने के लिए अच्छे मनोचिकित्सक से परामर्श ज़रूर करना चाहिए.
  • इस समस्या अच्छे से समझने की कोशिश करें और इसके लिए अपने चिकित्सक की सलाह लें।
  • अपने आपको अकेला न रहने दे, दोस्तों के साथ बहार जाएँ, लोगों से मिले जुले, गपशप करे।
  • खुद के लिए अप्राप्य लक्ष्य ना बनाये।
  • सुबह शाम टहलनें जाएँ।
  • अपने आप को काम में व्यस्त रखें।
  • उदासी भरे गानें ना सुने।
  • दिल ही दिल में घुटने की बजाये अपनी बाते किसी विश्वासपात्र या मनोचिकित्सक को ज़रूर बताये।
  • काम को करने के नए तरीके खोजे और नए–नए रास्तो से गुजरें।
  • यदि आप दुखी है तो भी ऐसा अभिनय कीजिये जैसे आप वास्तव में खुश है। सहकर्मियों के साथ हसना स्वस्थ्य के लिए अच्छा है और जब हम रोते है तो कोई नहीं रोता हसने पर दुनिया साथ में हसने को तैयार हो जाती है।
  • सकारात्मक बातें पढ़िए और बोलिए
  • आर्ट ऑफ़ पॉजिटिव लिविंग का फायदा उठाये।
  • योग का सहारा ले और अनुलोम विलोम, प्राणायाम, ध्यान को सीखकर जीवन में उतारे।
  • अगर आपके पास इन्टरनेट है तो सकारात्मक कहानियाँ, विचार और उद्बोधन पढ़ें।
  • रात में सोने के एक घंटे पहले टीवी बंद कर दे क्योकि टीवी में अगर आप कुछ नकारात्मक देखतें है तो वह आपके अन्तर्मन में बना रहता है

याद रखे

  • डिप्रेशन एक बहुत ही आम लेकिन गंभीर समस्या है जिससे बाहर आने के लिए व्यक्ति को चिकित्सकीय सहायता की ज़रूरत होती है।
  • डिप्रेशन पागलपन नहीं होता है और डिप्रेशन के अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
  • डिप्रेशन के ईलाज के लिए सही जानकारी बहुत ज़रूरी है।
  • इस समस्या से निजात पाने में चिकित्सक और मरीज के साथ–साथ उसके परिवार और दोस्तों का सहयोग बहुत ज़रूरी होता है।