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Discovery of India: Which is the most ancient civilization of the world?

"भारत एक खोज" भाग-1

विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता कौनसी है?

भारत एक खोज- क्या सुमेरियन सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है?

नालंदा व तक्षशिला विश्विद्यालय वाले भूभाग तथा ऋषियों मुनियों द्वारा रचित असँख्य गर्न्थो वाले स्थान जिसे वर्तमान में "भारत" कहकर बुलाया जाता है एवम जिसे अलग-अलग कालों में अनेक नाम यथा- भारतवर्ष, हिंदुस्तान, आर्यावर्त्त इत्यादि कहकर सम्बोधित किया जाता है। इस भूभाग के अनेक हिस्से इससे अलग हुए एवम आज इसको आधुनिक कालखंड में सभी इंडिया कहते है।

आप इस इंडिया के किसी भी स्थान की यात्रा कर लीजिए आपकों विशिष्टताओं का अहसास होने लगेगा। पुरातात्विक खोजों एवम ग्रँथों के आरम्भिक अध्ययन से ही आपको यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस भूमि से बहुत कुछ विशेष सम्बंधित है। इस क्रम में कहा जा सकता है कि -
"जिन खोजा तिन पाहियाँ,
गहरे पानी पैठ"!!
आप इस भूभाग को जितना जानने का प्रयास करोगे आपकी उत्कंठा उससे द्विगुणित होती जाएगी। यह भूभाग विश्व का सबसे अनुपम स्थान है जहाँ के कण-कण में अलौकिक विद्यमान है।

किसी भी अध्ययन से पूर्व हम कुछ परिकल्पना करके उसके परीक्षण पश्चात प्राप्त निष्कर्षों का तथ्यों से पुष्टिकरण स्थापित करते है। हम निरन्तर किये जाने वाले इस प्रस्तावित अध्ययन हेतु आपकी सहभागी भूमिका अपेक्षित करते है।

आज हम जब विश्व मंडल पर भारतीय इतिहास की बात करते

है तो स्वयम को बड़ा असहज अनुभव करते है। हम विदेशी टिप्पणीकारों, इतिहासकारों व विश्लेषणकर्ताओ पर निर्भर होने लगते है। उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को प्रमाणिक मानकर हम संशय की स्तिथी में आ जाते है।

इस अध्ययन से पूर्व हम निम्न परिकल्पनाओं को स्वीकार करते है।

अध्ययन पूर्व परिकल्पना।

1. भारतवर्ष विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है।
2. भारतवर्ष भाषा, संस्कृति व ज्ञान का मूलस्रोत है।
3. अनेक स्वार्थमय दृष्टिकोण के उपरांत भी यह स्थान केंद्रबिंदु है।

इतिहास का अध्ययन करना बहुत महत्वपूर्ण है एवम इसको उचित कालखण्ड में देखना उससे भी महत्वपूर्ण है। भारतीय इतिहास के सम्बंध में उपलब्ध पुस्तकों, गर्न्थो, शिलालेखों व अन्य स्त्रोतों के आधार पर मोटे तौर पर निम्न स्तिथि उभर कर सामने आती है।

सुमेरियन सभ्यता की स्थापना।

सुमेरियन सभ्यता को सभी इतिहासकार आज विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता बीके रूप में स्वीकृत करते है।
आज से 5200 वर्ष या अधिक पूर्व सुमेर या सुमेरियन सभ्यता की स्थापना का काल खंड माना जाता है। इस सभ्यता के मूल में सुमेरु पर्वत है।
संसार की सबसे पुरानी लिपि का जन्म सुमेर में ही हुआ। गीली मिट्टी की पटिया पर कील जैसे औज़ार से गोद कर लिखी जाने वाली इस लिपि को कीलाक्षर लिपि कहते हैं। मोहन जोदड़ो की लिपि और मुहरें, सुमेरी लिपि और मुहरों से मिलती हैं।
सुमेर के प्राचीन शहर ऊर में भारत में चूने-मिट्टी के बने बर्तन पाए गए हैं। इसके अलावा हड़प्पा व मोहनजोदड़ो के सभ्यता अवशेषों में पाई अनेक वस्तुओं पर सुमेरियन सभ्यता का प्रभाव बताया जाता है।
यह भी कहा जाता है कि यह बहुत विकसित सभ्यता थी क्योंकि यहां वर्तमान युग के समान व्यापारिक गतिविधियों हेतु लेखांकन व्यवस्था भी उपलब्ध थी। इस सभ्यता ने कैलेंडर निर्माण करना भी सीख लिया था। कहा गया है किपहिये का आविष्कार व बैंकिंग सिस्टम यहां था।
सुमेरी सभ्यता के पतन के बाद इस क्षेत्र में जो बाबुली या बैबिलोनियन सभ्यता पल्लवित हुई, उसके प्रसिद्ध सम्राट् हम्मुराबी थे जिन्होंने कठोर दंड व्यवस्था स्थापित की थी। इस दण्ड

व्यवस्था में "हाथ के बदले हाथ व आँख के बाद आंख" निर्धारित किया गया था।
सुमेरिया, बेबीलोनिया और असीरिया इन तीनो सभ्यताओ के सम्मिलन से जो सभ्यता विकसित हुई उसे मेसोपोटामिया की सभ्यता कहा गया। मेसोपोटामिया में चार प्रसिद्ध सभ्यताएं हुईं हैं - सुमेरिया, बेबीलोन, असीरिया, कैल्ड्रिया।
सुमेरियन सभ्यता के जनक कौन थे यह प्रश्न आज भी विवादगस्त है। अलग-अलग विद्वान अलग-अलग दावे करते है। यहां के जनक भूमध्यसागरीय लोग, मंगोल, द्रविड़ या आर्य हो सकते है।
सुमेरियपा प्राचीन काल में छोटे छोटे नगर राज्यो में विभक्त था प्रत्येक राज्य का स्वतंत्र शासका होता था जिसे सम्भवत फ्तेसी अथवा फ्तेस्ती कहा जाता था खुदाई में प्राप्त भग्नावशेषो से पता चलता है कि राजा एक विशाल महल में रहता था और कई अधिकारियों, कर्मचारियो तथा पुरोहित की सहायता से राजकीय कार्यो व शासन सम्बन्धी कार्यो का संचालन करता था ऐसा प्रतीत होता है कि प्रारम्भ में सुमेरिया में लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली स्थापित थी प्रत्येक नगर राज्य में समय समय पर जनसभा होती थी और राज्य का प्रत्येक वयस्क नागरिक इसका सदस्य होता था इस जनसभा द्वारा ही शासन के कार्य संचालित होते थे।
तत्कालीन समाज भी तीन वर्गों राजा, पुरोहितों व अधिकारियों तथा कामगरों में विभक्त था। नारी को सम्मान व हासिल था लेकिन दास प्रथा भी एक कलंक के रूप में स्थापित थी।
उर, उरुक, किश, निप्पुर, लगाश, उम्मा आदि इस सभ्यता के प्रमुख नगर दे उर के राजा उर एंगर, लगाश के शासक गुड़िया, किश की शासक अजगबाऊ इस सभ्यता के लोकप्रिय शासक थे इन राजाओं के शासनकाल में कला, साहित्य, व्यापार, आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी।
कालांतर में विभिन्न कारणों से इस सभ्यता का भी समापन हुआ। आज विश्व के अनेक विद्वान सुमेरियन सभ्यता को प्राचीनतम सभ्यता बताकर भरमा रहे है।
यहाँ अनेक प्रश्न खड़े होते है जिनके उत्तरों की तलाश ही भारत की खोज है।

सुमेरियन सभ्यता सम्बंधित इतिहास के क्रम में सवाल।

1. जब सभी विद्वान सहमत है कि सुमेरियन व सिंधु सभ्यता में कनेक्शन है तो सुमेरियन

सभ्यता निर्विवाद रूप से सबसे प्राचीन सभ्यता कैसे?
2. सुमेरियन सभ्यता का कालखण्ड 5200 वर्ष पूर्व माना जाता है! (इससे भी अधिक मान लें तो 6000 वर्ष) इसे प्राचीनतम सभ्यता भी कहा जा रहा है तो आप रामसेतु के बारे में क्या कहेंगे?
3. रामसेतु का अस्तित्व अब निर्विवादित है एवम कार्बन डेटिंग प्रोसेस के तहत यह 6000 वर्ष से अधिक पुराना है। जब रामसेतु सुमेरियन सभ्यता से पूर्व का है तो सुमेरियन सभ्यता प्राचीनतम कैसे?
4. रामराज्य एक पूर्णतः विकसित व्यवस्था के रूप में अंगीकार की गई है एवम श्रीराम से पूर्व के अनेक वँशो का इतिहास उपलब्ध है तो यह स्वतः ही माना जा सकता है कि सुमेरियन से हजारों वर्ष पूर्व भारतवर्ष ही केंद्रबिंदु रहा है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु।

भारतीय संस्कृति व सभ्यता विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। मध्यप्रदेश के भीमबेटका में पाए गए 25 हजार वर्ष पुराने शैलचित्र, नर्मदा घाटी में की गई खुदाई तथा मेहरगढ़ के अलावा कुछ अन्य नृवंशीय एवं पुरातत्वीय प्रमाणों से यह सिद्ध हो चुका है कि भारत की भूमि आदिमानव की प्राचीनतम कर्मभूमि रही है।
उपरोक्त तथ्य इशारा कर रहे है कि सुमेरियन सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता नही है। इस सम्बंध में लगातार लेख-माला प्रकाशित होगी।

सादर।

सुरेंद्र सिंह चौहान।

क्रमशः