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| On 6 days ago

E-Cigarette पीने वाले हो जाएं सावधान, कैंसर समेत कई रोगों के हो सकते हैं शिकार

E-Cigarette (ई-सिगरेट) - E-Cigarette (ई-सिगरेट) को पुरानी Cigarette (सिगरेट) की तुलना में कम खतरनाक होने की सोच के साथ ज्यादा प्रचलित किया जाता है, क्योंकि इसमें खतरनाक Fog (धुआं), Tar (टार) और Carbon Monoxide(कार्बन मोनोऑक्साइड) नहीं होता किन्तु E-Cigarette (ई-सिगरेट) से होने वाले हृदय और फेफड़ों के रोग के खतरे सामने आते रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO (डब्लयूएचओ) ने E-Cigarette (ई-सिगरेट) पर सख्त पाबंदी की मांग भी कर चुका है कि E-Cigarette (ई-सिगरेट) की लत के शिकार लोग आम Cigarette (सिगरेट) पीने वालों से ज्यादा Cigarette (सिगरेट) पीते हैं जिससे Cardiac Sympathetic Activity Endarline (कार्डियक सिम्पथैटिक एक्टिविटी एंडरलीन) का स्तर और Oxedentive (ऑक्सीडेंटिव) तनाव भी बढ़ जाता है।

E-Cigarette (ई-सिगरेट) से भी Nicotine (निकोटीन) की लत लग सकती है। बंद जगहों पर Nicotine (निकोटीन) के वाष्प ज्यादा खतरनाक होते हैं। कृत्रिम स्वाद और Chemical (कैमिकल) उत्पाद पर नियंत्रण नहीं होने से Gilikol (गिलीकोल) और Esiton (एसिटोन) भी खतरनाक तत्व हैं। जो Carsinojen (कारसिनोजेन) का कारण बनते हैं। E-Cigarette (ई-सिगरेट) में धुआं नहीं होता, फिर भी लोग

इसके संपर्क में आते हैं। शोध में कारसिजेंस जैसे फॉर्मडिहाइड, बैन्जीन और तंबाकू आधारित न्रिटोसेमीन्स इस अप्रत्यक्ष E-Cigarette (ई-सिगरेट) के उपयोग से पैदा होने का पता चला है।

E-Cigarette (ई-सिगरेट) से Cencer (कैंसर) होने का खतरा एक पैकेट Cigarette (सिगरेट) पीने की तुलना में 5-15 गुना होता है। धुआंरहित कुछ तंबाकू में 3-4 गुना ज्यादा Nicotine (निकोटीन) होता है। जो हृदय के ढांचे में विषैलापन पैदा करने में सक्षम रहता है, और E-Cigarette (ई-सिगरेट) से यह खतरा टलने वाला नहीं है। एक-दूसरे के साथ ऐसी Cigarette (सिगरेट) का आदान-प्रदान करने से TB (टीबी), हेरप्स और हैपेटाइटिस जैसे वायरस वाले रोग फैल सकते हैं।

किशोरों में इसके बढ़ते प्रयोग की वजह से यह चिंता का विषय बन गया है Nicotine (निकोटीन) से दिमाग का विकास बाधित होता है। जिससे ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आती है, और गुस्से पर काबू पाना मुश्किल होता है। E-Cigarette (ई-सिगरेट) असल में तंबाकू उत्पाद ही होता है। इसके खतरों के बारे में कई प्रमाण मौजूद हैं।

E-Cigarette क्या होती है:

E-Cigarette (ई-सिगरेट) एक

प्रकार का Electronic Inhelar (इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर) होता है। जिसमें Nicotine (निकोटीन) और अन्य केमिकलयुक्त Liquid (लिक्विड) भरा होता है। यह Inhelar (इन्हेलर) Battery (बैट्री) की ऊर्जा से इस Liquid (लिक्विड) को भाप में बदल देता है। जिससे Smoking (धूम्रपान) करने/पीने वाले को Cigarette (सिगरेट) पीने जैसा एहसास होता है। लेकिन E-Cigarette (ई-सिगरेट) में जिस Liquid (लिक्विड) को भरा जाता है।वो कई बार Nicotine (निकोटिन) होता है, और कई बार उसमें उससे भी ज्यादा खतरनाक Chemical (केमिकल) डाले जाते हैं। इसलिए ई-सिगरेट को सेहत के लिहाज से सुरक्षित नहीं माना जाता है।

किस तरह आयी E-Cigarette (ई-सिगरेट) :

वर्ष 2003 में चीन में ई-सिगरेट का अविष्कार हुआ था। यह Battery (बैटरी) से चलने वाला Nicotine (निकोटिन) Delivery (डिलीवरी) का यंत्र है। इसमें मौजूद द्रव्य पदार्थ, जिसको भाप कहते हैं। ई-सिगरेट को गर्म करने के बाद मुंह से खींचा जाता है। इसे इसलिए बनाया गया था क्योंकि बिना Tar (टॉर) और Carbon (कार्बन) के फेफड़े तक ई-सिगरेट से कम मात्रा में Nicotine (निकोटिन) जाएगा। ई-सिगरेट को व्यावसायिक फायदे के लिए बनाया गया था।

क्या E-Cigarette (ई-सिगरेट) शरीर के लिए सुरक्षित है ? :

अधिकतर ई-सिगरेट में जिस प्रकार का Chemical (केमिकल) भरा होता है। वह Liquid (लिक्विड) Nickotine (निकोटिन) होता है। Nicotine (निकोटिन) एक नशीला पदार्थ है। इसके प्रयोग से इसकी लत लग जाती है। जो लोग थोड़े दिन ई-सिगरेट के प्रयोग के बाद अगर इसका उपयोग बंद कर दे तो उसे बेचैनी और उलझन की समस्या होने लगती है। Nicotine (निकोटिन) प्रयोग Heart (हृदय) और सांस के मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है।

E-Cigarette (ई-सिगरेट) द्वारा पॉपकॉन लंग्स से पीडि़त हो सकते हैं :

ई-सिगरेट एवं हुक्के का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। हुक्के में Flaverd E -Liquid (फ्लेवर्ड ई-लिक्विड) होता है, जबकि ई-सिगरेट में Chemical (केमिकल) Vepar (वेपर) के रूप में होता है। इन दोनों उपकरणों में हानिकारक डाई एसिटाइल केमिकल होता है। जिसके उपयोग से फेफड़े में Popcorn (पॉपकॉन) जैसा उभर जाने पर उसे Popcorn Lungs (पॉपकॉन लंग्स) कहते हैं। इस बीमारी को ब्रांक्योलाइटिस आब्लिट्रेंन कहा जाता है। इससे फेफड़ों की छोटी श्वांस नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं,

और वे आगे चलकर IALD (आइएलडी) में परिवर्तित हो जाती है। ई-सिगरेट की वजह से युवा एवं महिलाएं तेजी से फेफड़े की बीमारी के शिकार हो रहे हैं।

E-Cigarette (ई-सिगरेट) में हानिकारक Metal (मेटल):

ई-सिगरेट के Vepar (वेपर) को गर्म करने के लिए ई-कोयले (क्वाइल) का इस्तेमाल होता है। उस ई-कोयले (क्वाइल) में NIckotine (निकोटिन), फार्मालडिहाइड, Feynale (फेनाले), Tin (टिन), Nickil (निकिल), Copper (कॉपर), Led (लेड), Chromiyam (क्रोमियम), Orasenic (आर्सेनिक) एवं डाई एसेटाइल Metal (मेटल) हैं।

E-Cigarette (ई-सिगरेट) से होने वाले खतरे:

  • हृदय सम्बन्धी परेशानियां
  • चिड़चिड़ापन
  • गुस्सा
  • तनाव
  • अवसाद
  • बेचैनी
  • पाचन सम्बन्धी समस्याएँ