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| On 5 months ago

Each word includes knowledge and wisdom.

आलेख : हर शब्द है ज्ञान ज्योति।

हर शब्द है ज्ञान ज्योति।

मानवीय सवेंदनाओ की अभिव्यक्ति का एक माध्यम भाषा है तथा भाषा का आधार अक्षर, शब्द और वाक्य हैं। अक्षर मूल मे और वाक्य प्रकट स्वरूप है। शब्द भाषा का सौंदर्य, गरिमा और गहराई का द्योतक हैं।

सभ्यताओ के विकास ने भाषाओ का तथा भाषाओ ने साहित्य का सर्जन किया हैं। साहित्य सामाजिक स्थिती का दर्पण

हैं। साहित्य का बाहुल्य ही समाज के विकास का सुचक हैं। हमारी विराट संस्कृति मूलतः संस्कृत, द्रविड़, प्राकृत, हिंदी, उर्दू, फ़ारसी व अन्य भाषाओ के द्वारा अभिव्यक्त हैं।

हमारा सौभाग्य है कि नालंदा व तक्षशीला विश्वविद्यालयों के आक्रांताओ द्वारा किये गए विनाश के उपरान्त भी पर्याप्त प्राचीन साहित्य हमें उपलब्ध है।

किसी ग्रन्थ का अध्ययन और उसको जीवन में अंगीकार करना अतीव सौभाग्य का विषय हैं। यह हमारा

भाषा वैभव है कि हमारी हिंदी भाषा एक सम्पूर्ण वैज्ञानिकता के साथ अत्यन्त समृद्ध भाषा है। इसमे प्रत्येक मानवीय भाव, मनोदशा, संवेग, सम्बन्ध, वस्तु, प्राणी और मानसिकता हेतु पर्याप्त और वैकल्पिक शब्द भंडारण हैं।

प्रत्येक शब्द का निर्माण वैज्ञानिक आधार पर होने के कारण यह स्वयं में दैवीय शक्ति रखता है तथा सिद्ध होने पर मन्त्र का दर्जा प्राप्त कर लेता हैं। व्यवहारिक व सैद्धान्तिक दोनों स्तर पर हमारी भाषा

सौंदर्य के साथ ही गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण हैं। हम यदि किसी भी एक शब्द को चयनोपरांत उसके तत्व को समझ कर उसको समर्पण भाव से जीवन में " मनसा, वाचा व कर्मणा" स्वरूप में अंगीकार कर ले तो जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

साहस, समर्पण, स्वामिभक्ति, देशप्रेम, प्रेम, ममता, खोज इत्यादि जैसे शब्दमन्त्रो को धारण करने से ही अनेक कालजयी प्रतिभाओं यथा राणा प्रताप, अशोक महान, भगत सिंह, आज़ाद, पन्ना धाय, मीरा, आर्यभट्ट, बापु इत्यादि का विकास समाज में हुआ हैं। इन प्रातः स्मरणीय व्यक्तित्वों का अनुसरण करते हुए हम भी अपने लिए एक शब्द मन्त्र को चयन कर अपना विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।
सादर।
सुरेन्द्र सिंह चौहान।