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| On 3 years ago

Educational Conferences: Educational conferences in Rajasthan.

शैक्षिक सम्मेलन में विचारणीय मुद्दे।

राजस्थान राज्य में शिविरा पंचागनुसार शिक्षा, शिक्षार्थी व शिक्षक हितार्थ शिक्षकों के सम्मेलन आयोजित किये जाते है। इन सम्मेलनों में बड़ी संख्या में एकत्र शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता व शिक्षक हित के मुद्दों पर चर्चा पश्चात सरकार को प्रस्ताव प्रेषित करते है।

इन प्रस्तावों के आधार पर दशा-दिशा निर्धारित होती है। विभिन्न शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत सुझावों के आधार पर कुछ सुझाव निम्नानुसार प्रस्तुत है, जिन पर विस्तार से मंथन पश्चात प्रस्ताव तैयार किये जा सकते है।

1. नया शिक्षा सत्र एक जुलाई से ही प्रारम्भ किया जावे। ताकि सभी का पाठ्यकम एकसाथ पूरा हो सके।
2. कक्षा 1 से 5 के लिये विषयवार साप्ताहिक कांलांश भार जारी किया जावे।
3. कक्षा 1 से 5 को 4-30 घंटे और कक्षा 6 से 8 रोजाना 5 घंटे पढ़ाने का प्रावधान किया जावे।
4. कक्षा 6 से 8 के लिये विशेष टीएलएम तैयार करने हेतु बजट दिया जाए।
5. कक्षा 9 व 10 में प्रायोगिक परीक्षा और उसके अंक लागू किये जायें।
6. शिक्षकों के लिये दैनिक डायरी का सरल प्रारूप जारी किया जावे।
7. स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षा केवल अवकाश के दिनों करवाने की अनुमति दी जावे।
8.शाला दर्पण और शाला दर्शन में दर्ज आंकड़े बार-बार विद्यालयों से नहीं मांगे जावे।'
9. शिक्षकों को कम्प्यूटर की सहायता से अपने सेवा रिकार्ड और लाभ परिलाभ जानने का प्रशिक्षण दिया जावे।
10. ताला बंदी के लिये मात्र शिक्षक और संस्था प्रधान को दोषी नहीं माना जावे।
11. शाला समय बढ़ोतरी पर पुनर्विचार किया जाए।
12. रिव्यू डीपीसी से अलग अलग वर्ष में चयनितों की कांउसलिंग एक साथ नहीं की जावे।
13. कांउसलिंग की बड़ी खामीयो को दूर किया जावे। समस्त रिक्त पद प्रदर्शित किए जाएं।
14. नयी स्कूलों में अंग्रेजी व्याख्याता के पद दिये जावें।
15. शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, चित्रकला शिक्षकों की प्रथम श्रेणी में पदोन्नती की जावे।
16. जिला व मंडल बदलने पर भी स्थानान्तरण पश्चात वरिष्ठता कायम रखी जावे।
17. जिला स्तर पर शैक्षिक सम्बलन प्रकोष्ठ का गठन किया जावे।
18. शिक्षकों को केन्द्र के समान 8 वे वेतनमान में एक उच्च ग्रेड पे में कार्यरत मानकर 7 वें वेतनमान में वेतन निर्धारण किया जावे।
19. केन्द्र के शिक्षकों के समान वेतनमान पे-बैण्ड, ग्रेड-पे तथा भत्ते दिये जाने तथा छठे वेतन आयोग में रही वेतन विसंगतियां दूर की जावें।
20. विद्यार्थी मित्रों एवं कम्प्यूटर शिक्षकों को समायोजित कर नियमित किया जावें तथा पैराटीचर, शिक्षाकर्मी, एवं प्रेरकों को अध्यापक बनाया जावें।
21. शारीरिक शिक्षकों के स्टाफिंग पैटर्न के अनुसार पदस्थापन के निर्धारित मापदण्ड न्यूनतम 120 विद्यार्थी होने पर ही पदस्थापन का जो नियम बनाया गया, उसे समाप्त कर सभी विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों की नई भर्ती कर रिक्त पद भरे जाने तथा शारीरिक शिक्षकों की भी पदोन्नति कराई जावें।
22. शिक्षकों व प्रबोधकों की स्थानान्तरण नीति बनाई जावें ।
23. द्वितीय श्रेणी में नवनियुक्त शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर की जावें।
24. संविदा शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति से चयनित वेतन मान एवं 9, 18, 27 का लाभ दिया जावें।
25. वर्ष 2004 के बाद नियुक्त अध्यापकों एवं प्रबोधकों को पुरानी पेंशन स्क्रीम लागू करते हुये समस्त सेवा लाभ दिये जावें तथा प्रबोधकों का पद नाम अध्यापक किया जावें।
26. ग्रामीण क्षेत्र में सेवारत शिक्षकों को ग्रामीण सेवा भत्ता दिया जावे।
27. शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं कराया जावें
28.पंचायती राज के शिक्षकों का वेतन एक मुश्त स्वीकृत कर कोष कार्यालय के माध्यम से भुगतान कराया जावें।
29. निशुल्क एवं

अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के अनुसार विद्यालयों में कक्षा कक्ष, खेल मैदान एवं शिक्षकों के रिक्त पद पर पदस्थापन किया जावें।
30. नव क्रमोन्नत माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व लिपिकों के रिक्त पदों पद नई भर्ती द्वारा पद स्थापन किया जावें।
31. नये विद्यालय खोलने विद्यालय क्रमोन्नत करने एवं नये विषय खोलने के साथ ही मापदण्डानुसार पद एवं बजट स्वीकृति के आदेश जारी किये जावें।
32.समस्त श्रेणी के शिक्षकों की काउसलिंग प्रक्रिया द्वारा हो रही पदोन्नति में योगकाल एवं यात्रा भत्ता दिया जावें।
33. प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद सृजित किये जावें।
34. शिक्षा विभाग मे कार्यालयों में लिपिकों के पदों में वृद्धि की जावें।
35. सभी शिक्षकों के लिये स्थाई स्थानान्तरण नियम बनाये जावें।