Educational Innovations- Inspiring students and enriching learnings. शैक्षिक नवाचार- प्रेरणा व सरल अधिगम हेतु

शैक्षिक नवाचार: लल्लाई व अजगरा स्कुलों में प्रशंसनीय प्रयास।

राजकीय विद्यालयों द्वारा वर्तमान में समाज मे अपनी प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने हेतु अनेक प्रयास किये जा रहे है। इन प्रयासों में से कुछ प्रयास वे है जिन्हें भूतकाल में विभिन्न विद्यालयों द्वारा नियमित रूप से काम में लिया जाता था व कुछ प्रयास नवीन है।

लल्लाई व अजगरा ग्राम, सरवाड़, अजमेर

राउमावि लल्लाई एवम राउमावि अजगरा में स्टार ऑफ द क्लास और स्टार ऑफ द स्कूल नवाचार शुरू किए गए है।
अजमेर जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूरी पर लल्लाई व अजगरा गाँव (सरवाड़ तहसील) के इन विद्यालयों में अपनाए गए नवाचारों से राज्य के अन्य विद्यालय भी प्रेरित होंगे। जिले की ज़िलाधीश आरती डोंगरा की प्रेरणा से यह नवाचार आरम्भ किये जा रहे है।

स्टार ऑफ द क्लास एवं स्टार ऑफ द स्कूल

इन नवाचारों के तहत प्रतिमाह कक्षावार एवं संपूर्ण विद्यालय से एक-छात्र या छात्र को स्टार ऑफ द क्लास एवं स्टार ऑफ द स्कूल का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। बच्चों द्वारा नियमित उपस्थिति, होमवर्क और व्यवहार आदि मापदंडों के आधार पर रिपोर्ट कार्ड बनेगा। सर्वाधिक स्कोर वाले विद्यार्थी को उस कक्षा का स्टार ऑफ द कक्षा
घोषित कर महीने की एक तारीख को प्रार्थना सभा में प्रिसिपल द्वारा प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
स्टार विद्यार्थी का फोटो संबंधित कक्षा कक्ष में एक माह
तक लगा रहेगा। पूरे विद्यालय में सर्वश्रेष्ठ छात्र का चयन कर स्टार ऑफ दी स्कूल का प्रमाण पत्र दिया जाएगा और उसका फोटो प्रधानाचार्य के कक्ष में लगा रहेगा।
इस नवाचार से विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतियोगिता स्थापित होगी एवम विद्यालय के परिणाम में सकारात्मकता आएगी।

गेस्ट ऑफ दा मंथ।

बच्चे अपने आसपास के परिवेश एवं समाज से बहुत कुछ सीखते हैं, इसके अलावा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की उनको जानकारी होना भी आवश्यक है। गोद लिए गए स्कूल में प्रत्येक माह में एक दिन ‘इनसे मिलिए’ कार्यक्रम रखा जाएगा, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्र के व्यक्ति जैसे शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, बैंकिंग, प्रशासन, पुलिस, समाजसेवा व प्रतियोगी परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों से बच्चों को रूबरू कराएंगे। जिससे बच्चों को प्रेरणा मिलेगी। इसी प्रकार ‘इनको जानिए’ एक ऐसा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत सरकार के महत्वपूर्ण फ्लैगशिप व कल्याणकारी योजनाओं की संपूर्ण जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारी द्वारा दी जाएगी। इसके पीछे यही उद्देश्य है कि अध्ययनरत युवाओं को यदि योजनाओं की संपूर्ण जानकारी दी जाए तो उनको या परिवार को आसानी से लाभ मिल सकेगा।

माय कॉर्नर/ यह मेरा कोना है।

प्रायः विद्यालय परिसर को उपेक्षित छोड़ दिया जाता है, खासकर परिसर के विभिन्न कोनों एवं दीवारों को। इसके लिए एक पहल की गई है। जिसमें ‘यह मेरा कोना है’ नाम से कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत संपूर्ण विद्यालय परिसर को चार कोनों में बांटकर विद्यार्थियों के अलग अलग ग्रुप बनाकर एक-एक कोना अलग-अलग ग्रुप को गोद दिया जाएगा। गोद दिए गए उस कोने की साफ-सफाई से लेकर रंगाई-पुताई, चित्रकला व क्यारी बनाकर फुलवारी लगाने जैसे समस्त कार्य उसी ग्रुप द्वारा किए जाएंगे। इसके लिए एक-एक अध्यापक को ग्रुप इंचार्ज बनाया जाएगा। वर्ष के अंत में जिस ग्रुप के कोने को श्रेष्ठ घोषित किया जाएगा उसे प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

आओ ! वृक्ष गोद लें !!

प्रत्येक कक्षा को एक पौधा दिया गया है। पौधरोपण से लेकर उसका सार-संभाल करते हुए उसके पेड़ बनने तक का जिम्मा उसी कक्षा का होगा। गोद लिए गए वृक्ष के समीप एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर गोद लेने वाले विद्यार्थियों का नाम अंकित होगा। वृक्ष एक वर्ष का होने पर उसका जन्मदिन समारोहपूर्वक मनाया जाएगा।

सुलेख कार्यक्रम

विद्यार्थियों के हस्तलेख व हस्तलिपि को सुधारने के लिए सुलेख कार्यक्रम अपनाया गया है। जोधपुर के एक निजी विद्यालय के विद्यार्थी अपनी सुंदर हस्तलिपि के कारण प्रसिद्ध रहे है। इस विद्यालय में नियमित रूप से सुलेख कार्यक्रम संचालित किया जाता था।

एक निवेदन

सभी संस्थाप्रधानों से सादर निवेदन है कि वे भी अपने विद्यालयों में एकाधिक नवाचार आरम्भ करे जिससे विद्यार्थियों में सकारात्मक संदेश प्रसारित होगा व शैक्षणिक वातावरण की स्थापना होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here