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Effective School supervision by Headmaster and Principal

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संस्था प्रधान द्वारा प्रभावी शैक्षिक परिवीक्षण।

विद्यालय समुन्नयन एवं शिक्षण सुधार की दृष्टि से प्रभावी परिवीक्षण आवश्यक है । संस्था प्रधान अन्य कार्य की प्रवृतियों के क्रियान्वयन के साथ ही प्रत्येक प्रवृति एवं शिक्षण कार्य का प्रभावी परिवीक्षण हो इस हेतु निम्नांकित प्रक्रिया अपनाई जावें ।
(1) प्रत्येक परिवीक्षण कर्ता को चाहिए कि वे संलन प्रारुप परिशिष्ठ -1 में परिवीक्षण की वार्षिक योजना बनाई जावें-
नोट :- शिक्षण कार्यलिखित जांच कार्य प्रवृत्ति संचालन परिवीक्षण हेतु पृथक-पृथक योजना का निर्माण किया जावें ।
(2) प्रत्येक अध्यापक का वर्ष में तीन बार परिवीक्षण शिक्षणलिखित कार्यप्रवृत्ति संचालन परिवीक्षण अवश्य किया जावें । यदि शिक्षकों की संख्या 30 से अधिक हो तो दो बार परिवीक्षण किया जावें ।
(3) एक दिन में दो से अधिक शिक्षकों का परिवीक्षण नहीं किया जावें ।
(4) नवनियुक्त शिक्षकों अथवा प्रभावी शैक्षिक/सहशैक्षिक कार्य नहीं करने वाले शिक्षकों का 2-3 से अधिक बार/परिवीक्षण किया जाकर उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाय ।
(5) माह के अन्त में स्टाफ बैठक आयोजित कर माह में सम्पादित परिवीक्षण के परिप्रेक्ष्य में परिवीक्षण में पाई गई कमियों/उत्कृष्ठ कार्य पर चर्चा करें ।
(6) विषयवस्तु के प्रस्तुतीकरण की शुद्धता की जाँच हेतु विषय अध्यापक (वरिष्ठतम) की भी सहायता ली जावें ।
(7) परिवीक्षण का उद्देश्य अध्यापककर्मचारी के कार्य निष्पादन में सुधार लाना है । अतः यथा सम्भव हतोत्साहित करने वाली टिप्पणी नहीं देवे तथा चर्चा के माध्यम से समाधानात्मक सुझाव देखें ।

प्रधानाध्यापक परिवीक्षण

1. शिक्षण कार्य।

एक संस्था प्रधान को अपने विद्यालय में कार्यरत अध्यापकों के द्वारा किये जा रहे शिक्षण कार्य के परिवीक्षण हेतु योजना निर्माण करनी होती है। इसमें सूचित व असूचित दोनो प्रकार के निरीक्षण सम्मिलित है।

2. लिखित कार्य।

शिक्षण कार्य के साथ ही अध्यापक द्वारा कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों को प्रदत गृह कार्य व कक्षा कार्य का परिवीक्षण भी संस्था प्रधान द्वारा नियमित रूप से किया जाता है।

उदाहरण -
निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर द्वारा मार्च 2004 में निरीक्षण के दौरान की गई कार्यवाही पत्र क्र. शिविरा प्रारम्भिक मोनों / 13712 / वो - द्वितीय / 2003 दिनांक 15-4-2004

".. जिले की एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में देखा गया कि एक अध्यापिका ने गृहकार्य की अभ्यास पुस्तिका 23 जुलाई को जाँची उसके पश्चात पूरे सत्र तक अभ्यास पुस्तिकाएँ नहीं जाँची गई । जाँच कार्य तथा अन्य कार्यों में पाई गई अनियमितता के लिये सम्बन्धित अध्यापिका एवं प्रधानाध्यापिका को सी सी ए - 17 में आरोप पत्र 2
जारी किया ।"