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Film GOLD: Educational points, review and recommendation.

फ़िल्म "गोल्ड": एजुकेशनल रिव्यू एंड रिकमंडेशन।

अक्षय कपूर व मौनी रॉय अभिनीत व निर्देशक रीमा कगाती की कृति "गोल्ड" शैक्षिक दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण फ़िल्म है। इस फ़िल्म ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से निम्न महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पर्श किया है।

फ़िल्म की कहानी।

फ़िल्म की कहानी के केंद्र में "तपन" नामक बंगाली युवक है जो हॉकी खिलाड़ी नही होने के बावजूद हॉकी के प्रति दीवाना है। 1936 बर्लिन ओलम्पिक व 1948 के लंदन ओलंपिक के बीच भारतीय उपमहाद्वीप में आये राजनीतिक परिवर्तनों के बीच हॉकी के "गोल्ड मेडल" को जीतने की जद्दोजहद फ़िल्म में दर्शायी गई है।

राष्ट्रीय एकता

फ़िल्म में अंतिम मैच के मध्यांतर में फ़िल्म के सूत्रधार तपन इस बात पर महत्व देते है कि टीम का कॉम्बिनेशन स्टेट कोटा प्रतिनिधित्व के आधार पर करने से कहीं अधिक आवश्यक है कि हम टीम के विनिंग कॉम्बिनेशन के बारे में सोंचे।

संघर्ष से विजय

फ़िल्म के हीरो तपन को राष्ट्रीय टीम के गठन व उसे ओलम्पिक में खेलने हेतु बहुत संघर्ष करना पड़ता है। अनेक बाधाओ के बावजूद वह अपना संघर्ष नही छोड़ता व अंत मे उसकी टीम गोल्ड मैडल जीत जाती है।

समूह भावना से ही कार्य सम्पन्न।

सेंटर फॉरवर्ड राणा प्रताप एक बेहतरीन खिलाड़ी होने के बावजूद टीम वर्क में विश्वास नही करता लेकिन अंततः उसे यह मानना पड़ता है कि अगर लक्ष्य प्राप्त करना है तो हमें एकल सफलता प्राप्ति की अपेक्षा समूह की आवश्यकता के अनुरूप कार्य करना ही उचित है।

देश सबसे पहले।

जीवन मे बहुत प्रकार की तकलीफ सहन करनी पड़ती है लेकिन उन सबके बावजूद देश सबसे पहले

है। फ़िल्म की अभिनेत्री टीम की तैयारी के लिए अपने गहने कई बार गिरवी रखती है। टीम के लिए पूर्ण समर्पण से सेवा प्रदान करती है।

नकारात्मक लोगों से भी सम्वाद रखे।

हॉकी फेडरेशन के मिस्टर मेहता फ़िल्म के हीरो तपन के हर कार्य में बाधा डालते है लेकिन तपन उनसे सम्वाद रखता है। अंत मे मेहता को अपनी गलती का एहसास होता है एवम वह भी तपन का साथ देता है।

इतिहास को भूलो मत।

अंग्रेज हमेशा डिवाइड एन्ड रूल की रणनीति अपना कर देश पर राज करते थे।

आज भी चन्द लोग समाज को बांटने में लगे है, हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि हम देश के हित मे कार्य करे व समाज को कदापि नही विभाजित होने देवे।

निष्कर्ष-

"गोल्ड" एक फ़िल्म है तथा परिवारिक फ़िल्म की कैटेगरी में सम्मिलित है। कुशल निर्देशन, श्रेष्ठ अभिनय, विषय की गम्भीरता के आधार पर फ़िल्म दर्शनीय है। फ़िल्म का म्यूजिक एवरेज है व कुछेक दृश्यों में रफ्तार टूटती है।
कुल मिलाकर हम फ़िल्म को रिकमंड करते है।